- नोटबंदी के बाद से नहीं खुला एक भी नया एटीएम, बंद हुए 70 एटीएम, 16 हजार बढ़ी पीओएस मशीन की संख्या

- प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन के कम हिट वाले और एटीएम होंगे बंद, बैंकों पर खर्च कम करने को आरबीआई का चाबुक

- नौबस्ता, यशोदा नगर, किदवई नगर, बर्रा, गोविंद नगर समेत साउथ एरियॉज के दर्जनों एटीएम बंद

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KANPUR:

नोटबंदी के दो साल बाद आपके और हमारे ट्रांजेक्शन करने के तरीके में काफी बदलाव आया है. एक तरफ जहां एनपीए के बोझ तले दबे बैंकों ने इस दौर में अपने एटीएम बंद करना शुरू कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर कस्टमर्स को प्रॉब्लम न हो इसके लिए प्वाइंट ऑफ सेल मशीनों की संख्या में तेजी से इजाफा किया है. आरबीआई के निर्देश के बाद प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन लेने वाले 16 बैंकों ने पिछले फाइनेंशियल ईयर से अभी तक कानपुर शहर में ही 70 ऑफ साइट एटीएम बंद कर दिए हैं. ये वह एटीएम हैं, जहां पर ट्रांजेक्शंस काफी कम और बैंकों का खर्च ज्यादा हो रहा है. कानपुर कॉलिंग पर आई शिकायतों के बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने कानपुर साउथ के दर्जनों एटीएम का रियलिटी चेक किया. ज्यादातर बंद मिले? आखिर क्यों नौबस्ता, यशोदा नगर, किदवई नगर, बर्रा, गोविंद नगर समेत साउथ एरियॉज के दर्जनों एटीएम बंद हो गए? क्या कैशलेस ट्रांजेक्शन है इसकी वजह? जानने के लिए पढि़ए ये खबर.

धड़ाधड़ बंद हुए एटीएम

पिछले दिनो एसबीआई ने अपने डेबिट कार्ड धारकों से एक दिन में एटीएम से रुपए निकालने की लिमिट को घटा दिया, लेकिन इससे पहले एसबीआई शहर में अपने कई एटीएम बंद कर चुका है. एसबीआई के अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, देना बैंक, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक भी इसमें शामिल हैं. इन बैंकों ने भी अपने कई ऑफ साइट एटीएम बंद कर दिए हैं. यह वो एटीएम हैं, जहां पर प्रतिदिन औसत 200 हिट्स से कम ट्रांजेक्शन हो रहे हैं.

बैंकों में बढ़े तो बाहर घटे एटीएम

एक तरफ जहां पब्लिक सेक्टर व प्राइवेट बैंकों ने अपने ऑफ साइट एटीएम मशीनों में कटौती की है, वहीं जनवरी 2018 से अगस्त 2018 के बीच ऑन साइट यानी बैंकों में ही लगने वाली एटीएम मशीनों की संख्या को बढ़ाया है. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में जहां ऑनसाइट एटीएम की संख्या जनवरी 2018 में 1,07,659 थी वह अगस्त 2018 में बढ़ कर 1,07914 हो गई. यानी 255 एटीएम मशीनों का इजाफा हुआ. वहीं इसी अवधि में ऑफसाइट एटीएम की संख्या 99,080 से घट कर 97,751 हो गई यानी 1329 ऑफ साइट एटीएम बंद हो गए.

16 हजार बढ़ी पीओएस मशीनें

पूर्व बैंक अधिकारी बीके पांडेय ने बताया कि एक तरफ जहां बैंकों ने अपने खर्च कम करने के लिए एटीएम बंद किए. वहीं ऑनलाइन बैंकिंग में कमी न हो, इसके लिए प्वाइंट ऑफ सेल मशीनों की संख्या भी बढ़ाई. पिछले वित्तीय वर्ष से अगस्त 2018 के बीच कानपुर में ही पीओएस मशीनों की संख्या 37000 से बढ़ कर 53000 हो गई.

कैश के साथ डिजिटल बैंकिंग बढ़ी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कानपुर रीजन की ही बात करें तो नोटबंदी के बाद से डिजिटल बैंकिंग में तेजी से इजाफा हुआ. इसे बढ़ाने के लिए एक तरफ पीओएस मशीनों की संख्या बढ़ाई गई. इसके अलावा कई दूसरे विकल्प भी कस्टमर्स को दिए गए. जिसके चलते डिजिटल बैंकिंग में 300 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई. हालांकि नोटबंदी के कुछ समय तक कैश ट्रांजेक्शन कम हुए थे, लेकिन जब कैश की समस्या खत्म हुई और नए नए नोट जारी किए गए इस दौरान कैश ट्रांजक्शन 26 फीसदी तबढ़ गया.

फैक्ट फाइल-

- 1329 ऑफ साइट एटीएम बंद हुए जनवरी 2018 से अगस्त 2018 के बीच

- 70 एटीएम कानपुर में बंद हुए अप्रैल 2017 से अगस्त 2018 तक

- एसबीआई, बीओबी, पीएनबी, देना बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक और यूनियन बैंक के सबसे ज्यादा एटीएम हुए बंद

- 53 हजार प्वाइंट ऑफ सेल मशीनें कानपुर में

-50 पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट और ग्रामीण बैंक कानपुर में

- 770 बैंकों की शाखाएं कानपुर नगर में

- 1400 एटीएम सभी बैंकों के कानपुर में

- 50 करोड़ रुपए की रोज की कैश की निकासी एटीएम के जरिए

- 40 लाख एटीएम कार्ड धारक कानपुर नगर में

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एटीएम की इकोनामी इस तरह समझें

- 40 से 50 हजार रुपए एक ऑफसाइट एटीएम के संचालन का खर्च प्रति महीने

- किराए के अलावा कैश लॉजिस्टिक्स की सप्लाई में बड़ा खर्च

- एटीएम मशीन की कीमत 3 से 4 लाख रुपए, एक एटीएम का बिजली का खर्च 4 से 5 हजार रुपए प्रति महीना

- एक एटीएम में 20 से 30 लाख रुपए की करेंसी जिसका कोई रिटर्न नहीं

- दूसरे बैंकों के कार्ड होल्डर को फ्री ट्रांजेक्शन से कमाई का लॉस

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