- जिले में डेढ़ दर्जन के करीब पहुंचा मौतों का सिलसिला

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आपदा और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का सदमा किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. सदमें से उनकी जान जाने का सिलसिला जारी है. दो दिनों में चार किसान इस त्रासदी का शिकार हो गए. कहीं खेतों में फसलों की हालत देखकर दिल का दौरा पड़ा तो कहीं मड़ाई के बाद कम दाने निकलने से किसान की आंखें बंद हो गई.

हॉस्पिटल ले जाने से पहले हुई मौत

जानकारी के मुताबिक हंडिया थानांतर्गत बेलहा सिंहामऊ गांव निवासी परमानंद मिश्र उर्फ कल्लन (भ्0) की शनिवार को मौत हो गई. दोपहर में खेत गए कल्लन को फसलों की हालत देख दिल का दौरा पड़ा और जब तक ग्रामीण उनको हॉस्पिटल ले जाते. इससे पहले ही उनकी मौत हो गई. इसी तरह मेजा थाना क्षेत्र के शिववंश राय का पूरा (रामनगर) निवासी रमाशंकर श्रीवास्तव (70) की फसल तीन दिन पहले आंधी और बारिश में नष्ट हो गई थी. वह खेत में बर्बाद हुई फसल को देखने गए और वहीं पर उनको दिल का दौरा पड़ गया. परिजनों ने उन्हें हॉस्पिटल मे इलाज के लिए भर्ती कराया था. शुक्रवार की रात उनकी सांसें थम गई.

बटाई पर लिया था खेत

कौडि़हार ब्लाक के आजाद नगर सम्हई गांव निवासी राम प्रसाद साहू ने बटाई पर खेत लिया था. आंधी और बारिश से अधिकांश फसल नष्ट हो गई थी. शनिवार दोपहर मड़ाई के दौरान कम गेहूं निकलने पर उनको को गहरा सदमा लगा. हॉस्पिटल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई. शंकरगढ़ ब्लाक के जूही गांव निवासी सूर्यबली प्रजापति (भ्भ्) शनिवार को खेत में फसल देखने गए थे. फसल की बर्बादी को वह बर्दाश्त नहीं कर सके और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई. बता दें कि अब तक तकरीबन डेढ़ दर्जन किसान फसलों के बर्बाद हो जाने से सदमे की चपेट में आ चुके हैं. मौसम की बेपरवाही और प्रशासन की उदासीनता के चलते किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है. यही कारण है कि एक के बाद एक किसान की मौत हो रही है. कई किसानों ने फसलों के बर्बाद हो जाने पर आत्महत्या कर ली है.