Chit fund बोले तो saving scheme
 

चिट फंड इंडिया में सेविंग स्कीम की तरह यूज किया जाता है. चिट फंड इंडिया में लीगल इनवेस्टमेंट स्कीम है. अगर आसान शब्दों में कहा जाए तो लोग इसमें डेली, मंथली और ईयरली बेसिस पर इनवेस्टमेंट करते हैं. जिस पर इंटरेस्ट रेट के साथ चिट फंड कंपनियां ज्यादा पैसा लौटाने का दावा करती हैं. चिट फंड कंपनियां ऑर्गनाइज अनऑर्गनाइज दोनों ही हैं.  

ऐसे काम करता है चिट फंड

चिट फंड कंपनियों का इनवेस्टमेंट का प्रोसीजर बैंक में इनवेस्टमेंट या किसी इंश्योरेंस में इनवेस्टमेंट के फंडे की तरह ही है. इसमें हर दिन या महीने कम अमाउंट के इनवेस्टमेंट का कॉन्सेप्ट होता है. जिस वजह से ये चिट फंड कंपनियां फाइनेंशियली वीकर सेक्शन में काफी पॉपुलर हैं.

Monthly Premium × Duration in Months = Gross Amount
 

चिट फंड में अगर कोई हर महीने 100 रुपए जमा कर रहा है. तो स्कीम के हिसाब से वह एक निश्िचत ड्यूरेशन तक उतना पैसा जमा करता रहेगा. अगर कोई इनवेस्टर किसी 5 साल की स्कीम में हर महीने 100 रुपए जमा करेगा तो उसका कुल अमाउंट 6000 रुपए होगा. इसके बाद चिट फंड कंपनियां इस अमांउट पर इंटरेस्ट रेट जोड़कर देती हैं.

जैसे बंगाल में हुए चिट फंड स्कैम में सुदीप्त सेन अपने शारदा ग्रुप में हर महीने 100 रुपए इनवेस्ट करने वालों को 5 साल के बाद 9000 रुपए देने का वादा किया करता था. इस हिसाब से लोग हर महीने 100 रुपए इनवेस्ट कर 3000 रुपए बचाने के लालच में इनवेस्ट करते रहे.

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