कानपुर। 8 मार्च 1989 को पंजाब में जन्मीं हरमनप्रीत कौर भुल्लर आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं। हरमन को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था हालांकि उनके लिए क्रिकेटर बनना आसान नहीं था। हरमन को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, सिर्फ घर के अंदर ही नहीं बाहर भी इस महिला खिलाड़ी ने विपरीत परिस्थितियों में खेलकर अपना नाम कमाया। आज ऑस्ट्रेलिया में वह कंगारु टीम के खिलाफ पहली बार टी-20 वर्ल्डकप फाइनल खेलने जा रही हैं। हरमन चाहेंगी कि जीत के साथ अपने बर्थडे को यादगार बनाए।

स्कूली दिनों में लग गया था क्रिकेट का कीड़ा

31 साल की हो चुकी हरमन को इंटरनेशनल क्रिेकट खेलते हुए 10 साल हो गए। मगर स्कूल के मैदान से लेकर टीम इंडिया तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था। एक चैट शो 'ब्रेकफॉस्ट विथ चैंपियन' में हरमनप्रीत ने अपने करियर से जुड़ी तमाम बातों को शेयर किया था। हरमन के मुताबिक, क्रिकेट खेलने का कीड़ा उन्हें स्कूली दिनों में ही लग गया था। अक्सर लंच में वह लड़कों के साथ मैच खेला करती थी। एक दिन प्रिंसिपल ने उन्हें देख लिया और बुलाकर पूछा कि तुम रोज कोई न कोई नया गेम खेलती हो, किसी एक खेल में इंट्रेस्ट नहीं है क्या? इस पर हरमन ने जवाब दिया, उन्हें क्रिकेट बहुत पसंद है। तब टीचर ने उनसे कहा कि वह स्कूल की एक क्रिकेट टीम बनाएंगे तुम उसमें खेला करना।

छुट्टियों में जाती थी क्रिकेट सीखने

हरमन कहती हैं कि उन्होंने कभी लड़कियों को क्रिकेट खेलते टीवी पर नहीं देखा था। उस वक्त तक वह नहीं जानती थी कि भारत में लड़कियों की भी टीम है। हालांकि जब प्रिंसीपल ने हरमन के पिता से बात की तो वह अपनी लड़की को क्रिकेट सिखाने के लिए राजी हो गए। स्कूल में समर वैकेशन के दौरान हरमन रोज क्रिकेट सीखने स्कूल जाया करती थी, हालांकि उस वक्त साथ की लड़कियां मजाक उड़ाती थी मगर आज वही अपनी सहेली पर गर्व करती है। तो इस तरह हरमन ने क्रिकेट की ट्रेनिंग ली और भारत के लिए खेलने का सपना देखा।

बाल कटवाए तो पापा ने नहीं की बात

क्रिेकट की ट्रेनिंग के दौरान हरमन को कई बदलावों से गुजरना पड़ा। जैसे कि उन्हें लंबे बालों से काफी दिक्कत होती थी, ऐसे में उन्होंने बाल कटवा लिए। हरमन के मुताबिक, बाल कटवाने के बाद उनके पिता ने करीब तीन महीने तक बात नहीं की थी। उनको छोटे बाल पसंद नहीं थे। हालांकि हरमन ने पिता को महिला क्रिकेटरों की फोटो दिखाई और कहा कि बड़े बालों में क्रिकेट खेलना काफी मुश्किल होता है। खैर तीन महीने तक गुस्सा रहने के बाद हरमन के पिता मान गए।

जब घरवालों से डेढ़ साल तक छुपाया टैटू

हरमन एक ऐसे परिवार से आती है जहां शरीर पर टैटू बनवाने की परमीशन नहीं थी। दरअसल हरमन के बाएं हाथ में 'मां' नाम का एक टैटू है, जिसकी काफी रोचक कहानी है। इस बात का जिक्र भी हरमन 'ब्रेकफॉस्ट विथ चैंपियन' शो में कर चुकी हैं। हरमन कहती हैं कि एक दिन वह अपनी फ्रेंड के साथ टैटू की शॉप पर गईं जहां उन्होंने यह मां नाम वाला टैटू देखा। बस फिर क्या उन्होंने ठान लिया कि इसे हाथ पर बनवाकर रहेंगी। घरवालों से छुपाने के लिए हरमन ने कलाई पर बैंड बांध लिया ताकि किसी को दिखे नहीं। ऐसा करीब डेढ़ साल तक चलता रहा मगर फिर एक दिन ब्रेकफॉस्ट करते समय उनकी मां की नजर टैटू पर पड़ी। हालांकि उन्होंने कुछ नहीं कहा मगर हरमन को डर था कि अगर पापा को पता चला तो वह गुस्सा करेंगे मगर बाद में सब नॉर्मल हो गया। इस तरह उनका टैटू सबके सामने आया।

जो कोहली नहीं बना पाए वो रिकॉर्ड बनाया

साल 2009 में भारत के लिए इंटरनेशनल डेब्यू करने वाली हरमनप्रीत कौर को क्रिकेट खेलते हुए एक दशक बीत गया। क्रिकइन्फो पर उपलब्ध डेटा के मुताबिक, हरमन ने साल 2009 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 डेब्यू किया था। तब से लेकर अब तक हरमन भारत के लिए 113 टी-20 मैच खेल चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने 27.27 की औसत से 2182 रन बनाए। आपको जानकार हैरानी होगी कि टी-20 इंटरनेशनल में हरमन ने एक शतक भी लगाया है जबकि विराट कोहली ऐसा नहीं कर पाए हैं।

ऐसा है इंटरनेशनल करियर

दाएं हाथ की बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर ने भारत के लिए 113 टी-20, 99 वनडे और 2 टेस्ट मैच खेले हैं। वनडे में इस खिलाड़ी ने 34.88 की औसत से 2372 रन बनाए। जिसमें तीन शतक और 11 अर्धशतक शामिल है। वहीं टेस्ट की बात करें तो हरमन ने सिर्फ दो मैच खेले, जिसमें कुल 26 रन बनाए।

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