- मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की अपील की

LUCKNOW: इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इमाम ईदगाह ने बताया कि कुरान करीम पूरी इंसानियत के लिए एक नुस्खा शिफा हैं। उसके अहकाम, तालीम व हिदायत कयामत तक आने वाले तमाम इंसानों की रहनुमाई करती हैं। रसूल पाक सल्ल। और आप से सहाबा रजि। ने कुरान करीम की हिदायत के मुताबिक जिंदगी गुजारने का जो तरीका अमली तौर पर हम को दिय है वह दुनिया व आखिरत दोनों ऐतिबार से एक दस्तूर-ए-हयात है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग कुरान करीम के उन आहकाम के संबंध गलतफहमी फैला रहे हैं, जो जंग के हालात में दिए गए हैं। मौलाना ने सभी से लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की अपील की।

शिया हेल्पलाइन

सवाल- अगर कोई व्यक्ति किसी के कहने पर रोजा खोल ले और बाद मे पता चले कि समय नहीं हुआ था तो क्या आदेश है।

जवाब- ऐसा व्यक्ति केवल रोजे की कजा करेगा कफ्फारा अनिवार्य नहीं होगा।

सवाल- क्या फितरे का पैसा मस्जिद के निर्माण के लिए दिया जा सकता है।

जवाब- फितरे का पैसा केवल यतीम, गरीब और फकीर को दिया जाएगा।

सवाल- फितरा निकालने से मनुष्य को क्या लाभ होता है।

जवाब- फितरा रमजान के रोजों को कुबूल करवाता है और अगले वर्ष तक मनुष्य की सुरक्षा का कारण बनता है।

सवाल- ईद के दिन कौन से आमाल करना अनिवार्य है।

जवाब- ईद के दिन सुबह की नमाज के बाद तक्बी रात का अलाप करें फितरा निकालें, साफ कपड़े पहने, खुशबू लगाएं, ईद की नमाज से बाद मीठी चीज से अफ्तार करें। जियारते इमामे हुसैन अ.स। पढ़ाएं, दुआ, नुदबा पढ़ें और अधिक जानकारी के लिए अन्य पुस्तकों में देखें।

सवाल- दोपहर की नमाज के साथ ईद की नमाज पढ़ी जा सकती है।

जवाब- ईद की नमाज का समय सूर्य उदय के बाद से दोपहर से पूर्व तक है।

सुन्नी हेल्पलाइन

सवाल- अलविदा की नमाज किस वक्त पढ़ी जा सकती है।

जवाब- बेहतर यह है कि जुमे के शुरू वक्त यानी साढ़े 12 से दो बजे के बीच में पढ़ ली जाए।

सवाल- अगर ईद की नमाज में जायद तकबीरें कहना भूल जाएं तो क्या नमाज हो जाएगी।

जवाब- अगर ईद की नमाज में जायद तकबीरें कहना भूल जाएं तो भी नमाज हो जाएगी, न दोबारा लौटालने की जरूरत है और न ही सज्दा सहू करने की।

सवाल- अगर ईद की नमाज में हम उस वक्त शरीक हुए जबकि इमाम साहब रुकू में हैं तो क्या हुक्म है।

जवाब- अगर ईद की नमाज में आप उस वक्त शरीक हुए हैं जबकि इमाम साहब रुकू में हैं तो आप रुकू में ही तस्बीह के बजाए तीन तकबीरें बिना हाथ उठाए कह लें और अगर रुकू में पूरी न हो सके तो फिर कोई नुकसान नहीं है। आप की नमाज हो जाएगी।

सवाल- जो रकम जकात की वाजिब हुई है अगर उससे ज्यादा खर्च हो जाए जो तो उस ज्यादा खर्च की हुई रकम को आने वाले साल की जकात की रकम में जोड़ सकते हैं या नहीं।

जवाब- अगर ज्यादा रकम जकात की नियत से दे दी गयी हो तो वह आने वाले साल की जकात में शामिल कर सकते हैं।

सवाल- अगर कोई शख्स सालाना जकात न निकालता हो बल्कि हर माह कुछ न कुछ किसी गरीब को देता रहता हो और उसका हिसाब भी उसके पास हो तो किया यह रकम जकात में शामिल होगी।

जवाब- जकात की नियत से जो कुछ दिया है उतनी जकात अदा हो जाएगी।

कोट

ईद के नजदीक आने की काफी खुशी है। पूरा माह खुदा पाक की इबादत में गुजारा है ताकि वो हमें अपनी पनाहों में लें। सभी से अपील है कि वे लॉकडाउन के नियमों का पालन करें और इस बार ईद में एक दूसरे से गले मिलने और हाथ मिलाने से परहेज करें।

डॉ। शरीफ कुरैशी

Posted By: Inextlive

inext-banner
inext-banner