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RANCHI :
ग्रेजुएशन पार्ट 3 में पढ़ने वाली ऋचा ने फेसबुक पर एक फार्वडेड मैसेज को शेयर करने से पहले यह नहीं सोचा था कि इसकी उसे इतनी बड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी. युवा जोश और अपरिपक्वता के कारण ऋचा ने एक ऐसे पोस्ट को अपने वाल पर शेयर कर दिया जो साम्प्रदायिकता के साथ सीधा संबंध रखता है. उसने यह गलती बार बार की और इसका खामियाजा उसे इतनी कम उम्र में ही जेल जाकर भुगतना पड़ा. ऋचा ने इस पोस्ट को शेयर जरूर किया लेकिन यह साम्प्रदायिक पोस्ट ऋचा के द्वारा बनाया नहीं गया था. धर्म संबंधी इस पोस्ट को बनाने वाले दूसरे लोग हैं जो देश के किसी कोने में आराम की जिंदगी बसर कर रहे हैं लेकिन यह पोस्ट करने के बाद ऋचा की जिंदगी में अकस्मात कई उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं. शहर में कई संगठन ऋचा के सपोर्ट में सड़क पर उतर रहे हैं तो वकीलों ने कोर्ट का बॉयकाट तक किया. अब कई नेता ऋचा के घर पहुंचने लगे हैं. लेकिन इन सबके बीच ऋचा लगातार यही कह रही है..मैं निर्दोष हूं.

कैसे पहुंचेगी पुलिस पोस्ट निर्माताओं तक

ऋचा ने जो पोस्ट शेयर किया वह पोस्ट अन्य लोगों के द्वारा बनाया गया था. ऋचा ने दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के साथ बातचीत में उस विवादित पोस्ट को उपलब्ध कराया जिसको लेकर बवाल मचा है. शिव राजपूत, रावत रिपुहन सिंह, विशाल गुप्ता, विवेक सिंह, श्री चंद केदार, प्रदीप सिंह डोंवार, जतिन शर्मा आदि कई ऐसे लोग हैं जिनके द्वारा यह आपत्तिजनक पोस्ट बनाया गया था. लेकिन पुलिस के पास इन आरोपियों तक पहुंचने का कोई उपाय नहीं नजर नही आ रहा है.

क्या कहा ऋचा ने..

मैंनें फेसबुक पर कई लोगों को इस तरह के पोस्ट डालते हुए देखा है. मैंने कुछ पोस्ट शेयर जरूर किए लेकिन उनमें से कोई भी पोस्ट मेरे द्वारा बनाया गया नहीं था. लेकिन, पुलिस ने मेरी कोई बात नहीं सुनी और पकड़कर जेल भेज दिया. अगर अरेस्ट ही करना था तो उनको करना चाहिए जो लोग ऐसा पोस्ट बनाते हैं. मुझे इस पोस्ट की संवेदनशीलता का अंदाजा नहीं था लेकिन अगर ऐसा था तो फेसबुक ने खुद इस पोस्ट को बैन क्यों नहीं किया.

क्या कहते हैं अधिवक्ता

फैसले के विरोध में आज हम वकीलों ने उस कोर्ट के कार्यो से खुद को अलग रखा था. अगर फैसला ऐसा आया है कि कुरान की प्रतियां बांटना अब जरूरी नहीं है तो यह सराहनीय है और हम सब इसका स्वागत करते हैं.

अधिवक्ता, कुन्दन प्रकाशन

सचिव, रांची डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन

इस तरह के पोस्ट को शेयर नहीं करना चाहिए लेकिन हमें ऐसा करने वाले बच्चे की उम्र और परिपक्वता को भी ध्यान में रखना चाहिए. सोशल साइट्स को खुद इस तरह के पोस्ट बैन कर देने चाहिए.

प्रणव कुमार बब्बू,

वरीय अधिवक्ता

हिंदू जनमानस की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कुरान बांटने का फैसला वापस लिया है जो सराहनीय है. विहिप इसका स्वागत करती है और अपील करती है कि संवेदनशील पोस्ट बनाने वालों पर कार्रवाई की जाए.

डॉ. वीरेन्द्र साहु

प्रांत मंत्री

विहिप