दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम ने शहर के यूथ से बात की जो कविता पाठ कर लोगों को कर रहे अवेयर

-हिन्दी के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं यूथ, दूसरे शहरों में जाकर करते हैं काव्य पाठ

-मॉडर्न होने के चक्कर में लोग भूल रहे हिन्दी, बोले-हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं है देश की पहचान है

बरेली: लाइफ को मॉर्डन करने के चक्कर जहां लोग हिन्दी को भूलकर इंग्लिश पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं तो वहीं शहर के कुछ यूथ ऐसे भी हैं जिनके लिए हिन्दी ही सबकुछ है. वे अपने दिलों में हिन्दी को बसा कर न सिर्फ अपना करियर बना रहे हैं बल्कि लोगों को भी अवेयर कर रहे. उनका कहना है कि जिस प्रकार एक मां के साथ हमारा लगाव होता है, ठीक उसी तरह हिन्दी से भी होना चाहिए. बताया कि जिसे देश से प्यार है वह हिन्दी से इंकार कर ही नहीं सकता.

कवि बन गई शिवांगी

हम हिन्दुस्तानी हिन्दी को जुबां पर नहीं दिल में रखते हैं, तभी सोशल साइट पर अंग्रेजी के अक्षरों में हिन्दी शब्द लिखते हैं. यह कहना हैं शिवांगी कौशिक का. आरयू में लॉ से पीएचडी कर रही शिवांगी कौशिक 'व्यथित' को बचपन से ही कविता पाठ का शौक है. ग्रेजुएशन के साथ उन्होंने कविता पाठ शुरू किया. वह शहर के साथ ही आगरा, दिल्ली और गाजियाबाद में काव्य पाठ कर चुकी हैं. शिवांगी का कहना है कि समाज की समस्याओं को कविता के जरिए ही उठाया जा सकता है. यह एक ऐसा मंच है जहां लोग मन से सुनते हैं और याद भी रखते हैं. साथ ही वह समाज सेवा से भी जुड़ी हैं.

कविता से कर रहीं अवेयर

प्रतिभा को कभी छिपाना नहीं चाहिए, हमेशा आगे बढ़कर बताना चाहिए. यह कहना है शिल्पी सक्सेना का. शिल्पी यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं. उनके पिता राकेश चन्द्र सक्सेना को लिखने का शौक था. उनकी खामोशियां नाम से एक बुक भी पब्लिश हुई है. उन्हीं से इंस्पायर होकर शिल्पी ने भी सोशल साइट पर लिखना शुरू किया. लोगों की तारीफ मिली तो कविताएं लिखना भी शुरू कर दिया. शिल्पी तीन सालों से कविता पाठ कर रही हैं. अभी तक वह रामपुर, गोंडा, फतेहगंज और गाजियाबाद आदि शहरों में जाकर कविता पाठ कर चुकी हैं.

लिखा तो देखा बन गई कविता

पहले कॉपी पर लिखा, शब्दों को पढ़ा तो पाया वह कविता का रूप ले चुके थे. कुछ इसी तरह से कहानी दीक्षा महेश्वरी की है. दीक्षा को शुरू से ही हिन्दी में आगे कुछ करना चाहती थीं. तभी उन्हें कविताएं लिखने का शौक लगा. पहली कविता लिखी जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. जिसके बाद कवियत्री बनने का मन बना लिया. आज वह इस समय दीक्षा बीएड की छात्रा हैं लेकिन इसके बाद भी कविताएं लिखती हैं. अभी तक वह हिन्दी में 100 से ज्यादा कविताएं लिख चुकी हैं.