आई कंसर्न

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हेडिंग : डस्ट पार्टिकल और रुकी हवा ने बिगाड़ी शहर की फिजा

- लगातार बढ़ता स्मॉग बढ़ा रहा लखनवाइट्स की मुश्किल

- कंस्ट्रक्शन और जहरीला धुआं उगलते वाहन बढ़ा रहे पॉल्यूशन

<आई कंसर्न

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हेडिंग : डस्ट पार्टिकल और रुकी हवा ने बिगाड़ी शहर की फिजा

- लगातार बढ़ता स्मॉग बढ़ा रहा लखनवाइट्स की मुश्किल

- कंस्ट्रक्शन और जहरीला धुआं उगलते वाहन बढ़ा रहे पॉल्यूशन

lucknow@inext.co.in

LUCKNOW (22 Oct) :

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LUCKNOW (22 Oct) :

मौसम में बदलाव संग सूबे की राजधानी की आबोहवा दिनों दिन बिगड़ती जा रही है. दिवाली का त्यौहार नजदीक आते ही एयर क्वालिटी इंडेक्स <मौसम में बदलाव संग सूबे की राजधानी की आबोहवा दिनों दिन बिगड़ती जा रही है. दिवाली का त्यौहार नजदीक आते ही एयर क्वालिटी इंडेक्स ((एक्यूआई<एक्यूआई) ) भी लगातार चढ़ता जा रहा है. साइंटिस्ट का भी मानना है कि मौसम में बदली और हवा का न चलना इसका सबसे बड़ा कारण है. अगर हवा चलने लगे तो लोगों को राहत मिलेगी. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक मंगलवार को राजधानी में एक्यूआई का स्तर ख्म्9 रहा जो खराब स्थिति को दर्शता है.

मौसम ने बढ़ाई दिक्कतें

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने बताया कि बरसात के मौसम तक सब सही था, लेकिन पिछले दो दिनों से बदली और हवा न चलने से डस्ट पार्टिकल को फैलने नहीं दे रहा है. इसलिए राजधानी का एक्यूआई बढ़ा हुआ है. ऐसे में हजरतगंज, तालकटोरा व लालबाग एरिया में हवा नहीं चली तो प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है. अगर हवा तेज चल जाये तो डस्ट फैल जाने से एनवायरमेंट साफ हो जाता है.

कैसे और कहां से फैलते हैं डस्ट पार्टिकल

डॉ. आलोक धवन ने बताया कि हमे समझना होगा कि डस्ट कैसे और कहां से सबसे ज्यादा फैलता है. ऐसी सड़क जिनकी सफाई नहीं होती, फुटपाथ जो कच्चा हो, सड़क पर चलने के दौरान गाडि़यों के पहिये से निकलने वाला डस्ट, डीजल गाड़ी से निकलने वाले छोटे-छोटे कण होते हैं. इसके बाद कंस्ट्रक्शन से भी पार्टिकल उड़तें हैं. इतना ही नहीं क्लाइमेंट का भी योगदान होता है. क्योंकि हवा चलती रहती है तो डस्ट पार्टिकल फैल जाने से मौसम साफ हो जाता है. लेकिन अभी ऐसा नहीं है. कुछ समय पहले नापा गया था कि दिवाली वाले दिन हवा साफ थी लेकिन अगले दिन खराब थी. क्योंकि उस दिन हवा तेज थी और अगले दिन हवा नहीं चली.

गोमती नगर में सबसे अधिक पॉल्यूशन

वहीं साइंटिस्ट प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मेट्रो कंस्ट्रक्शन खत्म हो गया है, लेकिन गाडि़या ज्यादा हैं. सीएनजी, इलेक्ट्रिक बस बेहद कम हैं. आम आदमी पेट्रोल-डीजल की गाडि़यों से चल रहा है. दिल्ली से ज्यादा पॉल्यूशन राजधानी में है. गोमती नगर में गाडि़यों की डेंसिटी बेहद ज्यादा है जिससे वहां भी एक्यूआई बढ़ा हुआ है.

ऐसे करें बचाव

राजधानी में सड़के चौड़ी है नहीं और गाडि़यां बढ़ रही है. पेड़ ज्यादा नहीं लगाये गये है. ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ मेट्रो के फैलाव को बढ़ाना होगा. दूर रूट पर मेट्रो चले तो ज्यादा फायदा होगा. सड़क के किनारे कच्ची सड़क जो डस्ट और कीचड़ बढ़ाती है. जो आबोहवा को खराब करती है. उनको सही करना होगा. हर बार गवर्नमेंट को इसे कम करने के लिए सुझाव भी दिया जाता है. जिस पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण ही समस्या लगातार बढ़ती जा रही है.

मानकों से दोगुना पाल्यूशन

नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंड‌र्ड्स (एनएएक्यूएस) के अनुसार शहर में रेस्पीरेबल सस्पेंडेंड पर्टीकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा इंडस्ट्रियल, रेजीडेंसियल, रूरल और अन्य एरियाज में क्00 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब होनी चाहिए.

कोट

गर्वनमेंट को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ मेट्रो को दूसरे रूट पर बढ़ाना चाहिए. इसके साथ ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए. स्कूल कॉलेज, आफिस के लिए इनके प्रयोग को बढ़ावा मिलना चाहिए.

- डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, सीनियर साइंटिस्ट

बदली, हवा का न चलना आदि से डस्ट पार्टिकल फैल नहीं पाते है. जिससे ऐसे हालत होने से एक्यूआई बढ़ने की प्राब्लम होती है. सही से साफ-सफाई और हवा चलने के साथ ही प्रदूषण कम होगा.

- प्रो. आलोक धवन, निदेशक आईआईटीआर

बाक्स

एरिया एक्यूआई

अलीगंज क्8क्

गोमती नगर ख्फ्फ्

लालबाग फ्क्7

तालकटोरा फ्ख्8

शहर एक्यूआई

लखनऊ ख्म्9

गाजियाबाद ख्फ्म्

मुजफ्फरनर ख्म्म्

वाराणसी ख्7म्

दिल्ली ख्07

Posted By: Inextlive