इस वर्ष त्रयोदशी शुक्रवार दिनांक 25 अक्टूबर को दिन में 4: 32 बजे से लग रही है जो शनिवार 26 अक्टूबर को दिन में 2: 8 बजे तक रहेगी। यमराज को दीपदान के लिए सायंकाल व्याप्त त्रयोदशी की प्रधानता है। अत: शुक्रवार को सायंकाल त्रयोदशी होने से 25 अक्टूबर को धनतेरस मनाया जायेगा। इसी दिन इन्होंने आयुर्वेद का भी प्रादुर्भाव किया था।

रोगों से मुक्ति दिलाते हैं धन्वन्तरि

भगवान धनवन्तरि हर प्रकार के रोगों से मुक्ति दिलाते हैं। इसलिए कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धनवन्तरि की पूजा करना चाहिए। धनवन्तरि को हिन्दू धर्म में देवताओं का वैद्य माना जाता है। ये एक महान चिकित्सक थे जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं। इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र मंथन के समय हुआ था।

धनतेरस के दिन यमुना स्नान का महत्व

स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन अपमृत्युनाश के लिए सायंकाल घर से बाहर यमराज के लिए दीपक का, औषधियों का दान करने का विधान है। दान करने का मंत्र-

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन यमया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीयतां ममेति।।

कार्तिकस्य सिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे।

यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति।।

इसलिए नरकोद्देशेन चतुर्वर्ति पर दीपदान करना चाहिए।

यमुना जी यमराज की बहन हैं इसीलिए धनतेरस के दिन यमुना-स्नान का भी विशेष माहात्म्य है। यदि पूरे दिन का व्रत रखा जा सके तो अति उत्तम है।

-ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश प्रसाद  मिश्र

Posted By: Vandana Sharma