पुलवामा में हुए हमले के बाद भारत सरकार कुछ नहीं कर पाई है. दिखावे के लिए टमाटर और पानी के निर्यात पर पांबदी लगाई है जिससे वे अपनी नाकामी छिपा सकें. इसी तरह स्वच्छता, रोजगार, नारी सुरक्षा, किसान, हेल्थ, क्राइम जैसे अहम मुद्दों पर भी मिलेनियल्स के लिए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट और रेडियो सिटी द्वारा ऑर्गनाइज राजनी-टी प्रोग्राम में यंगस्टर्स ने बेबाकी से अपनी बात कही. इस बार इलेक्शन में 50 फीसदी से भी ज्यादा यंगस्टर्स पार्टिसिपेट करेंगे इसलिए लोक सभा इलेक्शन में यंगस्टर्स की भूमिका अहम साबित होगी. इलेक्शन को लेकर गोरखपुर के यंगस्टर्स की राय जानने के लिए सोमवार को सिविल लाइंस में आरजे सारांश ने कई टॉपिक्स पर बात की. जिसमें ब्वॉयज और ग‌र्ल्स ने अपनी बातों को शेयर किया.

एजुकेशन में हो ट्रांसपेरेंसी

दिन ब दिन शिक्षा का स्टैंडर्ड घटता जा रहा है. इसको लेकर कविता सिंह ने कहा कि एजुकेशन में ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए. हम लोग परीक्षा देते हैं तो पता चलता है कि कानूनी पचड़े में पड़ रिजल्ट ही नहीं घोषित होता है. इसमें हमारी कोई गलती नहीं होती है इसके बाद भी हमें इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. आए दिन बड़े-बड़े कॉम्प्टीशन के पेपर ही आउट हो जाते हैं. इस पर आखिर कोई भी सरकार क्यों नहीं रोक लगा पाती है. इस बार इलेक्शन में मेरा वोट उसी को जाएगा जो एजुकेशन के स्टैंडर्ड को बरकरार रख फ्रेश रोजगार के अवसर प्रदान करेगा.

स्टूडेंट्स के लिए भी हो फास्ट ट्रैक कोर्ट

देश में होने वाले बड़े-बड़े मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई है. इस बात का जिक्र करते हुए हरिलाल ने कहा कि इसी तरह एजुकेशन और स्टूडेंट्स से जुड़े मामलों के लिए भी सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनानी चाहिए. क्योंकि कॉम्प्टीशन से जुड़े मामले आजकल ज्यादातर कोर्ट में ही जा रहे हैं. कोर्ट में चक्कर काटकर स्टूडेंट्स की ऐज निकल जा रही है. बाद में उसके पास दूसरा कोई ऑप्शन भी नहीं रह जा रहा है.

चुनाव के टाइम ही क्यों निकलती वैकेंसी

देखा जाता है कि सरकार को इलेक्शन के टाइम ही योजनाओं और वैकेंसी की याद आती है. इस दौरान सरकारें अपनी तमाम योजनाओं को लॉन्च करती हैं और कई वैकेंसी भी निकालती हैं. राहुल ने ये बताते हुए कहा कि ये हाल सभी पार्टियों का है. इनको चार साल तक कुछ भी याद नहीं रहता है. जबकि इलेक्शन आते ही पब्लिक का वोट लेने के लिए न जाने कहां से इनके पास इतनी वैकेंसी आ जाती हैं. इसलिए हर किसी को अपना वोट देते हुए एक बार ये जरूर विचार करना चाहिए कि इसमें उनका फ्यूचर ब्राइट है कि नहीं.

सुरक्षा में लग रही सेंध

सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए राजवीर ने कहा कि आए दिन बॉर्डर पर हमारे सुरक्षाकर्मी शहीद हो रहे हैं. वहीं पुलवामा हमला तो अब तक का सबसे बड़ा हमला है जो देश की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है. सुरक्षा में आखिर क्यों सेंध लग रही है. इसको रोकने के लिए सरकार क्यों नहीं कड़ा एक्शन ले रही है. जिससे ऐसा करने से पहले कोई भी सोचे. देश के हित में जो कोई भी काम करेगा उसी को वोट जाएगा.

