- साउथ सिटी को मुख्य शहर से जोड़ने वाली सबसे अहम यशोदा नगर बाईपास-टाटमिल रोड पर रेंग रहा है विकास

- करीब 3.5 किलोमीटर की इस रोड के चौड़ीकरण और डिवाइडर बनाने काम तीन साल बाद भी पड़ा है अधूरा

- खूनी सड़क के नाम से कुख्यात है रोड, एक्सीडेंट में दर्जनों लोग गंवा चुके हैं जान, फिर भी किसी को फिक्र नहीं

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kanpur : डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी बनाने के वादों के बीच हम आज विकास की एक ऐसी 'तस्वीर' दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आपको न सिर्फ विकास कार्यो की रफ्तार की हकीकत दिख जाएगी. बल्कि सरकारी दावों के कितना दम है, इसका भी पता चल जाएगा. साउथ सिटी को मुख्य शहर से जोड़ने वाली सबसे अहम यशोदा नगर बाईपास-टाटमिल रोड पर तीन सालों से विकास का पहिया रेंग रहा है. विकास ही लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. महज साढ़े तीन किमी की रोड को चौड़ा करने और उस पर डिवाइडर बनाने का काम तीन साल बीतने के बावजूद 25 फीसदी भी नहीं पूरा हुआ है. पब्लिक के करोड़ों रुपए की बर्बादी अलग से हाे रही है.

विकास ही बन गया मुसीबत

साउथ सिटी की इस रोड से हजारों लोडेड ट्रक, सैकड़ों रोडवेज बसों सहित रोजाना 50 हजार से भी ज्यादा वाहन निकलते हैं. इस कारण रोड पर चल रहा काम ही अब लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. बार-बार काम शुरू होता है और किसी न किसी कारण के रुक जाता है. कभी बजट का रोड़ा तो कभी रोड किनारे लगे बिजली के पोल काम में बाधा बन जाते हैं. रोड चौड़ीकरण के काम में सबसे बड़ी बाधा केस्को की लाइन ही है. जो तीन साल बाद भी पूरी तरह शिफ्ट नहीं हो पाई है. अभी सिर्फ खंबे ही लग पाए हैं. खूनी सड़क के नाम से कुख्यात इस रोड पर हर साल औसतन 100 से ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं. इसके बाद भी रोड के चौड़ीकरण के काम में हद दर्जे की लापरवाही बरती जा रही है.

2014 में पड़ी थी 'नींव'

जानकारों के अनुसार यशोदानगर बाईपास से टाटमिल तक के रूट पर रोजाना 6 लाख से अधिक राहगीरों का आवागमन होता है. इनकी संख्या में लगातार हो रहे इजाफे और बदहाल हुए मार्ग को देखते हुए तत्कालीन विधायक अजय कपूर ने 2014 में इस रूट का जीर्णोद्धार कराने का बीड़ा उठाया और शिलान्यास भी कर दिया. इसी के बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण यह कार्य अधर में लटक गया. 2016 दिसंबर में एक बार फिर से 19.48 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को शुरू किया गया, जो आज तक पूरा नहीं हो सका.

कभी केस्को ताे कभी बजट

लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन राकेश सिंह बताते हैं कि विकास कार्य के तहत करीब 3.5 किमी के इस रूट में डिवाइडर, स्ट्रीट लाइटें और सड़क चौड़ीकरण का काम किया जाना है. इससे राहगीरों को इस रूट पर आए दिन लगने वाले जाम, आए दिन होने वाले एक्सीडेंट से निजात मिल सकती थी. अधिकारी के अनुसार शासन से बचा हुआ करीब 12 करोड़ रुपए न आने के कारण कार्य की रफ्तार ने लगभग दम तोड़ दिया और आज स्थित बद् से बद्तर हो चुकी है.

..तो इसलिए हुई लेटलतीफी

अधिकारी के अनुसार 19.48 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत रूट पर लगे बिजली के पोल हटाने के साथ की गई थी. इसके लिए बिजली विभाग को करीब 3 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया गया. इसके बाद भी अभी तक सिर्फ 50 प्रतिशत पोल ही सड़क से शिफ्ट किए जा सके हैं. वहीं, बचे करीब 12 करोड़ रुपए शासन से न मिलने के कारण भी विकास कार्य की रफ्तार धीमी हो गई.

ये है आंखों देखा हाल

विकास कार्य शुरू होने से पहले इस रूट पर वाहनों का आवागमन कुछ समस्याओं के साथ चल रहा था. विकास कार्य के लिए सड़क के दोनों ओर खुदाई की गई. डिवाइडर निर्माण के लिए भी सड़क खोदी गई, लेकिन कुछ हिस्से को छोड़ दें तो आज तक डिवाइडर पूरा नहीं बन सका, जिससे राहगीरों को यहां उड़ने वाली धूल मिट्टी का सामना करना पड़ता है. दोनों ओर सड़क की चौड़ाई पहले से भी कम हो जाने से राहगीरों को आवागमन में समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं, जिससे अक्सर जाम भी लगता है. सड़क पर फैली निर्माण सामग्री से राहगीर अक्सर गिर कर चुटहिल हो जाते हैं.

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- 3.5 किलोमीटर है बाईपास से टाटमिल तक रोड की लंबाई

- 19.48 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है रोड चौड़ीकरण व डिवाइडर का

- 40 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े वाहन इस रूट से रोजाना गुजरते हैं

- 15 लाख से ज्यादा की साउथ सिटी की आबादी की मुख्य सड़क

- 4 साल पहले 2014 में रोड के जीर्णोद्धार का खाका तैयार हुआ था

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वर्जन-

2016 के लास्ट में इस मार्ग पर विकास कार्य शुरू किया गया था. करीब 12 करोड़ रुपए शासन से अभी तक न मिल पाने के कारण कार्य की रफ्तार धीमी पड़ी हुई है. पैसा सेंक्शन होते ही कार्य को जल्द पूरा कराया जाएगा.

- राकेश सिंह, एक्सईएन, लोक निमार्ण विभाग

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