-बीएचयू सहित कबीरचौरा के मेंटल ओपीडी में बढ़ी रही है पुलिसकर्मियों की संख्या,

-अनिद्रा से लेकर अवसाद से ग्रस्त हो रहे पुलिसकर्मी

-काम के बोझ और सीनियर की बेरूखी से बढ़ रहा तनाव

जिस खाकी के भरोसे आप रात में चैन की नींद सोते है उसकी ही नींद उड़ गई है. भूख नहीं लग रहा, चिड़चिड़ापन बढ़ता जा रहा है. मन भारी रहता है. अच्छी नींद के लिए दवा खाने को मजबूर हो रहे हैं. यह हम नहीं कर रहे हैं बल्कि शहर के अस्पतालों के आंकड़ें बता रहे हैं कि पुलिसकर्मियों में तनाव की समस्या बढ़ती जा रही है. विभागीय अधिकारियों की डांट-फटकार और वीवीआईपी मूवमेंट वाले बनारस में छुट्टियों के नाम पर उलाहना सुनने से अजीज आ चुके पुलिसकर्मी अब मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं. बीएचयू के मेंटल ओपीडी से लेकर मंडलीय हॉस्पिटल कबीरचौरा के मेंटल क्लीनिक में पुलिसकर्मियों की संख्याएं बढ़ती जा रही है. प्राइवेट क्लीनिक चलाने वाले मनोचिकित्सकों के पास भी पहुंचने वालों की संख्या अच्छी खासी है.

अनिद्रा के शिकार

बीएचयू मेंटल ओपीडी में पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों में अधिकतर अनिद्रा की शिकायत करते हैं. यहां रोजाना यदि पांच सौ मरीजों को देखा जा रहा है तो उसमें लगभग सौ मरीज पुलिसकर्मी हैं. जिनकी काउंसलिंग करने के साथ ही दवाएं दी जा रही हैं कमोबेश यही हाल मंडलीय हॉस्पिटल कबीरचौरा में चलने वाली मेंटल क्लीनिक की बताई जा रही है. चिकित्सक और काउंसलर खुद भौंचक हैं कि पुलिसकर्मियों में अनिद्रा की शिकायतें सबसे अधिक है.

लगातार काम से हाईडिप्रेशन

साइकियेट्रिक और काउंसलर्स से मिलकर अपनी परेशानियां बताने वाले पुलिसकर्मियों में अधिकतर न्यू ऐज के है. जिन्हें सबसे अधिक टेंशन छुट्टी नहीं मिलने, पीएम का ससंदीय क्षेत्र होने के चलते बनारस में काम का भारी दबाव और बैरक की रहन-सहन व्यवस्था में भी आ रही दिक्कतें हैं जो उन्हें चिड़चिड़ा बनाकर रही हैं.

स्ट्रेस बना रहा नशेड़ी

अत्यधिक काम के दबाव में पुलिसकर्मी बात-बात में झुंझलाना और चिड़चिड़ापन दिखाते है. जब नींद पूरी नहीं ले पाते है तो तनाव से बचने के लिए एल्कोहल का सेवन करने लगते हैं. जिसके सेवन से उन्हें कुछ घंटे के लिए राहत जरूर मिलती है लेकिन यह सिलसिला लंबे समय तक जारी रखने से नशे के आदि बन जा रहे हैं. रात में गश्त करने से लेकर ड्यूटी देने तक में अधिकतर पुलिसकर्मी तंबाकू के सहारे रहते हैं.

बनारस में अत्यधिक दबाव

पीएम का शहर होने के चलते बनारस में अत्यधिक वीवीआईपी मूवमेंट रहता है. हर महीने सीएम का आगमन तो हर दूसरे महीने पीएम का दौरा से लेकर अन्य केंद्रीय मंत्रियों का आवागमन बराबर ही रहता है. रही सही कसर त्योहार और बवाल पूरी कर देता है. पुलिसकर्मियों को छुट्टियों के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. छुट्टी पाने के लिए एसएसपी से अधिकारियों के पास चक्कर लगाने के बावजूद भी छुट्टी नहीं मिलती. जिससे पुलिसकर्मियों में स्ट्रेस की शिकायत बढ़ जाती है. इसमें यदि परिवारिक का तनाव भी शामिल हो जाए तो उनकी परेशानी बहुत बढ़ जाती है. आवेश में कुछ न कुछ गलत कदम भी उठा सकते हैं.

कराया गया था तनावमुक्त सेमिनार

पुलिसकर्मियों को तनावमुक्त रखने के लिए पुलिस विभाग ने पहल भी की है. मई माह में बीएचयू के सीनियर साइकियेट्रिक डॉ. संजय गुप्ता ने पुलिसलाइन में पुलिसकर्मियों को तनाव, अनिद्रा व अवसाद से बचने के लिए कारगर टिप्स बताए थे. टै्रफिक एसपी सुरेशचंद्र रावत की पहल पर सेमिनार में सैकड़ों पुलिसकर्मी उपस्थित हुए थे.

पहले ज्वाइंट फैमिली हुआ करती थी, पति यदि बाहर रह रहा हो और पत्‍‌नी घर पर, पत्नी को कोई प्रॉब्लम हा तो परिवार वाले संभाल लेते थे. अब न्यूक्लियर फैमिली हो गई है. जिसके घर में सिर्फ पत्‍‌नी और बच्चे है, किसी को कुछ हो गया तो फिर बाहर रह रहे पति को टेंशन में आना स्वभाविक है. यही वजह है कि काम के दबाव और परिवारिक मैटर में पुलिसकर्मियों को जब जरूरत पर छुट्टी नहीं मिलती है तो वह गलत कदम उठा लेते हैं.

डॉ. संजय गुप्ता, सीनियर साइकियेट्रिक

बीएचयू

समझने की जरूरत है कि काम का दबाव पुलिसकर्मियों पर सबसे अधिक होता है. दिन-रात काम का प्रेशर झेल रहे पुलिसकर्मियों के घर-परिवार में कुछ कार्यकम पड़ने पर छु़ट्टियां नहीं मिलने से तुरंत दबाव में आ जा रहे है. इसी टेंशन में एल्कोहल का सेवन और देर तक जागने से उनकी मनोदशा पर प्रभाव पड़ रहा है. अनिद्रा व अवसाद में आकर गलत कदम उठा लेते है. कम से कम छह-सात घंटे की नींद तो लेनी चाहिए.

डॉ. रविंद्र यादव, साइकेट्रिक

मंडलीय हॉस्पिटल कबीरचौरा

40 से 50

की संख्या में डेली बीएचयू के मेंटल ओपीडी में पहुंच रहे है पुलिसकर्मी

20-30

की संख्या में रोजाना मंडलीय हॉस्पिटल के मेंटल क्लीनिक में पहुंच रहे है पुलिसकर्मी

20

परसेंट यंग ऐज के पुलिसकर्मी है

20

परसेंट मिडिल ऐज के पुलिसकर्मी है