ओपन मेरिट में कॉलेज स्तर से मेरिट बनने पर छात्रों की शिकायत

सीसीएसयू से संबंधित कॉलेजों में चल रहे है यूजी लेवल के एडमिशन

Meerut. सीसीएसयू से संबंधित कॉलेजों में यूजी लेवल पर ओपन मेरिट के आधार पर एडमिशन चल रहे है. इसके तहत कॉलेजों में बृहस्पतिवार को कुछ स्टूडेंट्स ने फर्जी एडमिशन का आरोप लगाते हुए यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार से शिकायत करने की बात कही. छात्रों का कहना है कि कॉलेजों में फर्जी तरीके से से प्रवेश किए जा रहे हैं,

बाहरी को सीटें बता रहे है फुल

स्टूडेंट्स का आरोप है कि कॉलेज बाहरी छात्रों को सीटें फुल बता रहे हैं. वहीं, बैक डोर से अपने लोगों के प्रवेश में प्राथमिकता दी जा रही है. इसके साथ- साथ अन्य बोर्ड की फर्जी मार्कशीट के माध्यम से भी एडमिशन कराए जा रहे हैं . छात्र अमित ने कहा कि ज्यादा नंबर होने के बाद भी एडमिशन नहीं मिल रहा है जबकि अन्य कम नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स को एडमिशन मिल रहा है. बता दें कि यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा दो मुख्य मेरिट जारी की गई थी, जिसके बाद भी कॉलेजों में सीटे नहीं भर पाई थी. इसकेबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉलेजों को अपने स्तर से सीटें भरने तथा ओपन मेरिट से छात्रों को वरीयता के अनुसार प्रवेश करने के लिए कहा था. जिसमें स्टूडेंट्स द्वारा जमा किए गए ऑफर लेटर के माध्यम से वरीयता के अनुसार मेरिट तैयार कर छात्रों के प्रवेश करने होते है. इससे पूर्व भी लास्ट ईयर जब परीक्षा फार्म भरने की बारी आई तो मेरठ कॉलेज में फर्जी प्रवेश की चर्चा रही थी. जिसमें की एलएलबी, बीकॉम, बीएससी आदि अन्य कोर्सो में फर्जी प्रवेश को कॉलेज प्रशासन की सक्रियता से पकड़ा गया था.

कुछ ग्रुप रहते है सक्रिय

यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से जब मनचाहे कॉलेजों में प्रवेश के लिए ब्लैक ऑफर लेटर का अवसर दिया जाता है, तभी कुछ ग्रुप सक्रिय होते है जो कि मनचाहे कॉलेजों में प्रवेश के नाम से छात्रों से पैसे लेते है. और उनका प्रवेश करा देते है. स्टूडेंट्स के जब कही प्रवेश नहीं होते तो वह भी अपना एक साल बचाने के लिए उनके चंगुल में आ जाते है. क्योंकि अगर इस वर्ष नाम नहीं आया तो आगे भी नहीं आएगा हर वर्ष चार प्रतिशत नंबर को मेरिट में काटा जाता है. इसी वजह से छात्र-छात्राएं फर्जी प्रवेश में फंस जाते है. बाद में परीक्षा फार्म भरते समय इस तरह से फर्जी प्रवेश पकड़े जाते हैं.

कुछ शिकायतें सुनने में आ रही है, लेकिन ओपन मेरिट में फर्जी का पता लगाना मुश्किल है, ये तो एग्जाम टाइम में जब फार्म आते है तब सामने आता है, इसकी जांच भी की जाती है और फिर संबंधित पर कार्रवाई भी होती है.

प्रो. वाई विमला, प्रोवीसी, सीसीएसयू