रांची: महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में एक बार फिर मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के घर बुधवार को महाराष्ट्र पुलिस व एटीएस की टीम ने छापेमारी की. इस दौरान टीम ने पूरे घर को खंगाला और यहां मिले दस्तावेजों की भी पड़ताल की. पुलिस सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र पुलिस को ऐसी सूचना मिली थी कि फादर स्टेन के आवास पर कई दिनों से संदिग्ध लोगों की बैठक चल रही है. जिसके बाद उसने यह कार्रवाई की. इस दौरान नामकुम पुलिस भी साथ रही.

पहले भी जब्त किये थे दस्तावेज

नामकुम बगइचा टोली स्थित आवास पर सुबह सात बजे ही धमकी महाराष्ट्र पुलिस व एटीएस की टीम ने फादर स्टेन के पूरे घर की तलाशी ली. एक वर्ष के भीतर महाराष्ट्र पुलिस ने यहां दूसरी बार छापा मारा है. बीते 28 अगस्त 2018 को भी फादर स्टेन के आवास पर छापेमारी की गई थी. उस दौरान लैपटॉप, पेन ड्राइव, सीडी, मोबाइल व कई दस्तावेज सहित अन्य सामान भी जब्त किए गए थे

फादर के भाषण से भड़की थी हिंसा

मामला पुणे के भीमा कोरेगांव में वर्ष 2018 में हिंसा की हुई घटना से जुड़ा है. पुणे के विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में यलगार परिषद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए एफआईआर दर्ज की गई थी. यह यलगार परिषद की मीटिंग 31 दिसंबर 2017 को आयोजित की गई थी. जिसके बाद पुणे में 1 जनवरी 2018 को कथित रूप से स्टेन स्वामी समेत अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए भाषण की वजह से अगले दिन बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी. भीमा नदी के किनारे स्थित स्मारक के पास दो गुटों में झड़प के बाद पत्थरबाजी व आगजनी की गई थी. पुलिस ने उग्र भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस और लाठी चार्ज का इस्तेमाल किया था.

घटना में एक व्यक्ति की हुई थी मौत

पुलिस की जांच में पता चला कि इस हिंसा में राहुल फतांगले नाम के व्यक्ति की मौत हुई थी. 80 गाडि़यों को नुकसान पहुंचा था. हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई थी. पूछताछ के लिए कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। इस हिंसा के बाद तीन जनवरी को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया था.

50 वर्षो से झारखंड में हैं फादर

फादर स्टेन स्वामी झारखंड में बीते 50 वर्षो से रहकर काम कर रहे हैं. पहले चाईबासा में रहकर आदिवासी संगठनों के लिए काम करते थे. 2004 में रांची आए और तब से नामकुम में रह रहे हैं. वे मूल रूप से केरल के निवासी हैं. वर्तमान में झारखंड के विभिन्न जिलों की जेल में बंद आदिवासी कैदियों के लिए काम कर रहे हैं. स्टेन के समर्थकों के मुताबिक स्टेन वैसे आदिवासियों के लिए काम कर रहे हैं जिन्हें नक्सली बताकर जेल में डाला गया है.