आगरा. साइबर शातिरों ने मेयर नवीन जैन की कंपनी पीएनसी को निशाना बना लिया. शातिरों ने क्लोन चेक लगाकर कंपनी के ओवरड्राफ्ट खाते से 7.69 लाख रुपये पार कर लिए. इसके बाद खाते में दो और क्लोन चेक लगाए थे, लेकिन क्लीयरेंस से पहले ही मामला पकड़ में आ गया. खुलासा होने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा सहायक महाप्रबंधक रमन कुमार ने थाना हरीपर्वत पर तहरीर दी है. पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया है.

संजय प्लेस स्थिति बैंक में है ओडी खाता

सहायक प्रबंधक रमन कुमार ने शिकायत में लिखा है कि पीएनसी इंफ्राटेक का बैंक ऑफ बड़ौदा की संजय प्लेस ब्रांच में ओडी अकाउंट है. खाते को शिव कुमार अग्रवाल और पंकज अग्रवाल संयुक्त रूप से ऑपरेट करते हैं. ओडी खाते का एक चेक नवंबर माह में उनकी शाखा में सीटीएस क्लीयरिंग के लिए आया था. जिसके 7,69,550 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए. रुपया संदीप पटेल पुत्र लालब्रत पटेल (चंदितारा, चंदौली) के अकाउंट में ट्रांसफर हुआ. संदीप का वर्तमान पता नव ज्योति महिला सोसाइटी, बारामती पुणे, महाराष्ट्र है. उसका खाता बारामती स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में है.

दो क्लोन चेक और लगाए थे

इस क्लोन चेक के अलावा संदीप पटेल ने दो अन्य क्लोन चेक खाते में लगाए थे, जो 9.91 लाख तथा 6.12 लाख रुपये के थे. ये चेक छह दिसंबर और 11 दिसंबर को खाते में लगाए गए थे. बैंक ने इस बार कंपनी से संपर्क किया तो पता चला कि पीएनसी इंफ्राटेक ने कोई भी चेक संदीप पटेल को जारी नहीं किया. जिस नंबर का चेक खाते में जमा किया गया था उसका मूल चेक कंपनी के पास मौजूद है. मूल चेक बैंक द्वारा कंपनी से ले लिए गए हैं. जो बैंक के पास सुरक्षित हैं. सहायक महाप्रबंधक ने तहरीर में लिखा है कि क्लोन चेक के द्वारा कंपनी के ओडी खाते से रकम निकाली गई थी. इस संबंध में मुकदमा लिखकर कानूनी कार्रवाई की जाए. हरीपर्वत इंस्पेक्टर महेश गौतम ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा लिखा जा रहा है. छानबीन बैंक से ही शुरू होगी.

पहले भी हुई है चेक क्लोनिंग

चेक क्लोनिंग के मामले पहले भी प्रकाश में आए हैं. पिछले माह नबंवर में न्यू आगरा थाने में चेक क्लोनिंग का मुकदमा दर्ज हुआ था. कमला नगर निवासी महिला के अकाउंट से 16.60 लाख रुपये निकले थे. ये रकम क्लोन चेक के जरिए निकाली गई थी. 29 दिसम्बर 2017 को एसई इंवेस्टमेंट के क्लोन चेक लगाए गए थे लेकिन मामला पकड़ में आ गया और कंपनी का 40 करोड़ रुपया निकलने से बच गया. रेंज साइबर टीम ने इस मामले में एक गैंग पकड़ा था जिसके पास से क्लोन चेक तैयार करने की मशीन भी बरामद की थी. गैंग के पास दो दर्जन से अधिक कारोबारियों के बैंक अकाउंट की डिटेल मिली थी.