मेरी कहानी
उस समय मेरी उम्र 25 साल थी। वह 70 के दशक का पुरुष प्रधान समाज था। मैं इंटरप्रेन्योमर बनने के सफर पर निकली एक महिला। जिसे अभी अपनी पहचान बनानी थी। विश्वयसनीयता साबित करनी थी। चुनौतियां मानो मेरा इंतजार कर रही थीं। बिजनेस के लिए पूंजी जुटाना पहाड़ साबित हुआ। कोई भी बैंक लोन देने को तैयार नहीं थी। वह एक महिला को लोन देने में हिचकिचा रहे थे। जहां भी दस्तैक दी निराशा हाथ लगी। कई ने लोन के लिए पिता को संरक्षक बनाने की बिन मांगी सलाह दे डाली। लोग मुझसे एक ही बात अलग-अलग तरीके से कह रहे थे। महिलाएं लेबर यूनियनों व वेंडरों को संभाल नहीं सकती हैं। वह पुरुष कर्मचारियों से काम कैसे लेंगी। कई लोगों ने मेरे साथ काम करने से मना कर दिया। सिर्फ इसलिए कि उन्हें लगा जिस स्टाकर्ट अप की कमान किसी महिला के हाथों में है उसमें नौकरी सुरक्षित नहीं रहेगी। इस सबके बीच निराश हुए बिना कामयाबी का ताना-बाना बुनने में लगी हुई थी। समय के साथ पहचान मिली। दुनिया को अपने आइडिया की कीमत समझाने में सफल रही। फिर अलग-अलग व्यसवसायों में कदम रखा।

बिजनेस में महिलाओं से जुड़े मिथक
इंटरप्रेन्योर कई सारी शुरुआती चुनौतियों से रूबरू होते हैं। स्पेष्टक बिजनेस मॉडल से लेकर निवेशकों की खोज, योग्यई लोगों को साथ जोड़ना और फिर बिजनेस को बढ़ाना। महिलाओं को इनके अलावा भी कई चुनौतियों का सामना करना होता है। सबसे बड़ी चुनौती बतौर इंटरप्रेन्यो र खुद को साबित करने का लगातार दबाव है। कहीं से यह मिथक गढ़ लिया गया है कि महिलाओं को बिजनेस की समझ नहीं होती है। जो बिजनेस के लिए पैसा जुटाना उनके लिए कठिन बनाती है। यह भी मिथक ही है कि महिलाओं में लीडरशिप क्वाललिटी नहीं होती है। जिसके चलते अच्छे प्रोफेशनल अकसर उन स्टार्ट अप्स से नहीं जुड़ते जिनकी कमान महिलाओं के हाथों में होती है।

सफलता-असफलता

मेरा मानना है कि अगर आपके पास विजन, योजना और खुद पर भरोसा है तो उस पर काम करना चाहिए। कभी न कभी सफलता जरूर मिलेगी। मेरा यह भी मानना है कि असफलता स्थाहई नहीं होती, और आपको वापस उठकर फिर से प्रयास करना होता है। आप असफल तभी होते हैं जब कोशिश करना छोड़ देते हैं।

रोल मॉडल

मुझे लगता है कि रोल मॉडल जरूरी होते हैं। एन आर नारायणमूर्ति मेरे रोल मॉडल रहे हैं। जब उन्होंगने इंफोसिस की शुरुआत की, किसी को भरोसा नहीं था कि सॉफ्टवेयर सर्विसेज में इतना बड़ा अवसर है या भारत में विकसित देशों को ऐसी विशिष्टन सेवाओं को प्रदान करने का कौशल मौजूद है। भारत की वैज्ञानिक व तकनीकी क्षमता को लेकर दुनिया भर में संदेह किया जाता था। इस पृष्ठयभूमि में नारायणमूर्ति ने उन मिथकों को गलत साबित कर इंफोसिस को खड़ा किया। जो आज बेहद विश्वासनीय, तकनीकी तौर पर अग्रणी व वर्ल्डख क्ला स कंपनी है। वह एक्सीमलेंस का ग्लोकबल ब्रांड बन गई है।

वुमेन इंटरप्रेन्योर्स के लिए सलाह

सफल होने के लिए आपको इनोवेटिव व लचीला होने के अलावा परिस्थि़तियों के मुताबिक ढलने को तैयार रहना होगा। अपने सफर के दौरान मैंने जो सीखा वह कुछ इस तरह है।

अपनी राह बनाओ : किसी ऐसे रास्ते पर चलने में डरना नहीं चाहिए जिस पर पहले किसी और ने कदम नहीं रखा है। यही वह चीज है जो लीडर को फॉलोवर से अलग करती है।

इनोवोशन पर फोकस : इनोवेटिव होने के ढेर सारे फायदे हैं। इतना ही नहीं यह बाकी लोगों के मुकाबले आपको दौड़ में आगे बनाए रखती है।

समय के साथ चलें : अगर आप समय के साथ अपने बिजनेस व विचारों में बदलाव के लिए तैयार नहीं हैं तो आप लंबी दूरी नहीं तय कर पाएंगी।

बुद्धिमत्ता पूण संतुलित रिस्क : ध्यान रखिए कई बार बड़ी सफलता पाने के लिए सोच समझकर रिस्क लेना पड़ता है।

निरंतर प्रयास : स्वयं पर विश्वास रखिए व लगातार कोशिश कीजिए। तभी निराशा व असफलता पर काबू पा सकेंगी जो इंटरप्रेन्योरर बनने के रास्तेब का ही हिस्साए हैं।
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इंडिया में वुमेन इंटरप्रेन्यो्र्स

यह सच है कि आबादी का 50 प्रतिशत होने के बावजूद इंडिया में वुमेन इंटरप्रेन्योजर्स की संख्या बेहद कम है। वुमेन इंटरप्रेन्योर्स पर ग्लोकबल इंटरप्रेन्योरशिप एंड डेवलपमेंट इंस्टीखट्यूट के सर्वे में 30 देशों में इंडिया का स्थांन 5वां है। कर्नाटक में एक अध्यलयन के नतीजों में सामने आया कि 90 प्रतिशत वुमेन इंटरप्रेन्योथर फंडिंग के लिए सेल्फन फाइनेंस पर निर्भर हैं। वहीं 68 प्रतिशत ने माना बैंक लोन पाना कठिन है। इंवेस्टर उन व्य वसायों में पैसा नहीं लगाना चाहते जिन्हें  महिलाएं चला रही हैं। इसीलिए भी वुमेन इंटरप्रेन्योर्स की संख्या कम है। बहरहाल हालात बदल रहे हैं। हाल ही में सेबी से प्रमाणित वुमेन इंटरप्रेन्यो्र्स पर केंद्रित भारत का पहला वेंचर फंड साहा शुरू हुआ है। जो महिलाओं हाथों शुरू व अधिक महिला कर्मचारियों वाले स्टार्ट अप्स के अलावा उन कंपनियों में भी निवेश कर रहा है जो महिलाओं व बच्चों  के लिए उत्पाद बनाती हैं।
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सरकार की भूमिका
सरकार की ओर से वुमेन इंटरप्रेन्यो्र्स को फाइनेंस, इंसेंटिव व सब्सिकडी के जरिए बढ़ावा देने की सकारात्म क पहल हुई है। भारत सरकार ने 2016 में 8000 करोड़ का फंड मंजूर किया है जो नए वेंचर्स को लोन के लिए गारंटी का काम करेगा। 'स्टैंड अप इंडिया' स्की म के तहत एससी, एसटी व वुमेन इंटरप्रेन्येर्स को कम दरों पर लोन की घोषणा की गई है। फिर भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। महिलाओं की इंटरप्रेन्योररियल एनर्जी का इस्ते माल करने के लिए इकोसिस्टकम विकसित करना जरूरी है। जो तभी संभव होगा जब बिजनेस करना आसान बने, कुशल लोग मिलें, बेहतर इंफांस्ट्र क्चीर व पूंजी तक सभी की पहुंच हो। ग्रामीण महिलाओं में भी सामुदायिक सोच के जरिए इंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने की जरूरत है। गांवों में स्वंयं सहायता समूहों को आवश्यपक ट्रेनिंग, पैसा व बाजार तक पहुंच मुहैया कराकर उन्हेंग भी इस सफर का हिस्साय बनाया जा सकता है।

परिचय: किरण मजूमदार शॉ

इंडिया में बायोटेक्नोमलॉजी इंडस्ट्री के विकास में किरण मजूमदार शॉ का अहम योगदान है। वह देश की शीर्ष बायोटेक कंपनी बायोकॉन की संस्था पक हैं। टाइम मैगजीन ने दुनिया की 100 सर्वाधिक प्रभावशाली हस्ति यों की सूची में उन्हें  जगह दी है। फोर्ब्सु मैगजीन की 100 सर्वाधिक शक्ति शाली महिलाओं व फॉर्च्यूंन मैगजीन की एशिया प्रशांत की शीर्ष 25 शक्ति शाली महिलाओं की सूची में भी उन्हें जगह मिली है। फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के दुनिया के 100 प्रमुख ग्लोाबल थिंकर्स में भी उनका नाम है। उन्हें भारत के दो शीर्ष नागरिक अलंकरणों पद्मश्री (1989) व पद्म भूषण (2005) से भी सम्माैनित किया गया है।
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Interview by Mayank Shukla
mayank.shukla@inext.co.in

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