- शासन ने मांगी पब्लिक से जुड़ी योजनाओं पर रिपोर्ट

- 20 विभागों से मांगी गई है जानकारी

- 24 से 26 जनवरी 2020 के बीच मनाया जाना है उ.प्र। दिवस

आगरा। कचरा कलेक्शन और वाटर सप्लाई में फेल संबंधित विभाग समेत कई विभाग के अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। जन कल्याण और जन जरूरत से जुड़ी पिछले तीन वर्षो की योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी शासन ने मांगी है। इसके लिए सीडीओ ने जिलास्तर के 20 विभागों के अधिकारियों से तीन वर्ष में जन कल्याण के लिए किए गए कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। बता दें, 24 से 26 जनवरी के बीच यूपी दिवस का आयोजन किया जाना है। इसको देखते हुए शासन स्तर पर इसकी समीक्षा की जा रही है।

हकीकत

- शहर में कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था ठप।

- शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था गड़बड़ है।

- स्मार्ट सिटी के तहत प्रोजेक्ट एनओसी के चलते रुके पड़े हैं।

-राजकीय इंटर कॉलेजों को आदर्श रूप में नहीं बनाया जा सका है।

- तहसील, ब्लॉक स्तर पर पेयजल फरियादियों के लिए पेयजल उपलब्ध नहीं।

- थानों में शिकायतकर्ता को नहीं दी जा रही पीली पर्ची।

- निर्देश के बाद भी अधिकारी सप्ताह में तीन दिन भ्रमण नहीं कर रहे।

- फुट पेट्रोलिंग कर सड़कों को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया।

-अधिकारियों द्वारा रूटीन डायरी मेंटेन नहीं की जा रही।

इन विभागों से मांगी गई है रिपोर्ट

विभाग का नाम बिन्दु

जल निगम पेयजल परियोजनाएं एवं जल जीवन मिशन

नगर विकास नगरीय स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और स्मार्ट सिटी

गृह विभाग लॉ-इन ऑर्डर, क्राइम कंट्रोल, महिला सुरक्षा

कृषि विभाग किसान सम्मान निधि, किसानों की आय दोगनी करने का प्रयास

ऊर्जा विभाग सौभाग्य उजाला योजना

माध्यमिक शिक्षा विभाग नकलविहीन परीक्षा और मॉडल इंटर कॉलेज

महिला कल्याण कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

खाद्य एवं रसद विभाग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजान

कचरा और पानी कराएगा फजीहत

शासन से करीब 20 बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाएं भी शामिल हैं। लेकिन, सबसे अधिक फजीहत शहर में कचरा कलेक्शन और पानी सप्लाई की समस्या करा सकती है। चूंकि पिछले तीन वर्ष पर नजर डालें तो शहर के कचरा कलेक्शन की व्यवस्था बेपटरी ही रही। कभी नगर निगम ने खुद व्यवस्था संभाली तो कभी प्राइवेट कंपनियों को जिम्मेदारी सौंप दी। लेकिन, स्थिति नहीं सुधरी। हाल ही में कचरा कलेक्शन को लेकर नगर निगम की मीटिंग में घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ। जिसके चलते कचरा कलेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रहीं पांच प्राइवेट कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। वहीं, वाटर सप्लाई पर भी पिछले तीन वर्षो में विभाग सवालों के घेरे में है। तय समय से कई वर्षो बाद शहर को मिले गंगाजल की सप्लाई अब भी विभाग प्रॉपर तरीके से नहीं कर सका है।