गोरखपुर (ब्यूरो)। पहले रीडर्स और फिर खरीदार, दोनों की वजह से वेबसाइट पर इतना ट्रैफिक लोड बढ़ गया है कि बिक्री के लिए अलग पोर्टल खोलना पड़ा गया है। गीता प्रेस ने अपने ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल पर इसकी इंफॉर्मेशन भी दी है। तो अगर आप गीता प्रेस की बुक्स पढऩे की चाहत रखते हैं और ऑनलाइन खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं तो इस पोर्टल के जरिए ऑनलाइन बुक मंगवा सकते हैं।

प्रिंटिग बंद होने का पड़ा असर

पहले लॉकडाउन और फिर कंटेनमेंट जोन की पाबंदियों की वजह से गीता प्रेस में किताबों की छपाई बंद रही। इसका असर स्टाक और बिक्री पर भी पड़ा। मगर जब एडमिनिस्ट्रेशन ने 100 से ज्यादा बुक्स के ई-वर्जन पोर्टल पर अपलोड किए, तो ऑनलाइन रीडर्स की तादाद में इजाफा हो गया। वहीं, बीते दिनों एक ट्वीट के बाद गीता प्रेस ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा और ऑनलाइन खरीद बढ़ गई। ऑनलाइन ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से वेबसाइट ओवर क्राउडिंग का शिकार हो गई, जिससे रीडर्स और बायर्स दोनों की ही प्रॉब्लम होने लगी। रीडर्स को दिक्कत न हो, इसके लिए गीता प्रेस मैनेजमेंट ने किताबों की बिक्री के लिए अलग से पोर्टल ही लांच कर दिया।

बुक्स के ई-वर्जन अपलोड

गीता प्रेस की वेबसाइट www.book.gitapress.org पर जाकर ऑनलाइन क्लिक करते ही पोर्टल खुल जाएगा। जहां से हिंदी, संस्कृत, गुजराती, अंग्रेजी व तेलुगु लैंग्वेज की बुक्स खरीदी जा सकती है। वहीं, रीडर्स फ्री पढऩे के लिए 100 से अधिक बुक्स के ई-वर्जन भी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। डिमांड के मुताबिक, यह बुक्सलोगों की पसंदीदा लैंग्वेज में भी बुक्स अवेलबल है। इन्हेंं नि:शुल्क डाउनलोड भी कर सकते हैं। वहीं, 1880 बुक्स व 2000 से अधिक फोटो का डिजिटल बैकअप भी जल्द अपलोड हो जाएगा।

इन लैंग्वेज में अवेलबल

- हिंदी

- संस्कृत

- तेलुगु

- गुजराती

- बंगाली

- अंग्रेजी

- उडिय़ा

- मराठी

- तमिल

- असमिया

- मलयालम

- उर्दू

- पंजाबी

- नेपाली

यह है नई वेबसाइट -

www.gitapress.org

'ऑनलाइन ऑर्डर बड़ी संख्या में आ रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से किताबों की छपाई डिमांड के हिसाब से नहीं हो पा रही है। स्टॉक भी खत्म हो गया है। ऐसे में पाठकों को फ्री ऑफ कॉस्ट ऑनलाइन बुक्स उपलब्ध करा दी गई है। वहीं इसकी बिक्री के लिए अलग पोर्टल भी शुरू किया गया है।'

- लालमणि तिवारी, उत्पाद प्रबंधक, गीता प्रेस

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