स्टॉकहोम (एएफपी)यह पुरस्कार दुनिया के तीन शोधकर्ताओं को संयुक्त रूप से दिया जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार लिथियम आयन बैटरी के विकास में अपने योगदान के लिए दिया जा रहा है। इनमें से एक रिसर्चर नोबेल प्राइज पाने वाले सबसे अधिक उम्र के शख्स बन गए हैं।

किसे मिलेगा केमेस्ट्री में नोबेल पुरस्कार
तीन शोधकर्ताओं ने बुधवार को लिथियम आयन बैटरी के विकास के लिए केमेस्ट्री में नोबेल पुरस्कार जीता, जिससे स्मार्टफोन और जीवाश्म ईंधन मुक्त समाज का रास्ता खुल सका। रॉयल स्वीडिश साइंस अकादमी की ओर से कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के 97 वर्षीय जॉन गुडएनफ, ब्रिटेन के स्टेनली व्हिटिंघम और जापान के अकीरा योशिनो को नौ मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 914,000 डॉलर या 833,000 यूरो) का यह पुरस्कार मिलेगा। जूरी ने कहा कि 'इस हल्की, रिचार्जेबल और शक्तिशाली बैटरी का उपयोग अब मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों तक हर चीज में किया जाता है ... (और) सौर और पवन ऊर्जा का भंडारण करने में भी सहायक है, जिससे कि एक जीवाश्म ईंधन मुक्त समाज संभव है।' जूरी ने आगे कहा कि 'साल 1991 में बाजार में उतारे जाने के बाद से लिथियम बैटरी ने हमारे जीवन में क्रांति ला दी है। वे मानव जाति के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई हैं।

साल 2019 में केमेस्ट्री का नोबल प्राइज जीतने वाले ब्रिटेन के स्टेनली व्हिटिंघम। फोटो: एएफपी

किसलिए मिला यह पुरस्कार
1970 के दशक के तेल संकट के दौरान ऊर्जा के एक वैकल्पिक स्रोत की तलाश करते हुए, व्हिटिंघम ने लिथियम में संभावित ऊर्जा का दोहन करने का एक तरीका खोजा, यह धातु इतनी हल्की है कि वह पानी पर तैरती है। उन्होंने लिथियम से बनी एक बैटरी का निर्माण किया, जिसमें उसके तय स्वभाव इलेक्ट्रान छोड़ने का उपयोग हुआ, जिससे कि एनर्जी ट्रांसफर संभव हो सका। हालांकि, बैटरी उपयोग किए जाने के लिहाज से बेहद अस्थिर थी। गुडएनफ ने व्हिटिंगघम के प्रोटोटाइप पर काम किया, एक अलग धातु के यौगिक को प्रतिस्थापित करने और बैटरी की संभावित ऊर्जा को चार वोल्ट तक दोगुना करने के लिए। इसने भविष्य में कहीं अधिक शक्तिशाली और टिकाऊ बैटरियों के निर्माण का रास्ता खोल दिया। 1985 में, योशिनो ने इसके बजाय कार्बन-आधारित सामग्री का इस्तेमाल किया, जो लिथियम आयनों को संग्रहीत करता है, अंत में बैटरी को व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक बना दिया। इन तीनों के शोध की परिणिति सबसे शक्तिशाली, हल्की और रिचार्जेबल बैटरी के रूप में हुई।'

साल 2019 में केमेस्ट्री का नोबल प्राइज जीतने वाले अमेरिका के 97 वर्षीय जॉन गुडएनफ। फोटो: रॉयटर्स

कौन हैं यह तीनों पुरस्कार विजेता
यह पूछे जाने पर कि किस प्रकार के शोधकर्ता हैं, योशिनो ने टोक्यो में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एक अच्छे वैज्ञानिक को दो गुणों की आवश्यकता होती है।'एक बात यह है कि आपके पास एक लचीला मस्तिष्क होना चाहिए। लचीलापन। दूसरा दृढ़ता है। आप लगातार प्रयास करते रहते हैं और कभी हार नहीं मानते। 'योशिनो, 71, टोक्यो में असाही कासेई कॉरपोरेशन में काम करते हैं और जापान के नागोया स्थित मीजो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है, जबकि गुडएनफ ऑस्टिन में टेक्सास यूनिवर्सिटी में कॉकरेल चेयर इन इंजीनियरिंग संभालते हैं। 77 साल के व्हिटिंघम, न्यूयॉर्क के स्टेट यूनिवर्सिटी के बिंगहटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। तीनों को 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में एक औपचारिक समारोह में किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ से पुरस्कार मिलेगा, वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की 1896 में हुई मृत्यु की सालगिरह पर।

बीते वर्ष किसे व क्यों मिला केमेस्ट्री का नोबेल प्राइज
पिछले साल, यह सम्मान अमेरिकी वैज्ञानिकों फ्रांसिस अर्नोल्ड और जॉर्ज स्मिथ और ब्रिटिश शोधकर्ता ग्रेगरी विंटर को मिला था, जो कम दुष्प्रभावों वाले सुरक्षित रसायन और एंटीबॉडी दवाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले एंजाइमों को विकसित करने के लिए था। 1911 में मैरी क्यूरी को सम्मानित किए जाने के बाद से अर्नोल्ड रसायन विज्ञान का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाली पांचवीं महिला थीं।

Posted By: Chandramohan Mishra

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