महिलाओं को मिले आजादी

महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर वंदना ने बेबाकी से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश में सख्त से सख्त कानून बनाने के बाद भी रेप, दहेज हत्या और छेड़छाड़ की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है. इसके लिए सरकारें मोमबत्ती तो जलाती हैं लेकिन हैवानियत करने वालों के साथ कोई भी एक्शन नहीं ले पाती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण घूसखोरी है. जिसको देने के बाद कोई भी अपराध छुपाया जा सकता है. सरकारें अगर ऐसा करने वालों को कड़ी सजा दें तो पीडि़त को इंसाफ मिलेगा और गलत करने वालों में डर पैदा होगा.

झूठा वादा करने वालों का हो सफाया

इलेक्शन को लेकर सौरभ ने अहम मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इलेक्शन के दौरान नेता तमाम वादे करते दिखते हैं. पब्लिक को लुभाने के लिए पार्टियों के द्वारा घोषणा पत्र जारी किए जाते हैं. जिनको चुनाव बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. ऐसा करने वालों से सावधान रहकर पब्लिक को अपना वोट देना चाहिए. जिससे अच्छी सरकार बने और देश विकास करे.

एजुकेशन सुधरेगा तो देश आगे बढ़ेगा

देश के विकास के लिए बातें करते हुए राहुल ने कहा कि जिस देश का एजुकेशन सिस्टम अच्छा होता है वो हमेशा तरक्की करता है. इसके लिए उन्होंने अमेरिका का भी उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी शिक्षित लोगों की कमी देखी जाती है. जबकि इसके लिए सरकारों ने तमाम योजनाएं और सरकारी स्कूल भी खोल रखे हैं. लेकिन इसके बाद भी घर-घर तक शिक्षा नहीं पहुंच रही है. इसका एक कारण ये भी है कि सरकार की योजनाओं को अमल में लाने के लिए लगाए गए जिम्मेदार अपना काम ईमानदारी से नहीं करते. जिससे कई लोग तो योजनाओं के बारे में जान भी नहीं पाते हैं.

कैसे होगा डिजिटल इंडिया

डिजिटलाइजेशन पर मनीष ने कहा कि सरकार ने तो बड़ी आसानी से डिजिटल इंडिया का राग अलाप दिया लेकिन इसको समझ पाने में पब्लिक सक्षम है कि नहीं इस हकीकत का पता नहीं लगाया. उन्होंने कहा कि डिजिटल होने के लिए शिक्षा की पद्वति को बदलना होगा. तब जाकर डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो पाएगा. उन्होंने कहा कि बैकों में ट्रांजेक्शन के लिए ग्रीन कार्ड मांगा जा रहा है जबकि ग्रीन कार्ड के बारे में सभी बेखबर हैं.

बरसात में सिटी बन जाती स्वीमिंग पूल

सिटी की सफाई पर बोलते हुए वंदना ने कहा कि घर पर कूड़ा गाड़ी आती है. वे उसी में अपना कूड़ा फेंकती हैं. तभी सौरभ ने भी इसका जवाब देते हुए कहा कि बरसात में गोरखपुर सिटी स्वीमिंग पूल बन जाती है. इसके बाद जिम्मेदार इधर-उधर दौड़ भाग करते हैं. उन्होंने कहा कि यही जिम्मेदार अगर बरसात के पहले सिटी की नालियों और सड़कों को दुरुस्त कर दें तो ऐसी स्थिति ही नहीं आएगी. इसकी वजह से शहर में कई गंभीर बीमारियां भी पनपती हैं. इसमें इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी तो बेहद ही गंभीर है.

हम बदलेंगे तब ही होगी सफाई

चर्चा के दौरान कविता ने बदहाल सफाई के लिए पब्लिक को ही जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि हर कोई सफाई की बात करता है लेकिन वे खुद क्या करते हैं इस पर ध्यान नहीं देते हैं. सड़क पर चलते समय कुछ भी खाया और सड़क पर फेंक दिया ये आम बात है. इसी तरह सड़क से गुजरने वाले लाखों लोग यही काम करेंगे तो नगर निगम या फिर कोई जिम्मेदार कितनी भी कोशिश कर ले, सफाई नहीं हो पाएगी. इस लिए सबसे पहले हम लोगों को खुद को बदलना चाहिए.

मेरी बात

मेरा कहना है कि देश की सुरक्षा में सेंध लग रही है. इस पर सरकार टमाटर और पानी को बंद करके अपनी पीठ थपथपा रही है. सरकार चाहे जो भी हो उसे पुलवामा हमले के बाद कड़ा एक्शन लेना चाहिए. देश में छुपे घुसपैठियों और मुखबिरी करने वाले देशद्रोहियों के साथ अब सख्ती से पेश आने का समय आ गया है. नहीं तो इसी तरह भेदिए सेंध लगाते रहेंगे और हमारे जवान शहीद होते रहेंगे. इसके लिए सभी पार्टियों को भी एकमत होकर कानून का साथ देना चाहिए. ये नहीं कि एक पार्टी सजा दे रही तो उसे कई नेता गलत साबित करने में लगे हुए हैं. गलत करने वालों का पक्ष लेने पर आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा.

- राहुल राव

कड़क मुद्दा

इलेक्शन के दौरान ही सभी सरकारें अपना पिटारा खोलती हैं. आखिर इस समय उनके पास इतनी वैकेंसी कहां से आ जाती है. जिसके लिए युवा वर्ग चार साल तरसता है और कई की तो ऐज ही निकल जाती है. इलेक्शन में सभी पार्टियां पब्लिक को लुभाने के लिए घोषणा पत्र को जारी करती है जिसको इलेक्शन बाद भूल जाती है. ऐसी सरकारों और नेताओं का बहिष्कार करने की जरूरत है.

सतमोला खाओ, कुछ भी पचाओ

देशहित में सरकार की लापरवाही जवानों पर भारी पड़ रही है. 26 जनवरी और 15 अगस्त में करतब दिखाकर सरकार अपनी ताकत का प्रदर्शन तो खूब करती है. लेकिन हकीकत में अंदर से सब खोखला नजर आता है. सेना में जाने के बाद सैनिक का पूरा जीवन देश की रक्षा करते-करते बीत जाता है. इस दौरान वे अपने परिवार को भी भूल जाता है. इसके बाद भी सैनिकों की सुरक्षा के लिए सरकार लापरवाह है.

कोट्स

एजुकेशन में ट्रांसपेरेंसी आनी चाहिए. आए दिन परीक्षा के पेपर आउट हो जाते हैं. जिससे बाकी परीक्षार्थियों का प्रयास भी बेकार हो जाता है. रिजल्ट के इंतजार में ऐज भी निकल जाती है.

- कविता सिंह यादव

स्वच्छता के लिए बेहतर इंतजाम होना चाहिए. कुछ जगहों पर तो ठीक से काम हो रहा है. लेकिन सिटी के कुछ हिस्से अभी भी गंदगी से पटे हुए हैं.

- वंदना सिंह

डिजिटिलाइजेशन तो कर दिया लेकिन सभी को शिक्षित नहीं किया गया. जिससे सरकार का साकार नहीं हो पाएगा. इसलिए सबसे पहले शिक्षा की पद्वति को बदलते हुए हर किसी को शिक्षित करना बेहद जरूरी है.

मनीष चंद

एजुकेशन से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनानी चाहिए. जिससे इन मामलों की लंबी डेट न पड़कर इसका जल्दी निपटारा हो जाए

- हरिलाल

योजनाएं तमाम हैं लेकिन वो सभी लोगों तक पहुंच नहीं पाती हैं. इसके जिम्मेदार इसमें भी पार्शियल्टी करके अपने खास लोगों को ही लाभ पहुंचा रहे हैं.

- सौरभ सिंह

बरसात में आधा शहर पानी में डूब जाता है तब जाकर जिम्मेदार दिखाई पड़ते हैं. इसके लिए उन्हें पहले से तैयारी करनी चाहिए.

- विजय कुमार

सिटी में कानून व्यवस्था तो दुरुस्त हुई है लेकिन महिला सुरक्षा अभी खतरे में है. इसके लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है. जिससे महिलाएं भी आजादी से अपना काम कर सकें.

- संदीप कुमार

देश के जवानों पर हुए हमले के बाद सरकार को आतंकवाद को जड़ से मिटा देना चाहिए. इसके लिए जो भी जरूरी कदम हो उसे सरकार उठाए.

- जितेन्द्र प्रसाद

रोजगार के लिए जो भी वैकेंसी निकले वो एक दम फ्रेश हो. उसमें कोई भेद-भाव नहीं होना चाहिए. तभी अच्छे लोग सरकारी दफ्तरों में पहुंचेंगे और बेहतर काम होगा.

- शिव प्रताप सिंह

देश की सुरक्षा के मामलों में सभी पार्टियों को एकमत होना पड़ेगा तभी देश में अच्छा कानून बन पाएगा.

- अग्रसेन राजभर