ताकि हो सके पहचान

चीफ प्रॉक्टर ऑफिस से बाकायदा एक लेटर हॉस्पिटल के एमएस को भेजा गया है. इसमें उनसे एमआर का टाइम फिक्स करने की बात कही गयी है. लेटर में उनके लिए दोपहर एक बजे के बाद डॉक्टर्स से मिलने का समय निर्धारित करने की बात है.  मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स के डॉक्टर्स से मिलने का टाइम फिक्स हो जाने से असली और नकली की पहचान आसानी से की जा सकेगी. कोई भी एमआर ओपीडी के समय डॉक्टर्स से नहीं मिल पाएगा. इससे ओपीडी के समय एमआर का चोला ओढ़े दलालों की पहचान आसान हो जाएगी.

गोपनीय तरीके से रखी जा रही नजर

चीफ प्रॉक्टर प्रो. एके जोशी बताते हैं कि हॉस्पिटल में कुछ ऐसे लोगों की पहचान भी की गयी है, जो एमआर नहीं हैं. लेकिन उनकी वेशभूषा एकदम उनके जैसी ही है. ऐसे लोगों पर गोपनीय तरीके से नजर रखी जा रही है. एमआर जैसे एक अच्छे प्रोफेशन को कुछ लोग बदनाम कर रहे हैं. बीएचयू एडमिनिस्ट्रेशन जल्द ही ऐसे लोगों को पकड़ कर हॉस्पिटल को दलालों से मुक्त कराएगा.