-तीमारदारों को रुकने के लिए बनाया गया शेल्टर होम बना शराबियों और फड़ ठेलों वालों का अड्डा

-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में एडमिट मरीजों को ठंड में मिलता है सिर्फ एक कंबल

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BAREILLY : डिस्ट्रिक्ट के संयुक्त चिकित्सालय (पुरुष, महिला और हड्डी वार्ड) के पास मरीजों के तीमारदारों के लिए बनाए गए तीन शेल्टर होम में अराजकता अपने चरम पर है. हड्डी वार्ड वाले शेल्टर होम पर फड़-ठेले वालों को कब्जा है. पुरुष वार्ड के पास बने शेल्टर होम में ताला लटका रहता है जबकि महिला हॉस्पिटल के ओल्ड मेटरनिटी वार्ड के पास बने शेल्टर होम में पुरुष लेट जाते हैं. यहां रोज इनकी अड्डेबाजी होती है. यहां के लॉकरों में भी इन्होंने ताले डाल दिए हैं. इस वजह से तीमारदार कड़ाके की ठंड में बाहर खुले में दिन और रात गुजारने को मजबूर हैं.

तीमारदारों काे धमकाते हैं कब्जेदार

हड्डी वार्ड के पास दो मंजिल शेल्टर होम बना हुआ है. इस शेल्टर होम में हॉस्पिटल के गेट पर फड़ और ठेला लगाने वालों ने ही कब्जा कर रखा है. तीमारदारों के लिए बने लॉकरों में अपना सामान रख उसमें लॉक भी लगा दी है. चाय की केतली, भगौना, अंडा की क्रेड और कप आदि भी इस शेल्टर होम में रख दिया है. ऐसे में मरीजों के तीमारदार शेल्टर होम में रुकने भी जाते हैं तो उन्हें अवैध कब्जेदार हिदायत देते हैं कि कोई सामान इधर-उधर किया तो कीमत चुकानी पड़ेगी. कुछ तीमारदार तो इसी डर से शेल्टर होम के रूम में लेटने के लिए नहीं जाते हैं. वह बरामदे में ही लेट कर रात गुजार लेते हैं, जबकि कुछ जाते भी हैं तो शेल्टर होम में रुकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है.

शेल्टर होम बना शराबियों का अड्डा

शेल्टर होम में अवैध कब्जेदारों के अलावा शराबियों ने भी अपना अड्डा बना लिया है. शराबी शेल्टर होम के रूम में ही बैठकर दारू पार्टी करते हैँ और बोतलों को वहीं पर रखकर चले जाते हैं. जबकि शेल्टर होम के फ‌र्स्ट फ्लोर पर ताला पड़ा रहता है. जबकि पुरुष हॉस्पिटल में ओपीडी के पीछे बने शेल्टर होम में भी ताला लटका रहता है. वहीं महिला हॉस्पिटल के शेल्टर होम में भी महिलाओं को रुकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है.

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हॉस्पिटल में मरीजों की देखरेख करने वाला कोई ठीक से नहीं है. तो तीमारदारों को कौन देखेगा. रात को मरीज के साथ में कोई होता है तो उसके लिए शेल्टर होम में कोई इंतजाम नहीं है.

नरेश

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हॉस्पिटल में शेल्टर होम तो बना है, लेकिन वहां ताला लगा हुआ है. अब ऐसे में इसको बनाने का मतलब क्या हुआ जब कोई तीमारदार उसमें नहीं रुक सकता है.

मोती

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रात को एक तीमारदार तो तो मरीज के पास रुक जाता है, दूसरा कोई साथी होता है तो उसे बरामदे में रात काटनी पड़ती है. रात को कई लोग बरामदे में ही लेटते हैं.

मनोज

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शेल्टर होम में शाम को आया तो एक व्यक्ति कुछ सामान रख रहा था. बोला कि इस सामान को छुआ तो रुपए देने पड़ेंगे. जबकि वह खुद शेल्टर होम में अपना बिजनेस का सामान रख रहा था.

सूरज