कानपुर। आईसीसी क्रिकेट वर्ल्डकप 2019 का फाइनल मुकाबला रविवार को इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड के बीच लाॅर्ड्स में खेला गया। इस मैच में इंग्लैंड को सुपर ओवर के जरिए जीत मिली। 50-50 ओवर टाई रहने के बाद सुपर ओवर के जरिए मैच का परिणाम निकाला गया मगर जब ये भी टाई रहा तो इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया गया। आईसीसी के नियम के मुताबिक, सुपर ओवर टाई रहने की स्थिति में उस टीम को विजेता घोषित किया जाता है जिसने सबसे ज्यादा बाउंड्री लगाई हों। ऐसे में इंग्लैंड को विश्व चैंपियन बना दिया गया।

कब खेला जाता है सुपर ओवर

सुपर ओवर की शुरुआत टी-20 क्रिकेट में हुई थी। जब कोई मैच टाई हो जाता है तो सुपर ओवर के जरिए जीत-हार का फैसला होता है। इसमें दोनों टीमों को एक-एक ओवर खेलने को मिलता है, आखिर में जो टीम ज्यादा रन बना लेती है उसे विजेता घोषित कर दिया जाता। वर्ल्डकप में पहली बार इस नियम के जरिए जीत-हार का फैसला किया गया है। दरअसल आईसीसी ने वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सुपर ओवर की मान्यता दी है मगर ये नियम सिर्फ सेमी-फाइनल और फाइनल में लागू किया जाता है।

पहली बार कब हुआ इस्तेमाल
टी-20 क्रिकेट में पहली बार सुपर ओवर का इस्तेमाल 2008 में किया गया था। तब बोल आउट नियम को खत्म करके सुपर ओवर बनाया गया था। करीब तीन सालों तक ये नियम टी-20 क्रिकेट में ही यूज होता था मगर वनडे में पहली बार 2011 विश्वकप में इस नियम को मान्यता दी गई। हालांकि ये रूल सिर्फ नाॅकआउट स्टेज के लिए था मगर किसी मैच में इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया। वहीं 2015 वर्ल्डकप में भी दर्शकों को ये नियम देखने को नहीं मिला। मगर इस बार इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड फाइनल मैच में सुपर ओवर ने खेल का रोमांच दोगुना कर दिया।


सुपर ओवर के ये हैं नियम

- इसमें दोनों टीमों को 1-1 ओवर बैटिंग करने को दिया जाता है
- दूसरी इनिंग में बैटिंग करने वाली टीम को सुपर ओवर में पहले बल्लेबाजी करने दिया जाता है
- इसमें गेंदबाजी टीम चुनती है कि वो किए छोर से गेंदबाजी करेंगे
- सुपर ओवर में अगर 2 विकेट गिर जाए तो इनिंग वहीं खत्म हो जाती है
- यदि सुपर ओवर भी टाई रहता है तो उस टीम को विजेता घोषित कर दिया जाता जिसने पूरे मैच में ज्यादा बाउंड्री लगाई हों।

 

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