सरकारी इंग्लिश मीडियम में नहीं पहुंचीं किताबें

फिलहाल हिंदी की किताबों से पढ़ रहे बच्चे

Meerut . कॉन्वेंट स्कूलों की बराबरी करने के लिए खोले गए इंग्लिश मीडियम सरकारी स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर व किताबें न होने के चलते धड़ाम होते नजर आ रहे हैं. अंग्रेजी माध्यम का सपना लेकर इन स्कूलों में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स इंग्लिश की बजाय हिंदी माध्यम की पढ़ाई करने पर मजबूर हो गए हैं. वजह सेशन शुरु होने के तीन महीने बाद भी स्कूलों में किताब-कापियां नहीं पहुंच सकी हैं. यहां बच्चे फटी-पुरानी किताबों से ही काम चला रहे हैं. बीएसए डॉ. सतेंद्र सिंह ढाका ने बताया कि किताबें आनी शुरु हो गई हैं. हिंदी माध्यम की किताबों का वितरण चल रहा है जबकि आदर्श स्कूलों में जल्द ही किताबें वितरित होगी.

सिलेबस की नहीं जानकारी

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को कॉन्वेंट की फील देने के लिए शासन इस साल से सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की स्थापना की थी. इसके तहत हर ब्लाक में 5 स्कूल खोले गए हैं. मेरठ के 12 ब्लाक में लगभग 65 सरकारी स्कूलों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में कंवर्ट किया गया हैं. स्थिति यह है कि किताबों न मिलने से यहां टीचर्स को सिलेबस तक की जानकारी नहीं हैं. ऐसे में टीचर्स भी बच्चों को पुरानी हिंदी माध्यम की किताबों से पढ़ाकर खानापूर्ति कर रहे हैं.

जुगाड़ की किताबें

गौरतलब है कि इन स्कूलों में सीबीएसई की तर्ज पर पढ़ाई होनी थी. लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर व किताबें न होने की वजह से टीचर्स बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं. पैटर्न बदलने की वजह से टीचर्स छोटे बच्चों को जहां चार्ट से फल-फूल, पक्षियों- पशु आदि के नाम रटवा रहे हैं वहीं कक्षा 2 से पांचवीं तक के बच्चों को पुरानी किताबों से रीडिंग भर करा दी जा रही है.

यह है स्थिति

जिले के 12 ब्लॉक में पांच-पांच स्कूल के हिसाब से 60 स्कूल खोले गए हैं, जबकि बेसिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर पांच और स्कूल अतिरिक्त खोले गए हैं. कुल मिलाकर 65 स्कूलों में विभाग को 5-5 टीचर्स यहां तैनात किए गए हैं. इन स्कूलों में 325 इंग्लिश माध्यम में पढ़ा सकने वाले टीचर्स की नियुक्ति किया गया है. गांव के स्कूलों में सरकारी स्कूलों में कम होती बच्चों की संख्या और प्राइवेट के प्रति बढते क्रेज को देखते हुए इन स्कूलों को शुरु किया गया है.

Posted By: Inextlive