- एसआरएम यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग गेटवेज में एक्सप‌र्ट्स ने दिए टिप्स

- स्टूडेंट्स को बताए कामयाबी के नुस्खे

GORAKHPUR: एग्जाम हॉल में पहुंचे, पेपर देखा और जो याद था, सब कुछ दिमाग से छूमंतर. पेपर देकर बाहर निकले, तो सभी कुछ वापस याद गया. क्या सारा याद किया कोर्स गेट के बाहर ही छूट गया था? नहीं, अक्सर एग्जाम के दौरान हमें इस तरह की प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है. सबकुछ याद किया ऐन वक्त पर भूल जाता है. यह कुछ और नहीं बल्कि कॉन्संट्रेशन की कमी है, जो एग्जाम फियर की वजह से बढ़ जाती है और याद किया सबकुछ भूल जाता है. इससे निपटने का तरीका है एआईआर, जिससे लोगों को कामयाबी का आधार मिलेगा और उनकी सभी प्रॉब्लम सॉर्ट आउट हो जाएगी. यह बातें सामने एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलाजी प्रेजेंट आई दैनिक जागरण आई नेक्स्ट कॅरियर पाथ वे में. जहां मॉडरेटर डॉ. तुषार चेतवानी ने स्टूडेंट्स को कामयाबी के नुस्खे बताए और एग्जाम फियर को कम करने के लिए जरूरी टिप्स दिए.

'राइट ब्रेन' का करें राइट यूज

दो और दो चार होता है. ई-एमसी स्क्वॉयर के बराबर होता है. इस तरह की लॉजिकल थिंकिंग लोगों के लेफ्ट ब्रेन से होती है. जबकि इमैजिनेशन, आइडिया, डिस्कवरी और थॉट यह सब हमारा राइट ब्रेन करता है. इसका जितना इस्तेमाल होगा, उतना ही बेहतर रिजल्ट होगा. ह्यूमन बींग दोनों ब्रेन का इस्तेमाल करता है, इसलिए वह सबसे अलग है. डॉ. चेतवानी की मानें तो अगर हम एआईआर यानि एसोसिएशन, इमेजिनेशन और रेडिकुलस थिंकिंग का इस्तेमाल करें, तो कामयाबी की राह पर होंगे और सभी मुश्किलों का हल चुटकियों में मिल जाएगा.

फोटोग्राफिक मेमोरी का करें इस्तेमाल

डॉ. तुषार ने स्टूडेंट्स को पढ़ने के टिप्स देते हुए बताया कि अगर किसी चीज को याद करना है तो इसके लिए उन्हें बजाए सुनने के पढ़ने में ध्यान लगाना चाहिए. अगर वह अपनी पढ़ाई को विजुअलाइज कर मेमोराइज करेंगे, तो रिजल्ट काफी बेहतर हो सकते हैं. वजह बताते हुए डॉ. तुषार ने कहा कि जो हम देखते हैं और जो सुनते हैं. इसमें 20 गुना फर्क होता है. आई से ब्रेन में जाने वाली नर्व, इयर से ब्रेन में जाने वाली नर्व से 20 गुना पॉवरफुल होती है. जिससे हम कुछ भी याद करते हैं, तो विजुअल स्टोरी हमें जल्दी याद होती है, जबकि सुनने वाली स्टोरी को याद करने में वक्त लगता है. उन्होंने कहा कि सभी फोटोग्राफिक मेमोरी के साथ पैदा हुए हैं, इसलिए सभी को इसका भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने प्रैक्टिकल एक्सरसाइज कराकर अपनी इस बात को प्रूव भी किया.

'फॉर्गेटिंग साइकिल' का करें इलाज

डॉ. तुषार ने बताया कि जिस तरह लाइफ साइकिल, फूड साइकिल होती है, उसी तरह दिमाग की एक फॉर्गेटिंग साइकिल होती है. एक समय बाद याद की गई बातें दिमाग से निकल जाती हैं. साइंस कहता है कि 24 घंट के बाद यह साइकिल स्टार्ट हो जाती है और 7-8 दिन बाद दिमाग में जो कंटेंट रहता है, वह चला जाता है. अगर न्यूमेरिकल या कोई फॉर्मूला हो, तो यह 2-3 दिनों तक ही दिमाग में रहता है. याद किया गया मेमोरी में रहे, इसके लिए जरूरी है स्ट्रैटजी. जो पढ़ा है, उसे 24 घंटे बाद रिवाइज कर लिया जाए. इसके बाद सात दिन बाद इसे फिर दोहरा लें, तो जो कुछ याद किया गया है, वह परमनेंट मेमोरी में चला जाएगा और यह एक माह तक दिमाग में रहेगा. इसी तरह एक माह का पीरियड आते ही, इसे फिर रिवाइज किया जाए, तो अगले तीन महीने तक इसे याद करने की जरूरत नहीं होगी. उन्होंने बताया कि इसके लिए ओवर लर्निग प्रॉसेस भी काफी मददगार है. अगर कोई चीज एक घंटा पढ़ी गई हो, तो एक ब्रेक लेने के बाद इसे टोटल टाइम का वन थर्ड यानि एक घंटा पढ़ा है, तो 20 मिनट रिवाइज कर लिया जाएग, तो इससे स्टूडेंट्स को कोई भी चीज याद रखने में काफी आसानी होगी.

दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के एडिटोरियल इंचार्ज संजय कुमार, मार्केटिंग हेड विनोद चौधरी, ब्रांड हेड प्रदीप कुमार के साथ मॉडरेटर डॉ. तुषार चेतवानी और एसआरएम यूनिवर्सिटी के गाजियाबाद कैंपस से आए चिरंजीत दत्ता ने दीप प्रज्ज्वलित किया. इसके बाद सरस्वती वंदना हुई, जिसके बाद कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई. शुरुआत में मॉडरेटर ने स्टूडेंट्स को एग्जाम से जुड़े अहम टिप्स देकर की. इसके बाद एसआरएम यूनिवर्सिटी से आए डॉ. चिरंजीत ने एसआरएम से जुड़ी अहम इंफॉर्मेशन दीं और यूनिवर्सिटी का वीडियो दिखाया गया. आखिरी में मॉडरेटर ने एग्जाम के दौरान किसी सब्जेक्ट को मेमोराइज करने के टिप्स दिए. आखिर में लकी ड्रॉ निकाला गया, जिसमें पांच स्टूडेंट्स को सम्मानित किया गया.

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वीडियो से दिखाई एसआरएम की खूबियां

इवेंट के दौरान स्टूडेंट्स को एसआरएम यूनिवर्सिटी का एक वीडियो दिखाया गया, जिसमें वहां के बारे में जानकारी दी गई. वीडियो के बाद एसआरएम यूनिवर्सिटी से आए डॉ. चिरंजीत दत्ता ने एसआरएम से जुड़ी खास बातें शेयर की. उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी के पांच कैंपस हैं, जिसमें तीन चेन्नई और एक गाजियाबाद में स्थित है. 1996 में एसआरएम को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाया गया. यहां मल्टीस्ट्रीम की पढ़ाई होती है. 540 कंपनी रिक्रूटमेंट करने के लिए पहुंच रही हैं. उन्होंने बताया कि हायस्ट पैकेज 39.5 लाख पर एनम और मिनिमम पैकेज 3.15 लाख रुपए है. उन्होंने बताया कि यहां सीबीसीएस की व्यवस्था है और स्टूडेंट्स को 160 क्रेडिट पूरे करने होते हैं. उन्हें सब्जेक्ट और स्ट्रीम भी चूज करने की आजादी है. कैंपस में स्टूडेंट्स के लिए कल्चरल, टेक्निकल और स्पो‌र्ट्स इवेंट ऑर्गनाइज किए जाते हैं, जिसमें उनकी बढ़-चढ़कर भागीदारी रहती है. ऑनलाइन फॉर्म भरने शुरू हो चुके हैं और इसकी लास्ट डेट 31 मार्च है. 15 से 25 अप्रैल के बीच ऑनलाइन एंट्रेंस होगा.

इनका निकला लकी ड्रॉ -

किरन निषाद

राजेश कुमार यादव

हर्षित शुक्ला

विपिन चौरसिया

सायबा खान

सवाल - जवाब

सवाल - सर, एसआरएम के फॉर्म कहा से मिलेंगे?

जवाब - एसआरएम के फॉर्म सिर्फ ऑनलाइन ही भरे जा सकते हैं. वेबसाइट ड्डश्चश्चद्यद्बष्ड्डह्लद्बश्रठ्ठह्य.ह्यह्मद्वह्वठ्ठद्ब1.ड्डष्.द्बठ्ठ पर जाकार फॉर्म भरे जा सकते हैं.

सवाल - वहां पर क्या खास है?

जवाब - एसआरएम यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के लिए सब्जेक्ट चुनने की व्यवस्था है. सीबीसीएस होने की वजह से वह किसी भी सब्जेक्ट में अपना निर्धारित क्रेडिट कंप्लीट कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें 9 सब्जेक्ट का ऑप्शन मिलता है.

सवाल - एसआरएम यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए एग्जाम कैसे और कब होंगे?

जवाब - यूनिवर्सिटी में एंट्रेंस एग्जाम ऑनलाइन होंगे. इसमें भी कैंडिडेट्स को अपना दिन और समय चुनने की छूट है कि वह कब एंट्रेंस देना चाहते हैं. 15 से 25 अप्रैल के बीच ऑनलाइन एंट्रेंस कंडक्ट कराया जाएगा.

सवाल - एसआरएम यूनिवर्सिटी कहां है?

जवाब - एसआरएम यूनिवर्सिटी के पांच कैंपस है, इसमें तीन चेन्नई में स्थित है, जबकि एक कैंपस यूपी के गाजियाबाद और एक दिल्ली एनसीआर में भी मौजूद है.

सवाल - वहां पर मेस की क्या व्यवस्था है? यहां से जाने वाले वहां एडजस्ट कर सकेंगे?

जवाब - मेस में नार्थ इंडियन, साउथ इंडियन सभी तरह के खाने अवेलबल हैं. स्टूडेंट्स अपनी पंसद के ऑप्शन चुन सकते हैं.

सवाल - यूनिवर्सिटी में कितने तरह के ग्रेजुएट कोर्स कंडक्ट होते हैं?

जवाब - यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, साइंस, लॉ सभी तरह के कोर्स मिलाकर 24 ग्रेजुएट कोर्स कराए जा रहे हैं. मेडिकल साइंस और एग्रीकल्चर से जुड़े कोर्स भी यूनिवर्सिटी ऑफर करती है.