हर इलाके में डेयरी

सिटी के लगभग हर हिस्से में डेयरियां हंै। इनकी संख्या तकरीबन 110 के आस-पास है। हालांकि, नगर निगम की फाइलों में सिर्फ 11 डेयरियां रजिस्टर्ड है। रेजीडेंशियल एरियाज में चल रही अवैध डेयरियों के ओनर नगर निगम को कई मोर्चो पर चोट पहुंचा रहे हैं। डेयरी से निकलने वाला गोबर खुली नालियों में बहाया जाता है। ये गोबर नालियों के रास्ते सीवर में जाता है। नतीजतन नालियां और सीवर चोक। रेजीडेंट्स निगम के पास कार्रवाई के लिए गुहार लगाता है, पर सुनवाई नहीं होती।

निगम को भी रेवेन्यू चपत

अवैध डेयरियां नगर निगम को रेवेन्यू की चपत भी लगा रही है। रेजीडेंशियल एरियाज में चल रही डेयरियों के हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और सीवरेज टैक्स की दरें कॉमर्शिलय दरों पर तय होनी चाहिए। जबकि नगर निगम के अंडर आने वाली एरियाज की कोई भी डेयरी कॉमर्शियल दर से टैक्स का भुगतान नहीं कर रही है।

रजिस्ट्रेशन होना चाहिए

निगम में डेरियों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है। नियम तो ये है कि बिना परमिशन लिए एरिया में डेयरी चल ही नहीं सकती है। डेयरी की रजिस्ट्रेशन फीस डेरी में पल रहे पशुओं के आधार पर तय की जाती है। स्वास्थ्य अधिकारी मातादीन ने बताया कि हम प्रति पशु 10 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस वसूलते हैं। वहीं, सोर्सेज के अकॉर्डिंग टैक्स कलेक्शन में भी खेल रहता है। नगर निगम के कर्मचारियों और बाबूओं की मिलीभगत से पूरा खेल चलता है।  

 योजना या कागजी घोड़ा

सिटी में अवैध डेयरियों पर शिकंजा कसने के लिए मेयर डॉ आई.एस तोमर के पिछले कार्यकाल में गोकुल ग्राम योजना बनाई गई थी। शहर से बाहर जगह चिन्हित करने की कवायद ने भी हवा पकड़ी थी। मगर फिर ये योजना कागजी घोड़ा बनकर रह गई। सुप्रिया ऐरन के कार्यकाल में भी सभासदों ने कई बार योजना के लिए आवाज उठाई मगर गोकुल ग्राम फाइलों से बाहर नहीं निकला।  

भैंसों का पिकनिक स्पॉट

सभासद विकास शर्मा ने बताया कि मेयर साहब के सरकारी आवास के ठीक पीछे का तालाब भैंसों का पिकनिक स्पॉट है। कई बार इस तालाब को पिकनिक स्पॉट बनाने की कवायद ने जोर पकड़ा मगर नगर निगम की नाक के नीचे भैसों की आरामगाह बनी हुई है। यहीं नहीं बेसिक शिक्षा का परिसर, कॉलोनियों के अंदर के तालाब सभी भैसों के आरामगाह है।

हाईकोर्ट भी डेयरियों के खिलाफ सख्त

हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने सिटी में चल रही डेयरियों पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए एडमिनिस्ट्रेशन को आर्डर दिया था कि डेयरियों को शहर से बाहर बसाया जाए। शहर के अंदर चलने वाली डेरियों को अवैध माना जाएगा।

इसके बाद हाईकोर्ट ने एक और आदेश में कहा कि अगर सिटी के बाहर निकाली गई डेयरियां शहर में वापस लौटती है तो उस एरिया के थानाध्यक्ष या संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सिर्फ ये हैं लीगल

