- जेलों में बंद बदमाश मैनेज कर रहे हैं पूरा निकाय चुनाव

- हाल ही में जिला जेल से एक व्यापारी को चुनावी खर्च के लिए एक लाख चंदा देने के लिए आयी थी कॉल

निकाय चुनाव में जीत पक्की करने को कैंडीडेट्स से लेकर उनके समर्थक दिन रात एक किये हुए हैं. कोई डोर टू डोर तो कोई छोटी सभाएं कर माहौल बना रहा है. कोई घर के कमरे से चुनावी रणनीति बना रहा है तो कोई किराये पर लिए कार्यालय से विपक्ष को हराने की प्लानिंग कर रहा है. लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिनका चुनावी समीकरण सलाखों के पीछे से सेट हो रहा है. सुनकर चौंक गये ना लेकिन ये सच है. कई ऐसे उम्मीदवार हैं जो या तो जेल में बंद अपराधी के रिश्तेदार हैं या फिर उनके खास. जबकि कुछ के ऊपर उनके आकाओं का हाथ है. अपनों को जिताने के लिए जेल से ही शातिर गोटी फिट कर रहे हैं. हाल ही में चुनावी चंदा देने के लिए एक व्यापारी को जिला जेल से कॉल भी आ चुकी है.

मां तो कोई लड़ा रहा पत्‍‌नी को

जेल के अंदर से चुनावी गणित साधने का खेल कई कुख्यात कर रहे हैं. पार्षद बनने का सपना संजोये बैठे इन्होंने चुनाव से पहले शहर में अपना आतंक फैलाया था. जिसके कारण इनको जेल की काल कोठरी में जाना पड़ा. इस वजह से इनका सफेदपोश बनने का सपना टूट गया. खुद न सही तो इन्होंने अपनी मां-पत्‍‌नी या किसी रिश्तेदार को चुनावी मैदान में उतार दिया. अब हाल ये है कि जेल के अंदर होने के बाद भी अपने सगे के लिए पोस्टर बैनर पर अपनी फोटो लगवाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं.

मोबाइल और सिम हो चुका है बरामद

चुनाव लड़ने के लिए फंड की व्यवस्था भी शातिर अपराधी जेल के अंदर से ही करने में जुटे हैं. इसका खुलासा तब हुआ था जब हाल ही में चौक क्षेत्र के एक व्यापारी को चुनावी खर्च के नाम पर एक लाख का चंदा देने के लिए जेल से कॉल आयी थी. जिसके बाद चार नवंबर को जेल के एक बैरक से टब के नीचे छिपाकर रखा मोबाइल और सिम कार्ड बरामद हुए थे.

जिला या सेंट्रल जेल से मोबाइल का यूज न हो इसलिए यहां डेली रैंडम चेकिंग की जा रही है. हाल ही में जिला जेल से मोबाइल और सिम मिले भी हैं. इसपर रोक लगाने के लिए कर्मचारियों की भी निगरानी बढ़ा दी गई है.

अंबरीश गौड़, वरिष्ठ जेल अधीक्षक सेंट्रल व जिला जेल