कोलंबो (एएफपी)। श्रीलंका में पिछले महीने आतंकी हमले के बाद सरकार ने सोशल मीडिया को बैन कर दिया गया था लेकिन इसके बावजूद वहां की सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों में वृद्धि देखी गई है। फेसबुक, ट्विटर, यूट्यब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया नेटवर्क को नौ दिनों के लिए ब्लॉक किया गया था। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सरकार के आदेश से बचने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) या टीओआर नेटवर्क का इस्तेमाल किया और दंगों के दौरान भी अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ बातचीत जारी रखी। कोलंबो में सेंटर फॉर पॉलिसी अल्टरनेटिव्स में फर्जी खबरों के लिए सोशल मीडिया पर नजर रखने वाली संजना हट्टुवा ने कहा कि सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध फेसबुक कंटेंट की इंगेजमेंट, प्रोडक्शन, शेयरिंग और डिस्कशन को रोकने में विफल रहा और हमने प्रतिबंध के बावजूद सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों में वृद्धि देखी है।

वीडियो पोस्ट करके किया गया झूठा दावा
बता दें कि फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में पुलिस को बुर्का पहने एक व्यक्ति को गिरफ्तार करते हुए दिखाया गया और दावा किया कि वह बम विस्फोट में शामिल था। दरअसल, वह वीडियो वास्तव में 2018 का था और जिस व्यक्ति को गिरफ्तार करते हुए दिखाया गया, वह अपनी पहचान छिपाने के लिए बुर्का का इस्तेमाल किया था और उसे एक व्यक्ति पर हमला करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक यूजर ने पांच साल पुरानी तस्वीर को पोस्ट किया, जिसमें 'आईएसआईएस' की टी-शर्ट पहने कुछ पुरुषों के एक समूह को दिखाया गया था, यूजर का दावा था कि पूर्वी श्रीलंका में ये आईएस सेल अभी भी एक्टिव हैं। आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर इस तरह के तमाम फर्जी वीडियो और फोटो वीपीएन के जरिये पोस्ट किये गए।

आतंकी हमले में हुई कई लोगों की मौत
उल्लेखनीय है कि ईस्टर के दिन चर्च और होटलों में हुए आत्मघाती धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसी के बाद वहां मुस्लिमों को निशाना बनाया गया। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। लेकिन श्रीलंका सरकार का कहना है कि इन धमाकों को स्थानीय आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात ने अंजाम दिया था। इन धमाकों के बाद हुई तलाशी में मस्जिदों से भारी मात्रा में तलवार और अन्य हथियार बरामद किए गए थे।

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