पं राजीव शर्मा (ज्योतिषाचार्य)। होलिका दहन से पूर्व नवग्रह की लकड़ियां एकत्रित करके होली की परिक्रमा करते हुए क्रमानुसार उन्हें होलिका में डाल देना चाहिए।परिक्रमा करते समय संबंधित ग्रह का मंत्र जाप भी करते रहना चाहिए।इस प्रकार सभी ग्रह की लकड़ियों को होलिका में डाल देना चाहिए।

1. सूर्य ग्रह की शांति के लिए:- इसके लिए प्रथम परिक्रमा करते हुए मदार की लकड़ी लेकर सूर्य के निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रों सः सूर्याय नमः।

2. चंद्र ग्रह की शांति के लिए:- दूसरी परिक्रमा करते हुए पलाश की लकड़ी लेकर चंद्र मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ श्रां श्रीं श्रो सः चंद्राय नमः।

3. मंगल ग्रह की शांति के लिए:- तीसरी परिक्रमा करते हुए खैर की लकड़ी लेकर निम्न मंत्र का जाप करें।
ॐ क्रां क्रीं क्रों सः भौमाय नमः।

4. बुध ग्रह की शांति के लिए:- चतुर्थ परिक्रमा करते हुए अपामार्ग की लकड़ी लेकर निम्न मंत्र का जाप करें।
ॐ ब्रां ब्री ब्रौ सः बुधाय नमः।

5. गुरुग्रह की शान्ति के लिए:- पंचम परिक्रमा करते हुए पीपल की लकड़ी लेकर निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ ग्रा ग्री ग्रो सः गुरवे नमः।

6. शुक्र ग्रह की शान्ति के लिए:- षष्ठ परिक्रमा करते हुए गूलर की लकड़ी लेकर निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
*ॐ द्रा दीर्र्म द्रो सः शुक्राय नमः।

7. शनि ग्रह की शांति के लिए:- सप्तम परिक्रमा करते हुए शमी की लकड़ी लेकर निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।

8. राहु ग्रह की शान्ति के लिए:- अष्टम परिक्रमा करते हुए दूर्वा लेते हुए निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ भ्रा भृं भ्रू सः राहवे नमः।

9. केतू ग्रह की शांति के लिए:- नवम परिक्रमा करते हुए कुशा की लकड़ी लेकर निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ स्त्रां स्त्री स्त्रो सः केतवे नमः।

विशेष:- जिन नवजात शिशुओं की पहली होली होती है उन बच्चों की ढूंढ पूजा अवश्य कराएं।