एरिया         ओनर

आजमनगर    यासीन कुरैशी

आजमनगर    यूनुस कुरैशी

आजमनगर    कासिम कुरैशी

रोहलीटोला     साबिर हुसैन

मलूकपुर       शहाबुद्दीन

विधोलिया       जावेद खां

सैदपुर हाकिंस    हसनैन

सुर्खा             नवाब मियां

चौधरी तालाब    नसरुद्दीन

बानखाना         शहाबुद्दीन

सैदपुर हाकिंस    जमातउद्दीन

नगर निगम की फाइलों में वैध डयेरियों के नाम दर्ज।

इन इलाकों में समस्या ज्यादा

-चाहवाई

-बानखाना

-कालीबाड़ी

-चौपुला चौराहे के पास

-रामपुर गार्डन

-गुलाब नगर

-आजमनगर

-राजेन्द्र नगर

एक वीक की अल्टीमेटम

नगर निगम की जमीनों पर जहां भी अवैध डेयरियां चल रही है उन्हें उनके ओनर एक सप्ताह में तत्काल प्रभाव से हटा लें। अगर ये डेयरियां नहीं हटाई जाती हैं तो नगर निगम उन्हें वहां से हटा देगा और चालान काटा जाएगा।

- डॉ आई.एस तोमर, मेयर

भेजी गई नोटिस

मामला मेरे संज्ञान में है। पिछले कुछ दिनों से कफ्र्यू के चलते पूरा मामला लंबित रहा है। कुछ डेयरियों को चिन्हित करके  नोटिस भी भेजी जा चुकी है। अब अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

- उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त  

निर्देश मिले तो एक्शन

मामला पूरी तरह से मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर मुझे शहर में चल रही अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई के डायरेक्शन मिलते है तो हम हर हाल मेे कार्रवाई करेंगे।

- मातादीन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

मेरे हॉस्पिटल के ठीक बगल में डेयरी चलती है। इतनी बदबू रहती है कि पेशेंट्स बाहर खड़े भी नहीं रह पाते हैं। मेरा घर हॉस्पिटल की बिल्डिंग में ही है।

-डॉ। रवि खन्ना, रामपुर गार्डन

रामपुर गार्डन शहर की पॉश कॉलोनियों में गिनी जाती है। मगर  डेयरियों की वजह से रेजिडेंट्स कई समस्या से रोज दो-चार हो रहे हैं। पहले यहां बच्चे बाहर क्रिकेट खेला करते थे मगर खेलना बंद हो गया।  

-रजनी चावला, रामपुर गार्डन

डेयरियों से निकलने वाला गोबर नालियों और सीवर को चोक कर रहा है। गंदगी भी फैलती है। इससे बीमारियां होती हैं। किसी का इस तरफ ध्यान नहीं है।  

-सुनील कुमार, रामपुर गार्डन

घर के बगल में डेयरी चलती है। सुबह से ही जानवर बाहर नजर आने लगते हैं। अब तो घर में मेहमानों ने भी ये कहकर आना कम कर दिया है कि घर के बाहर जानवरों का राज रहता है।

-रेखा, गुलमोहर पार्क

मैं बुजुर्ग आदमी हूं। सुबह टहलने के लिए जाया करता था लेकिन अब सड़क पर जानवरों के कारण निकलना बंद कर दिया है। राजेन्द्र नगर में डेयरियां लगभग हर जगह हैं। पॉश कॉलोनी होने के बावजूद यहां गंदगी रहती है।

-अनोखेलाल, राजेन्द्र नगर

घर से कुछ दूर डेयरी है। डेयरी वाले गोबर और कचरा नालियों में बहा देते हैं। रोज सुबह और शाम ऐसा होता है। इससे सभी सीवर और नालियां चोक हो गई हैं।

-रामादेवी, राजेन्द्र नगर

डेयरी वाले दोपहर में भैंसों को खुला छोड़ देते हैं। सड़क पर भैंसें होती हैं। अक्सर किसी न किसी को चोट लगती रहती है।  

-स्वाति, बानखाना  

सिटी में कहीं भी चले जाएं, आपको हर जगह सिर्फ भैंसें और डेयरियां ही मिलेंगी। डेयरियां गंदगी तो फैलाती ही हैं, साथ ही एक्सीडेंट का कारण भी बनती हैं।

-राजीव अग्रवाल, साहूकार

हमारे एरिया की कंडीशन सबसे खराब है। यहां शहर की सबसे ज्यादा डेरियां चलती हैं। एक अंदाजे से इनकी संख्या 35 से ज्यादा है। पूरा एरिया इनकी चपेट में है। सड़कों का बुरा हाल है। नालियों में सिर्फ गोबर है। सीवर लाइन चोक है।

-मोहित शर्मा, चाहवाई