- जानबूझकर किया गया हंगामा, कोरम पूरा करने के लिए चाहिए थे 26 सदस्य

आगरा. जिला पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव के लिए बुलाई बैठक हंगामा और तोड़फोड़ की भेंट चढ़ गई. करीब एक दर्जन से अधिक कुर्सियां टूट गई. बैठक कक्ष में मौजूद लोगों के बीच जमकर गाली गलौज हुई. हालात मारपीट तक पहुंच गए. यह देखते हुए कक्ष में मौजूद अधिकारी दूसरे कक्ष में चले गए. हंगामा और कोरम पूरा न करने के चलते बैठक को स्थगित कर दिया गया. सिविल जज व पीठासीन अधिकारी ने बैठक को स्थगित कर दिया. अब आगे का निर्णय डीएम को करना है.

'घोर अराजकता और अव्यवस्था'

जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की बैठक की अध्यक्षता के लिए सिविल जज शैलेंद्र कुमार वर्मा को नामित किया गया था. उनकी अध्यक्षता में बैठक निर्धारित समय पर शुरू हुई. बैठक में जो हुआ सो उन्होंने डीएम को लिखे पत्र में इस प्रकार पूरा घटनाक्रम उल्लेख किया. 'निर्धारित समय तक कोरम पूरा करने के लिए पर्याप्त सदस्य बैठक कक्ष में नहीं पहुंचे. कुछ समय बाद कुछ सदस्य बैठक कक्ष में अचानक आकर हंगामा करने लगे. कुर्सी व राजकीय संपत्तियों की तोड़फोड़ करने लगे. सदस्य आपस में गाली-गलौज और मारपीट करने लगे. इस दौरान जानमान का खतरा उत्पन्न हो गया. घोर अराजकता तथा अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई. जिसके कारण सुचारू रूप से बैठक संपन्न कराए जाने की स्थिति नहीं है. इसके चलते आज की बैठक स्थगित की जाती है'. हंगामे के बाद सिविल जज शैलेंद्र कुमार वर्मा परिसर से चले गए.

28 सदस्यों की ओर से पेश किया गया था प्रस्ताव

जिला पंचायत के 28 सदस्यों की ओर से 21 जून को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था. उन्होंने जिलाधिकारी को मय नोटरी के शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे. इसके बाद शुक्रवार को बहस और आवश्यक होने पर मतदान की तिथि प्रस्तावित की गई थी. निर्धारित तिथि पर विरोधी खेमा अपने पक्ष के सदस्यों को बस में भरकर जिला पंचायत पहुंच गया. यहां मौजूद पुलिस बल ने बस को मुख्यद्वार पर रोक दिया. उन्होंने पहचान पत्र दिखाकर सिर्फ सदस्यों को अंदर जाने की बात कही. अगुआई कर रहे सदस्य पुलिस अधिकारियों से भिड़ गए और उनकी तीखी नोक-झोंक हुई. कुछ सदस्य जिनको प्रक्रिया के लिए सहयोगी चाहिए था, उसकी भी अनुमति नहीं थी. इसके बाद सदस्यों का हंगामा बढ़ गया. वे पुलिस और एक सांसद के विरोध में नारे लगाने लगे. अधिकारियों ने मौके की नजाकत समझ छह लोगों को सहयोगी साथ ले जाने की अनुमति दे दी.

सदस्यों ने किया हंगामा

इसके बाद सदस्य अंदर पहुंच गए. यहां पर बैठक की अध्यक्षता सिविल जज शैलेंद्र कुमार वर्मा कर रहे थे. सदस्यों ने अंदर पहुंच हंगामा शुरू कर दिया. कुर्सियां तोड़ी गई और जमकर अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ. माहौल बिगड़ा तो अधिकारी किनारा कर गए और सदस्य अध्यक्ष की कुर्सी पलट सभागार से बाहर आ गए. स्थिति प्रतिकूल देख जज गाड़ी में बैठ परिसर से चले गए. बाहर मौजूद समर्थकों गाड़ी रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रास्ता खुलवा दिया. इसके बाद बैठक स्थगन का आदेश आने तक सदस्यों को अंदर ही रोके रखा गया. बैठक स्थगित का आदेश पंचायत परिसर में चस्पा कर दिया गया, जिसके बाद सदस्य बस में बैठ रवाना हो गए.

कोरम था अधूरा, कैसे होती बैठक

अगर हंगामा नहीं होता और बैठक सुचारू हो जाती तो अविश्वास प्रस्ताव गिर जाता. बैठक में 23 सदस्य ही पहुंचे थे, जबकि कोरम 26 सदस्यों से पूरा होना था.