- गोरखपुर यूनिवर्सिटी की आ‌र्ट्स फैकेल्टी की हालत खस्ता

- पीने के लिए पानी की नहीं है प्रॉपर व्यवस्था, वहीं टूटे शीशे हर मौसम में करते हैं परेशान

- दीवारों में यहां भी उगी हुई हैं झाडि़यां

GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. यहां की हालत भी प्राइमरी स्कूल सी होने लगी है. टूटी डेस्क और बेंच पर बैठाकर स्टूडेंट्स को पढ़ाया जा रहा है, तो वहीं पीने का पानी भी ठीक से मयस्सर नहीं है. सर्दी हो या गर्मी, टूटे शीशे स्टूडेंट्स की परेशानी बढ़ा रहे हैं, तो वहीं दीवार पर उगी झाडि़यां जिम्मेदारों की सीरियसनेस की पोल खोल रही हैं. यह हाल है गोरखपुर यूनिवर्सिटी की आ‌र्ट्स फैकेल्टी का, जहां फैसिलिटी के लिए स्टूडेंट्स कंप्लेन कर-करके परेशान हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है. यह बातें सामने आई दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के रियल्टी चेक में, जिसमें डरे सहमे स्टूडेंट्स ने सामने न आने की शर्त पर जी खोलकर अपनी बातें रखी.

कभी-कभी पानी की भी किल्लत

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम आ‌र्ट्स फैकेल्टी में पहुंची. यहां पानी के लिए टोटियां तो लगी हुई मिलीं, लेकिन इनमें पानी नहीं आ रहा था. स्टूडेंट्स ने बताया कि टोटियों की हालत अक्सर ऐसी ही रहती है. पानी नहीं आता, जिसकी वजह से लोगों को परेशानी करनी पड़ती है और दूसरी जगह जाकर पानी पीना पड़ता है. वहीं टॉयलेट की भी रेग्युलर सफाई नहीं होती, जिससे यहां रहना दूभर हो जाता है. कई बार तो क्लास में बैठना किसी जंग लड़ने से कम नहीं होता और बदबू के मारे दिमाग खराब हो जाता है.

क्लासरूम्स की हालत भी बदतर

क्लासरूम्स की बात करें तो इनकी हालत भी काफी बेहतर नहीं है. साफ-सफाई वहीं होती है, जहां स्टूडेंट्स बैठते हैं, बाकी की डेस्क और बेंचेज पर वैसे ही धूल जमी रहती है. इतना ही नहीं डेस्क और बेंचेज के हाल की बात करें तो यह किसी बेसिक स्कूल्स से भी बदतर नजर आई. डेस्क तो टूटी हुई थी, वहीं बेंच का हाल भी ठीक नहीं था. धूल तो लगभग सभी क्लासरूम्स की शोभा बढ़ा रही थी. ब्लैक बोर्ड के ऊपरी हिस्सों का नजारा तो और खराब दिखा. दीवारों पर सीलन और पेंट उजड़ते हुए नजर आए, वहीं कुछ क्लासरूम्स में तो प्लास्टर भी टूटे हुए नजर आए. यहां भी बिल्डिंग की बाहरी दीवारों पर पेड़ उगे मिले.

आ‌र्ट्स फैकेल्टी में अक्सर पानी की किल्लत हो जाती है. वहीं कुछ क्लासेज में डेस्क और बेंच भी टूटी हुई है. कई बार शिकायतों के बाद भी परेशानियां जस की तस बनी रहती हैं.

- विनय, स्टूडेंट

स्वच्छ भारत अभियान की हवा गोरखपुर यूनिवर्सिटी में ही निकल रही है. टॉयलेट की नियमित सफाई नहीं होती है, जिससे यहां आसपास खड़े रहना मुश्किल रहता है. वहीं क्लासेज में जमी धूल से रोज स्टूडेंट्स के कपड़े खराब होते हैं. इस ओर भी लोगों को ध्यान देना चाहिए.

- प्रबुद्ध कुमार, स्टूडेंट