क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: नेशनल हाईवे का सफर होगा सस्ता, जितनी दूरी बस उतने ही टोल की बातें अब बेईमानी लग रही है. इसका ताजा उदाहरण झारखंड का मांडर-कुड़ू मार्ग है. रांची से पलामू वाले मार्ग पर दो टोल प्लाजा बन रहे हैं. मानकों के मुताबिक टोल प्लाजा का निर्माण 60 किलोमीटर पर किया जाना चाहिए. लेकिन, इस मार्ग में टोल प्लाजा की दूरी टैक्स वसूलने के लिए घटा दी गई है. 50 किलोमीटर की दूरी पर दो टोल प्लाजा का निर्माण किया जा रहा है. इससे उस क्षेत्र के लोगों में रोष है.

बेईमानी हो रही है घोषणा

राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वालों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की घोषणा में अब बेईमानी झलकने लगी है. सरकार के मुताबिक, वह एक ऐसी नीति लाने जा रही है जिसमें यात्रियों को सिर्फ उतना टोल ही देना होगा, जितने राजमार्ग का उन्होंने इस्तेमाल किया. नेशनल हाईवे पर सफर होगा सस्ता, जितनी दूरी बस उतना ही टोल. अभी तक सभी को एक समान दर से टोल देना होता है.

4-5 किमी पर देने होंगे 90 रुपए फोरलेन पर चार-पांच किलोमीटर चलने पर भी चारपहिया वाहनों को 90 रुपए टोल टैक्स भरना पड़ेगा. हालांकि अभी रेट तय नहीं है, लेकिन कम से कम 90 रुपए तय होने की संभावना है. मांडर-मुड़मा के इन क्षेत्रों में आने जाने वाले सवारी वाहनों की संख्या सैकड़ों में है. इन्हें टोल प्लाजा में टैक्स चुकाना ही होगा. लातेहार, पलामू से उद्यमी और व्यवसायियों की संख्या भी काफी है, जो चारपाहिया वाहनों से रांची आना-जाना करते हैं.

टोल बनाने का मुड़मा में हो चुका है विरोध

पूर्व में टोल प्लाजा बनाने का काम मांडर मुड़मा में हो रहा था. लेकिन वहां के लोगों ने जमीन की कीमत कम देने के बाबत बवाल मचा दिया था. अब यह टोल प्लाजा चान्हों के आसपास बनेगा. जबकि दूसरा टोल प्लाजा कुडू में बन रहा है. कुडू और चान्हों की दूरी मात्र 42 किलोमीटर है. ऐसे में लोगों का कहना है कि आखिर जब 60 किलोमीटर या 80 किलोमीटर पर टोल प्लाजा का प्रावधान है तो ऐसे में यहां की जनता के साथ छल क्यों किया जा रहा है.

अभी ये हैं नियम

पूरे देश में नेशनल हाइवे पर करीब 60 किलोमीटर पर टोल प्लाजा बनाया जाता है. इसमें हर साल टोल कंपनियों की मांग पर टैक्स बढ़ाया जाता है. यहां से गुजरने वाली सभी गाडि़यों को एक निर्धारित राशि टैक्स के रूप में देने पड़ती है, चाहे वो गाड़ी कितनी भी ज्यादा या कम दूरी से क्यों न आई हो. इसी को लेकर अक्सर टोल प्लाजा पर विवाद होता रहता है.

इनको मिलेगा ज्यादा फायदा

केंद्र सरकार टोल टैक्स पर किलोमीटर के हिसाब से टोल वसूले जाने की व्यवस्था अगर शुरू होती है तो इससे सबसे ज्यादा फायदा आसपास के नागरिकों को मिलेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इस नियम के लागू होने के बाद उनको काफी कम टैक्स देना पड़ेगा. उनका विरोध भी खत्म हो सकता है.