धूल और कोहरा झेल रही गाडिय़ां
फायर टेंडर की हालत यह है कि रास्ते में चलते-चलते खराब हो जाती हैं. उनकी हालत जर्जर हो गई है. सैटरडे दोपहर आईनेक्स्ट की टीम पुलिस लाइन के ठीक सामने बने ईदगाह फायर स्टेशन पहुंची. यह फायर स्टेशन 1944 में शुरू किया गया था. यहां चार फायर टेंडर थे जो खुले में ही खड़े हुए थे. वहां बैठे सीएफओ और एफएसओ चुप्पी साध गए . उनका कहना था कि वो किसी भी तरह की वर्जन नहीं दे सकते. वह यह भी नहीं चाहते थे कि दयनीय फायर टेंडर और बिल्डिंग आई नेक्स्ट के कैमरे में कैद हो.
बॉडी तक गल गई है
फायर टेंडर नंबर-10 के टायर के पास पूरी तरह से चद्दर उखड़ गई है. जिसे बिजली के तार से बांधा गया है. थोड़ा साइट में खड़े फायर टेंडर जो कि देखने से ऐसा लग रहा था कि कई माह से निकला ही नहीं है.  फायर टेंडर-2 की हौजपाइप रखने की जगह पूरी तरह से गल चुकी है. उसमें कूड़ा-कचरा भरा हुआ है. फायर टेंडर-5 की चद्दर तो दोनों तरफ से गल चुकी है. यह हाल उन तीन गाडिय़ों का है जिनके दम पर शहर को आग से सुरक्षित रखने का दावा किया जाता है.
नहीं हैं वॉल कटर
जब भी शहर में आग की बड़ी घटना होती
है वॉल कटर और फायर शूट की कमी खलती है. आग वाली बिल्डिंग के अंदर घुसने की जगह न होने पर वॉल कटर से दीवार काटकर,
पाइप से आग बुझाई जाती है, वहीं भीषण आग पर काबू पाने के लिए फायरमैन
फायर सूट पहनकर आग में घुस सकता है. फायर सूट 250 सेल्स डिग्री तापमान तक काम कर जाता है. फायर ब्रिगेड पर दोनों की संसाधन नहीं हैं.
हाइड्रोलिक सीढ़ी नहीं है
मल्टी स्टोरी के ऊपरी हिस्से अथवा ऊंचाई वाली इमारत में लगी आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक सीढ़ी की जरूरत पड़ती है. पूरी यूपी में ही एक हाइड्रोलिक सीढ़ी है ऐसे में आगरा में इस सीढ़ी के होने की बात करना बेमानी होगी.. प्रदेश की इकलौती  हाइड्रोलिक सीढ़ी कई माह से खराब है. इसकी कीमत करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए है.
वायरलैस सेट और फायर सूट
फायरकर्मियों पर मिनी वायरलेस सेट नहीं हैं. घटना स्थल पर  इन वायरलैस सेट को वॉकी-टॉकी की तरह इस्तेमाल किया जाता है. दमकल कर्मियों की लोकेशन आसानी से मिल जाती है. वह एक दूसरे को जरूरत पर मदद भी पहुंचा सकते हैं. इन उपकरणों का भी अभाव है.