अखाड़ा भवन ध्वस्तीकरण मामला

कोर्ट मांगा जवाब, क्यों न चले गुमराह करने पर आपराधिक केस

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर अविनाश सिंह व मट्ठीगंज थाना इंचार्ज ऋषि कान्त राय को कारण बताओ नोटिस जारी की है.कोर्ट ने पूछा है कि उनके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत कोर्ट झूठे तथ्य व पत्र लिखकर भ्रमित करने के लिए मुकदमा चलाया जाय.

मांगी विवेचना की प्रगति रिपोर्ट

कोर्ट ने मित्रा प्रकाशन के माया प्रेस की अखाड़ा भवन के ध्वस्तीकरण व कराड़ों की चोरी की दर्ज प्राथमिकी की विवेचना की प्रगति रिपोर्ट मांगी है. ताकि कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंच सके कि किसी बाहरी एजेन्सी या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराया जाना जरूरी है या नहीं. कोर्ट ने पुलिस के विवेचना तरीके से असंतोष व्यक्त किया है और महाधिवक्ता द्वारा कोर्ट के क्षेत्राधिकार पर उठाये गये सवालों को अस्वीकार कर दिया है. मामले की सुनवाई 16 नवम्बर को होगी.

हाई कोर्ट ने सौंपा है आफिशियल लिक्वीडेटर को

यह आदेश जस्टिस अंजनी कुमार मिश्र ने कोट्स आफ इंडिया लि. की कम्पनी याचिका पर दिया है. मालूम हो कि नया उदासीन पंचायती अखाड़ा का भवन माया प्रेस के कब्जे में था. मित्र प्रकाशन कम्पनी का समापन कर दिया गया. कंपनी की सारी सम्पत्ति का समापन कर दिया गया. कंपनी की सारी सम्पत्ति को हाईकोर्ट ने अपने आधिपत्य में लेकर आफिशियल लिक्वीडेटर को सौंप दी. इसी बीच अखाड़ा के सचिव ने मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी को जर्जर भवन को ध्वस्त कराने का पत्र लिखा. मुख्यमंत्री कार्यालय ने नगरआयुक्त को अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया.

राजनैतिक दबाव में हुआ काम

राजनैतिक दबाव के चलते नगर आयुक्त ने कोर्ट की अभिरक्षा में स्थित भवन को बिना अनुमति लिए ध्वस्त करने का आदेश दिया कोर्ट की सख्ती पर कोर्ट को बताया कि उन्होंने आदेश वापस ले लिया है और उनके अधिकारी ध्वस्तीकरण में शामिल नहीं थे. किन्तु गिरफ्तार दो लोगों के बयान व मौके की सीडी से झूठ पकड़ा गया. निगम के अधिकारी मौके पर मौजूद थे. थाना इंचार्ज ने कहा कि गिरफ्तार दोनों लोगों की रिमाण्ड अर्जी के साथ कोर्ट के आदेश को मजिस्ट्रेट को दिया था. इसे मजिस्ट्रेट ने गलत बताया. कोर्ट को झूठी जानकारी देने पर कोर्ट ने सख्तरुख अपनाया है.