- हाई कोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह में मांगा जवाब

NAINITAL: हाई कोर्ट ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज व हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में बांड व्यवस्था खत्म कर फीस निर्धारण करने संबंधी शासनादेश को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की. इसमें सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

स्टूडेंट्स के साथ किया भेदभाव

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में देहरादून निवासी प्राची भट्ट व अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई. जिसमें इसी साल 29 के शासनादेश को चुनौती देते हुए कहा कि इस जीओ के तहत हल्द्वानी व दून मेडिकल कॉलेज में बांड व्यवस्था खत्म कर साढ़े चार लाख फीस निर्धारित कर दी है. याचिका में कहा गया है कि वीरचंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में ऐच्छिक आधार पर बांड की व्यवस्था कर शुल्क 50 हजार निर्धारित किया है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार उत्तराखंड के मूल निवासियों व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए दून मेडिकल कॉलेज व हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में बांड व्यवस्था खत्म करना भेदभावपूर्ण है. राज्य के छात्रों के साथ भेदभाव किया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार उत्तराखंड सरकार द्वारा इस तथ्य का संज्ञान नहीं लिया कि भारत के अन्य राज्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों मे बहुत कम फीस है. राज्य में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शुल्क निर्धारण की कोई नियामक संस्था नहीं है, जिस कारण मनमाने तरीके से शासनादेश जारी किए जा रहे हैं. एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए.