कोर्ट के ऑर्डर का इंप्लीमेंटेशन नहीं
कोर्ट के सीरियस रुख को देखते हुए स्टेट के चीफ सेक्रेटरी अशोक कुमार सिन्हा ने पटना, गया, भागलपुर, दरभंगा व मुजफ्फरपुर के डीएम को लेटर भेजा है. पटना हाईकोर्ट द्वारा 15 मई को इंक्रोचमेंट के मामले में सुनवाई की गई थी, जिसमें हेल्थ सेक्रेटरी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को स्वयं उपस्थित होने को कहा गया था. स्टेट के मेडिकल कॉलेज व हॉस्पीटल की जमीन को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त नहीं कराए जाने को कोर्ट ने सीरियसली लिया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि छह जुलाई या इससे पूर्व प्रतिशपथ पत्र द्वारा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.

11 को प्रिंसिपल सेक्रेटरी व डीएम की पेशी

कोर्ट ने 11 जुलाई की तिथि निर्धारित करते हुए स्टेटस रिपोर्ट एवं अंडरटेकिंग के साथ हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एवं संबंधित डिस्ट्रिक्ट के डीएम को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा है. इससे पहले इंक्रोचमेंट नहीं हटाए जाने की स्थिति में हाईकोर्ट में अवमानना शुरू कर दिया जाएगा.

बाउंड्रीवॉल या पिलर खड़ी करें

चीफ सेक्रेटरी ने स्पष्ट कहा है कि इंक्रोचमेंट को हटाकर लैंड का सीमांकन कर दें. इसके बाद पॉसिबल हो तो बाउंड्रीवाल या फिर पिलर खड़ी कर दिया जाए. साथ ही हर वीक प्रोग्रेस रिपोर्ट की भी मांग की गयी है. चीफ सेक्रेटरी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से पटना डीएम से बात भी की है. उल्लेखनीय है कि पटना हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूजेसी 6884-2010 में विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा बनाम स्टेट व अन्य में स्टेट के मेडिकल कॉलेज व हॉस्पीटल से इंक्रोचमेंट हटाए जाने को लेकर वाद चल रहा है.

...पर कुछ होता नहीं है

नालंदा मेडिकल कॉलेज व हॉस्पीटल के पास 88.5 एकड़ जमीन है. इसमें करीब 20 एकड़ में बिल्डिंग है, तो शेष पर इंक्रोचमेंट या फिर पानी से भरा गड्ढा या मैदान है. यहां से इंक्रोचमेंट हटाने के लिए कई बार प्रयास किए गए, पर पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन के ऑफिसर्स को सफलता नहीं मिली और बैरंग लौटना पड़ा. नालंदा मेडिकल कॉलेज के पास करीब 14 एकड़ लैंड है, वहां भी इंक्रोच्ड है. बार-बार पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन को लिखे जाने के बाद भी मुक्त नहीं हो पा रहा है. अब देखना है कि हाईकोर्ट के सीरियस होने व चीफ सेक्रेटरी द्वारा संबंधित जिलों के डीएम को लेटर भेजने के बाद कितना इंप्लीमेंट हो पाता है.