आर्थिक आदान प्रदान बढ़ेगा आतंक घटेगा

मंगलवार को 500 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 329.18 खरब रुपये) के आर्थिक आदान-प्रदान को रफ्तार देने और क्षेत्रीय सुरक्षा के मकसद से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों सुषमा स्वराज और जॉन केरी ने पहली द्विपक्षीय रणनीतिक और व्यापारिक बातचीत का शुभारंभ किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खात्मे पर एक संयुक्त बयान जारी करते हुए माना कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों में फल-फूल रहे यह आतंकी संगठन बड़ा खतरा हैं। वैश्विक आतंकवाद का नया चेहरा बने आतंकी संगठन आइएस समेत अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ मोर्चेबंदी के लिए भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक नए आयाम पर पहुंचाने का फैसला किया है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय बातचीत के समापन पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि संयुक्त बयान में दोनों देशों के बीच आतंकी संगठन जैसे लश्कर ए तैयबा, हक्कानी नेटवर्क और दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी के प्रति एक समान रुख अख्तियार किया जाएगा। भारत और अमेरिका 27 जुलाई 2015 के गुरुदासपुर में हुए आतंकी हमले और उधमपुर में 5 अगस्त को हुए हमले की दोनों देश कड़ी आलोचना करते हैं।

चीन पर विचार रहा चर्चा के बाहर

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, ‘भारत और अमेरिका सहयोग बढ़ाने की राह पर हैं।’ उन्होंने कहा कि इस बातचीत में चीन का कोई जिक्र नहीं आया। दोनों देश एक साथ चीन के खिलाफ लामबंद होने को नहीं आए हैं। भारतीय पक्ष ने एनएसजी समेत चार प्रमुख बहुआयामी निर्यात नियंत्रण नियामकों की सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करने पर अमेरिका को धन्यवाद दिया। उल्लेखनीय है कि सुषमा स्वराज के साथ वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल भी अमेरिका दौरे पर हैं।

ओबामा इंतजार कर रहे हैं मोदी से मुलाकात का: केरी

वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री केरी ने बताया कि राष्ट्रपति ओबामा अगले हफ्ते न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर उत्साहित हैं। भारत के साथ अमेरिका 500 अरब डॉलर के आर्थिक लेन-देन का लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे अहम साझीदार और सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ जबरदस्त एजेंडे के साथ बातचीत हुई। उनकी सुषमा स्वराज के साथ आतंकवाद की रोकथाम, हिंद महासागर, समुद्री सीमा की सुरक्षा, दक्षिण चीन समुद्र, मौजूदा दक्षिण एशियाई चुनौतियों और वैश्विक आधार पर परमाणु अप्रसार व पर्यावरण परिवर्तन पर बहुत गहन चर्चा हुई।

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