-तोड़फोड़, पिटाई के बाद कपड़े बदलकर भागे आरोपी गार्ड

-भारी पुलिस बल ने संभाला मोर्चा, लाठी चलाकर किया काबू

GORAKHPUR:

एम्स में इंट्री के दौरान अचानक गेट बंद कर कर्मचारियों की इंट्री रोकने पर जमकर बवाल हुआ. गार्ड के थप्पड़ मारने से बौखलाये कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी. सख्ती बरतने पर हड़तालियों ने हंगामा कर जमकर तोड़फोड़ की. एम्स के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दिया. बवाल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर मामला शांत कराया. देर शाम तक इस मामले में कोई तहरीर नहीं दी गई.

थप्पड़ मारने पर बवाल, जुटे कर्मचारी

एम्स के कंस्ट्रक्शन वर्क में करीब चार हजार कर्मचारी काम करते हैं. एम्स के सिघडि़यां और नंदानगर साइड में कर्मचारी किराए पर कमरा लेकर रहते हैं. तीन शिफ्ट में डयूटी के लिए पहुंचने वाले कर्मचारियों की इंट्री थंब इप्रेशन के जरिए होती है. विलंब होने पर उनका वेतन काट लिया जाता है. इसी बात को लेकर आए दिन विवाद होता है. शनिवार सुबह सिघडि़यां की तरफ का गेट अचानक बंद कर दिया. वहां से उनको नंदानगर रूट के गेट नंबर एक पर इंट्री के लिए भेज दिया गया. पैदल चलकर कर्मचारी पहले गेट पर पहुंचे तो गार्ड ने इंट्री रोक दी. कर्मचारियों ने आपत्ति जताई तो गार्ड रामू ने एक कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया. कई दिनों से पीड़ा झेल रहे कर्मचारी आक्रोशित हो गए. गार्ड की पिटाई करते हुए गार्ड रूम, टाइम आफिस, सेफ्टी आफिस, मेडिकल आफिस, इंट्री कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की. बवाल बढ़ने पर कपड़े बदलकर गार्ड भ्ाग निकले.

गुस्साए कर्मचारियों ने जाम किया कुशीनगर हाइवे

मामले की जानकारी होने पर सभी कर्मचारी एकजुट हो गए. करीब एक घंटे तक पूरे एम्स कैंपस में जमकर तोड़फोड़ करते रहे. बवाल की सूचना पाकर कैंट पुलिस पहुंची. एम्स चौकी प्रभारी, इंजीनियरिंग कॉलेज चौकी प्रभारी सहित पुलिस बल ने कर्मचारियों को काबू करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया. इससे नाराज कर्मचारी 10 बजे कसया रोड पर जीआरडी बांउड्री के सामने धरना पर बैठ गए. इससे आवागमन ठप हो गया. बाद में किसी तरह से पुलिस ने समझाबुझाकर शांत कराया.

यूनीफार्म और इंट्री पास फिर भी होती बदसलूकी

एम्स कंस्ट्रक्शन में लगी फर्म के कर्मचारियों का कहना है कि वह अलग-अलग रूट पर रहते हैं. जिस रूट पर जिसका क्वार्टर है लोग उसी तरफ के गेट से इंट्री कर जाते हैं. नया बना गेट काफी संकरा है जिससे लोगों को आने जाने में प्रॉब्लम होती है. करीब चार हजार कर्मचारियों में 22 सौ एम्स की लेबर की कॉलोनी में रहते हैं. शनिवार को यूनिफार्म और इंट्री पास होने पर भी प्रवेश न मिलने से मामला बिगड़ा. कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं. टॉयलेट में पानी नहीं आता है जबकि नहाने की असुविधा होती है. सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता है. पार्किग की व्यवस्था न होने से बाहर वाहन खड़े करने पड़ते हैं. एम्स कैंपस से बाहर जाने के लिए गेट पास नहीं मिलता है.

वर्जन

एम्स में बवाल की सूचना पर पुलिस पहुंची थी. किसी पक्ष ने कोई तहरीर नहीं दी है. यदि कोई एप्लीकेशन आता है तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी.

रवि कुमार राय, इंस्पेक्टर कैंट