आयुष्मान के तहत इलाज कर रहे अस्पतालों का लाखों रूपया अटका

एक दर्जन अस्पतालों में नहीं मिला मरीजों को लाभ

Meerut. गरीब मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए शुरू हुई केंद्र सरकार की बहुउद्देशीय आयुष्मान योजना शुरुआत में ही दम तोड़ती नजर आ रही है. योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले प्राइवेट अस्पतालों के लाखों रूपये इंतजार के आश्वासन पर अटके हुए हैं. वहीं स्थिति को देखते हुए करीब एक दर्जन अस्पताल मरीजों को लाभ देने से कतराने लगे हैं. यही वजह हैं कि इन अस्पतालों में अभी तक एक भी लाभार्थी को योजना का लाभ नहीं दिया गया है. जबकि इस योजना के लिए 5392 गोल्डन कार्ड बनाएं जा चुके हैं.

ये है मामला

23 सितंबर 2018 को देशभर में एक साथ आयुष्मान योजना को लागू किया गया था.

शुरू में प्राइवेट अस्पताल इस योजना में शामिल होने के लिए तैयार ही नहीं थे.

स्वास्थ्य विभाग ने 6 सरकारी और 31 प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर कुल 37 अस्पतालों को योजना के तहत इमपैनल्ड किया था.

इनमें से सिर्फ 4 सरकारी और करीब 19 प्राइवेट अस्पतालों ने ही अपने यहां योजना को लागू किया. ़

इन अस्पतालों में अब तक 593 मरीजों का इलाज किया गया है.

जिसमें मात्र 57 मरीजों के इलाज का पैसा ही अस्पतालों को दिया जा सका है.

536 मरीजों का पैसा अभी अस्पतालों को मिलना बाकी है.

514 मरीज इलाज पाकर डिस्चार्ज भी हो चुके हैं.

सबसे ज्यादा 125 मरीज अपस नोवा हॉस्पिटल में रजिस्टर्ड हुए.

दूसरे नंबर पर जिला अस्पताल रहा. यहां 97 मरीज रजिस्टर्ड हुए और 87 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया. -मेडिकल कॉलेज में 29 और सीएचसी सरधना में 2 मरीज रजिस्टर्ड हुए.

महिला चिकित्सालय में मात्र एक ही मरीज ने लाभ लिया है. अन्य मरीज प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुए हैं.

ये है योजना

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत बीपीएल कार्ड धारकों को 5 लाख रूपये की चिकित्सा सुविधा फ्री दी जा रही है. योजना के तहत 1352 तरह के टेस्ट और सर्जरी इसमें कवर की गई हैं. मरीजों का लाभ केवल उन्हीं अस्पतालों में मिलेगा, जो इसमें शामिल हुए हैं. 2011 में हुई आर्थिक गणना के आधार पर शासन ने लाभार्थियों की सूची तैयार की है. जिसमें जिले से 2 लाख 5 हजार 70 परिवार शामिल हुए हैं. साथ ही इसमें देहात के 83 हजार 70 परिवार शामिल हैं, जबकि शहरी परिवारों की संख्या 1.22 लाख है.

इनका है कहना

आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बिलिंग प्रोसेस शुरू होता है. बिलिंग पूरी होने में करीब तीन महीने का समय लग जाता हैं. सभी अस्पतालों का भुगतान समय से होगा.

डॉ. पूजा शर्मा, जिला नोडल इंचार्ज, आयुष्मान योजना

आयुष्मान के तहत 35 लाख से अधिक का भुगतान पेंडिंग हैं. बिल विभाग को समय से दिए जा रहे हैं. हालांकि अभी हम योजना के तहत मरीजों को इलाज दे रहे हैं.

डॉ. सुनील गुप्ता, चेयरमैन, केएमसी अस्पताल