- डीडीयूजीयू में आयोजित गोरखपुर महोत्सव का राज्यपाल राम नाईक ने किया उद्घाटन

GORAKHPUR: संस्कृति जीवन की परंपरा है, जिसका प्रचार-प्रसार एवं विकास करने की आवश्यकता है. इसी उद्देश्य से महोत्सव का आयोजन होता है जिससे हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति विकसित होती है. ये बातें राज्यपाल राम नाईक ने डीडीयूजीयू में आयोजित गोरखपुर महोत्सव 2019 का उद्घाटन करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि गोरखपुर महोत्सव भारतीय संस्कृति सभ्यता और आस्था का प्रतीक है.

विस्तृत हो गया आयोजन का रूप

दीप प्रज्जवलित कर गोरखपुर महोत्सव का उद्घाटन करने के बाद मौजूद दर्शकों को संबोधित करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नित्य नए-नए विकास कार्य संचालित हो रहे हैं, इसका प्रकटीकरण गोरखपुर महोत्सव में भी दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की प्रसन्नता हो रही है कि गोरखपुर महोत्सव पिछले साल आयोजित हुआ तथा इस बार और विस्तृत रूप में इसका आयोजन किया गया है. विद्धान एवं बुद्धिमान व्यक्ति वही होता है, जो किसी कार्य की शुआत कर उसे लगातार जारी रखता है.

शुभ मुहूर्त में हुई है शुरुआत

राज्यपाल ने कहा कि गोरखपुर महोत्सव बहुत अच्छे समय पर आयोजित किया गया है. क्योंकि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती है, जिनके आदर्शो का हम सभी को अनुसरण करना चाहिए. उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ऐसी संस्कृति में विश्वास रखता है जिसमें सारी दुनिया एक परिवार के रूप में मानी जाती है. उन्होंने कहा कि 14 एवं 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व प्रारंभ होगा तथा 15 जनवरी से कुंभ प्रारंभ हो रहा है. उन्होंने कहा कि 11 जनवरी से 13 जनवरी तक आयोजित होने वाला गोरखपुर महोत्सव बड़े अच्छे समय एवं मुहूर्त में शुरू हुआ है.

किताबें देतीं आनंद और ज्ञान

राज्यपाल ने उत्सव एवं महोत्सव के अंतर को बताते हुए कहा कि संस्कृति का दर्शन महोत्सव में मिलता है. गोरखपुर महोत्सव में 30 स्टॉल किताबों के लगाए गए हैं. किताब जीवन का आनंद और ज्ञान प्रदान करती है. संस्कृति जीवन की परंपरा है. राज्यपाल ने गोरखपुर महोत्सव की सफलता की शुभकामना व्यक्त करते हुए कहा कि गोरखपुर महोत्सव से सभ्यता एवं संस्कृति मजबूत होगी तथा देश की एकता और अखंडता को बल मिलेगा.

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शुरू हो गया शिल्प मेला

महोत्सव आयोजन समिति अध्यक्ष कमिश्नर अमित गुप्ता ने सभी का स्वागत किया. उन्होंने बताया कि महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य गोरखपुर के साथ साथ पूर्वांचल की संस्कृति एवं सभ्यता को प्रदर्शित करना है तथा विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नित्य नए-नए विकास को दर्शाना है. उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय गोरखपुर महोत्सव के साथ-साथ 11 से 17 जनवरी तक शिल्प मेला आयोजित होगा. जिसके माध्यम से शिल्पियों को प्रोत्साहन मिलेगा. ज्ञानवर्धन के लिए पुस्तक मेला महोत्सव लगाया गया है. डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने सभी गेस्ट के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया.