क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: झारखंड की राजधानी रांची अभी कचरे के ढेर पर है. जहां देखो वहीं कचरे का अंबार लगा है. डस्टबिन भी शहर में स्वच्छता को मुंह चिढ़ा रहे हैं. स्थिति यह हो गई है कि चार दिनों से शहर में 1200 मीट्रिक टन कचरे का उठाव नहीं हुआ है. वहीं एजेंसी ने भी पैसे नहीं होने की बात कहते हुए काम पूरी तरह से ठप करा दिया है. वहीं सफाई नहीं होने से पब्लिक के साथ ही पार्षदों में भी गुस्सा है. अगर जल्द ही सफाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं की जाती है तो शहर में महामारी जैसे हालात हो जाएंगे.

डेली 500 मीट्रिक टन कचरा

रांची के दो लाख से अधिक घरों से हर दिन 500 मीट्रिक टन कचरा निकलता है. इसमें से 300 मीट्रिक टन कचरे का उठाव शहर के 33 वाडरें में सफाई करने वाली कंपनी आरएमएसडब्ल्यू कर रही थी. वहीं 20 वाडरें में सफाई नगर निगम खुद कराता है. लेकिन एजेंसी के काम ठप कर दिए जाने के कारण चार दिनों में 1200 मीट्रिक टन कचरे का उठाव नहीं हो पाया है.

एजेंसी पर मेहरबानी क्यों

शहर की स्थिति को देखते हुए नगर विकास विभाग ने एजेंसी को तत्काल हटाने का आदेश दिया था. इसके बावजूद आजतक नगर निगम ने एजेंसी को हटाने को लेकर कोई पहल नहीं की है. इस वजह से पार्षद भी नाराज हैं. इनका कहना है कि जब एजेंसी को हटाने का आदेश दिया जा चुका है तो नगर निगम के अधिकारी चुप क्यों है. आखिर क्या मजबूरी है जो आरएमएसडब्ल्यू एजेंसी को लेकर अधिकारी कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं. इस चक्कर में उन्हें पब्लिक से गालियां सुननी पड़ रही हैं.

एमटीएस में गाडि़यों से बदबू ने परेशानी बढ़ाई

सिटी में वेस्ट कलेक्शन के लिए मिनी ट्रांसफर स्टेशन (एमटीएस) में पिछले 4 दिनों से कूड़े से भरी गाडि़यां खड़ी हैं, जिसे डीजल नहीं मिलने के कारण डंपिंग यार्ड भी नहीं भेजा गया है. अब इस कचरे से निकलने वाली दुर्गध से लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है. वहीं आसपास के लोगों ने अपने घरों की खिड़कियां और दरवाजे भी बंद कर रखे हैं.

यूजर चार्ज देने के बाद भी सुविधा नहीं

डोर टू डोर कचरा उठाव करने के बदले लोगों से वेस्ट यूजर चार्ज भी वसूला जाता है. इसमें 50 रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक तय है. इसके बावजूद लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों से कचरे का उठाव नहीं होने से लोग परेशान हैं. अब लोग भी सवाल कर रहे हैं कि जब कचरा ही नहीं उठाया जाता तो फिर चार्ज किस काम का लिया जाता है.