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JAMSHEDPUR : अपने खराब प्रदर्शन को लेकर लगातार आलोचनाओं का शिकार हो रही अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज झारखंड की टाटा आर्चरी एकेडमी की दीपिका कुमारी ने सीनियर वर्ग के विश्वकप में पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया. अमेरिका के सॉल्टलेक सिटी में आयोजित विश्वकप प्रतियोगिता में दीपिका ने खराब फार्म से उबरकर विश्वकप के तीसरे चरण में जर्मनी की मिशेली क्रोपेने को हराकर स्वर्ण पदक प्राप्त किया. दीपिका ने जर्मनी की मिशेली क्रोपेन को 7-3 से हराया और व‌र्ल्ड कप में स्वर्ण पदक भारत के नाम किया. वर्ष 2008 में कैडेट चैंपियनशिप व जूनियर व‌र्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने के छह साल बाद दीपिका ने सीनियर वर्ग का पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया. इसके पहले दीपिका ने व‌र्ल्ड कप फाइनल में 4 बार (2011, 2012, 2013 और 2015) रजत पदक जीता था. दीपिका ने इस जीत के साथ ही तुर्की के सैमसन में होने वाले तीरंदाजी व‌र्ल्ड कप फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया. यह इस सत्र की आखिरी प्रतियोगिता है जिसमें वो सातवीं बार देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. दीपिका ने इसके पहले साल 2012 की विश्वकप प्रतियोगिता में स्वर्ण जीता था.


ऐसे तय हुआ स्वर्ण पदक का सफर

दीपिका ने संभावित 30 अंकों में से 29 अंक बनाकर बेहतरीन शुरुआत की और 2-0 की बढ़त बना ली. उन्होंने इसके बाद क्रोपेन के साथ अंक बांटे. जर्मन खिलाड़ी ने तीसरा सेट जीतकर मुकाबला 3-3 से बराबर कर दिया. इसके बाद दीपिका ने 29 और 27 के स्कोर पर चौथा और पांचवां सेट जीता. इस दौरान जर्मन खिलाड़ी क्रोपेन का स्कोर 26 रहा. इस तरह से भारतीय खिलाड़ी ने 7-3 से मैच अपने नाम कर लिया.


आखिरकार मैं सफल रही : दीपिका

दीपिका ने विश्वकप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कहा कि आखिरकार मैंने यह प्रतियोगिता जीत ली. यह जीत मेरे लिए बहुत जरूरी थी. इस मैच के दौरान दीपिका ने बताया कि मैं दोहरा रही थी कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो. अपने खेल का लुत्फ उठाओ और जीत या हार को भूल जाओ.


पांचवां चरण होता है फाइनल

तीरंदाजी विश्वकप कुल पांच चरणों में होता है. दीपिका ने तीसरा चरण जीता है. इसके बाद चौथा चरण है. चौथे चरण के बाद अंतिम रूप से फाइनल राउंड होगा. इस राउंड को जीतने वाला विश्वकप विजेता बनता है.