-परियर घाट में सैकड़ों लाश मिलने से हड़कम्प मचा, जलस्तर कम होने से लाशें सामने आई, ग्रामीणों को दिल दहल गया

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KANPUR :

इसे इत्तेफाक कहेंगे या साजिश अथवा कुछ और कि मकर संक्राति के एक दिन पहले आस्था की प्रतीक गंगा में लाशों का अंबार लग गया. जिससे श्रद्धालुओं को गहरा सदमा लगा है. कानपुर से जुड़े परियर घाट पर मंगलवार को अचानक सैकड़ों लाश आने से हड़कम्प मच गया. कुछ ही देर में ये खबर जंगल में आग की तरह फैल गई. ग्रामीण से लेकर गंगा प्रहरी घाट पहुंचे तो वहां पर लाशों का ढेर देख उनके होश उड़ गए. उनकी निगाह जहां भी जा रही थी वहां पानी में लाश उतरा रही थी. कुछ लाशों को तो कुत्ते समेत अन्य जानवर निवाला बना रहे थे. शायद ही मां गंगा में इतना वीभत्स नजारा पहले किसी ने देखा होगा. सूचना पर तत्परता दिखाते हुए आईजी जोन कानपुर ने मौके पर जाकर पड़ताल की और प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दी. अब सवाल है कि आखिर इतनी लाशें कहां से आई? इस बारे में उन्नाव जिला प्रशासन के अधिकारी अभी कुछ बोलने से कतरा रहे हैं.

जलस्तर कम होने पर लाशों का सच सामने आया

शहर के बिठूर इलाके से सटे परियर घाट पर चार दिन पहले पानी रोका गया. गंगा का जलस्तर कम होने पर लाश सामने आई तो पहले तो लोगों ने समझा कि किसी ने लाश प्रवाहित किया है, लेकिन जब जलस्तर और कम हुआ तो लाशों का अंबार लगता चला गया. मंगलवार की सुबह तो सैकड़ों लाशें एकत्र हो गई. जिसे देख ग्रामीणों के होश उड़ गए. इस खबर के फैलते ही प्रधान समेत ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उनके भी पैरों तले जमीन खिसक गई. कुछ ग्रामीणों ने पुलिस तो कुछ ने प्रशासन के आला अधिकारियों को सूचना दी

लाशों की संख्या कम करने की कोशिश में जुट गए

परियर घाट में सैकड़ों लाश मिलने से प्रशासन से लेकर शासन तक हिल गया. आनन फानन में पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारी मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुट गए. इसके लिए अधिकारी लाशों की संख्या कम करने में जुट गए. इस बाबत हर अधिकारी का बयान अलग है. आईजी जोन आशुतोष पाण्डेय ने ब्0 से भ्0 लाश होने की संभावना जताई है. डीएम उन्नाव सौम्या अग्रवाल का कहना है कि अभी लाशें बाहर निकाली जा रही है. कितनी लाशें है अभी ये पता नहीं चल सका है. वहीं, आईजी लॉ एण्ड आर्डर का कहना है कि ख्0 से ख्भ् लाश मिली है. हालांकि हकीकत कुछ और है. आई नेक्स्ट की टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल कर ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने अधिकारियों के बयान की पोल खोल दी. उनके मुताबिक घाट पर ढाई सौ से ज्यादा लाशें है. जिसे आला अधिकारी छुपा रहे है.

यहां से संगम और बनारस पहुंचती है गंगा

परियर घाट पर गंगा गंगोत्री से हरिद्वार के रास्ते पहुंचती है. यहां से गंगा फतेहपुर होते हुए संगम नगरी इलाहाबाद और वहां से बनारस पहुंचती है. ऐसे में परियर घाट से पानी के साथ लाशें भी बहते हुए इलाहाबाद और बनारस पहुंच रही है. सवाल है कि आखिर परियर घाट पर इतनी लाशें कैसे पहुंची.

गंगा से लाशों को हटाने के लिए अनशन पर बैठे गंगा प्रहरी

गंगा में लाशों का सच का पता चलते ही गंगा प्रहरी रामजी त्रिपाठी परियर घाट पहुंच गए. वो घाट के किनारे पहुंचे तो वहां पर सैकड़ों लाशों को देख उनका दिल दहल गया. उन्होंने भी उन्नाव के आला अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें बहाना बनाकर टहला दिया. जिससे क्षुब्ध रामजी त्रिपाठी अनशन पर बैठ गए. उन्होंने गंगा से सभी लाशों को हटाकर उनका भूमि विसर्जन की मांग की. उन्होंने कहा कि वो तभी अनशन खत्म करेंगे, जब परियर घाट से सभी लाशें हटा दी जाए. उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि वे इस बारे में प्रशासन को पहले ही अवगत करा चुके है, लेकिन प्रशासन की हीलाहवाली से लाशों का ढेर जमा हो गया. प्रशासन ने न तो लोगों को गंगा में लाश प्रवाहित करने से रोका और न ही उन पुलिस वालों पर कार्रवाई की, जो लावारिश लाशों को गंगा में फेंक देते है. उन्होंने कहा कि गंगा आस्था का प्रतीक है. इसे हिन्दू धर्म में मां की संज्ञा दी गई है. ऐसे में गंगा में लाशें बहने से आस्था को चोट पहुंच रही है. इसके दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. साथ ही तत्काल गंगा से लाशों को हटाकर इसकी सफाई कराई जाए.

पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को लगा झटका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में गंगा को साफ करना मुख्य है. इसके लिए उन्होंने सत्ता संभालते ही एक अलग मंत्रालय बनाया है. जिसकी जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री उमा भारती को सौंपने के साथ करोड़ों का बजट पास किया गया है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती यहां पर स्टीमर से गंगा सफाई की रियल्टी चेक और अधिकारियों के साथ बैठक कर चुकी है. पीएम मोदी ने बनारस लोकसभा सीट को भी इसीलिए चुना था कि वहां गंगा है. उन्होंने बनारस में अपने पहले भाषण में भी कहा था कि मै न यहां आया हूं और न लाया गया हूं. मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है. आई नेक्स्ट की टीम ने परियर घाट में पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा सफाई की पोल खोल दी.

लावारिश लाश और प्रवाहित शव है

परियर घाट में मिली लाशों में कुछ तो कफन से लिपटी है तो कुछ सील और कुछ बिना कपड़े की थी. जिससे साफ है कि इसमें कुछ लाशें तो लावारिश है. जिन्हें पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद गंगा में फेंक दिया. जिन लाशों में कफन मिला है. उन लाशों को गंगा में प्रवाहित किया गया है. जिन लाशों में कपड़ा तक नहीं मिला है. उसके बारे में अभी कुछ कहां नहीं जा सकता. पुलिस का मानना है कि जिनके पास खाने के लिए रुपए नहीं होते है. वे मृतक का अन्तिम संस्कार के बजाय शव को गंगा में प्रवाहित कर देते है. जिससे लाशों का ढेर लग गया. ये लाश गंगा में बहकर आगे निकल जाती है, लेकिन जलस्तर कम होने से लाशें सामने आ गई.

पांच हजार में होता है अिन्तम संस्कार

आई आशुतोष पाण्डेय ने परियर घाट पर पहुंचकर ग्रामीणों से बात की. उन्होंने प्रधान से पूछा कि एक शव के अन्तिम संस्कार में कितना रुपए खर्च होता है, तो प्रधान ने बताया कि कम से कम भ् हजार रुपए. प्रधान ने बताया कि एक शव को जलाने में कम से कम पांच मन लकड़ी लगती है. इसके अलावा अन्तिम संस्कार में घी समेत अन्य सामान लगता है. जिसे खरीदने में करीब पांच हजार रुपए का खर्चा आता है.

इस घाट के पास हम लोग रोज गुजरते है. हम लोगों की जमीन भी घाट के किनारे है. जिस पर हम खेती करते है. हम लोगों को रोज लाशों की बदबू सहनी पड़ती है. ग्रामीणों ने पुलिस से लेकर प्रशासन के आला अधिकारियों को जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

पुष्पेंद्र

परियर घाट पर सैकड़ों लाशें पड़ी है. जिन्हें कुत्ते, चील समेत अन्य जानवर अपना निवाला बना रहे है. इस एरिया के आसपास इतनी बदबू फैल गई है कि लोगों का जीना दुश्वार हो गया. इस बारे में ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई.

सुन्दर लाल

चार दिन पहले पानी रोके जाने पर लाशों का सच सामने आया. इसमें सैकड़ों लाश है. जिसमें ज्यादातर लाशें सड़ चुकी है. उन्हें कुत्ते समेत अन्य जानवर खा रहे है. इससे गंगा भी प्रदूषित हो रही है. इस बारे में सभी अधिकारियों को मालूम है, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की.

रमेश कुमार

मुझे तो अभी पता चला कि घाट पर लाशों का अम्बार लगा है. मैं ग्रामीणों के साथ घाट पर पहुंचा तो सच्चाई सामने आ गई. यहां सैकड़ों लाशें पड़ी है. मैने पहले कभी इतना वीभत्स नजारा पहले नहीं देखा. यहां इतनी बदबू है कि कोई एक मिनट भी नहीं रुक सकता.

श्याम सुन्दर