-यूजीसी ने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटीज को दिए निर्देश

- यूनिवर्सिटीज को करना होगा विदेशी यूनिवर्सिटीज से कल्चर का आदान-प्रदान

-यूनिवर्सिटीज में विदेशी लैग्वेंज कोर्स का भी बढ़ेगा दायरा

Meerut- देश की संस्कृति से अब विदेशी स्टूडेंट्स को भी परिचित कराया जाएगा. यहीं नहीं देश के स्टूडेंटस भी विदेशी यूनिवर्सिटीज से परिचित होंगे. यूजीसी ने इसके लिए निर्देश जारी किए हैं. निर्देशों के अनुसार यूजीसी ने देश की सभी यूनिवर्सिटीज में विदेशी एजुकेशन का आदान प्रदान करने की हिदायत दी है. इसके साथ ही यूजीसी ने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सभी यूनिवर्सिटीज को निर्देश दिए हैं.

करना होगा आदान प्रदान

यूजीसी ने अभी हाल फिलहाल में देश की यूनिवर्सिटीज को विदेशी यूनिवर्सिटीज से एजुकेशन व संस्कृति ज्ञान का आदान प्रदान करने के लिए कहा है. यूजीसी के अनुसार वैसे तो पहले से ही इस तरह के एजुकेशन से संबंधित कार्यक्रम होते रहते हैं, लेकिन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटीज को इस कार्य को विस्तार से करने के लिए कहा गया है.

बनेगी कमेटी, होगा विस्तार

यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटीज को कुछ लैंग्वेज स्पेशल स्टूडेंट्स की एक टीम बनाने के लिए कहा है. इस टीम में ज्यादा से ज्यादा इंग्लिश लैंग्वेज को समझने वालों को शामिल करने के लिए कहा है. ताकि वो बाहरी यूनिवर्सिटीज से अपने देश की संस्कृति को परिचित करा सकें . यूजीसी के अनुसार इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे व लैंग्वेज स्कोप भी बढ़ेगा.

ये है यूनिवर्सिटी के हाल

अगर हम अपनी सीसीएस यूनिवर्सिटी की बात करें तो हमारे यहां भी फ्रैंच, रशियन आदि विभिन्न तरह की लैंग्वेज के कोर्स हैं. यहां पिछले तीन सालों से मुश्किल से दस एडमिशन ही लैंग्वेज कोर्स मे हो पाए हैं. कारण यहां के स्टूडेंट्स में लैंग्वेज कोर्स के प्रति जागरुकता की कमी है.

क्या कहती है यूनिवर्सिटी

हमारी यूनिवर्सिटी में भी कई विभागों के विदेशी यूनिवर्सिटीज से टाइप हुए हैं. कोशिश है कि आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए स्टूडेंट्स को नॉलेज मिलती रहें.

प्रो. एनके तनेजा, वीसी, सीसीएसयू