-ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में स्थापित म्यूजियम में रखा जाएगा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा लिखा पत्र

-कॉलेज में जल्द शुरू होगा पीएचडी का दाखिला, शोधार्थी उठा सकेंगे म्यूजियम का लाभ

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PRAYAGRAJ: ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में स्थापित डॉ. प्रमिला श्रीवास्तव मेमोरियल म्यूजियम में गुमनाम फ्रीडम फाइटर्स के संघर्षो की दास्तान को सहेजा जाएगा. इसके अलावा यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए पत्रों को भी संग्रहित किया जाएगा. कॉलेज में इसी साल नया हाइटेक म्यूजियम बनकर तैयार हुआ है. इसमें प्रागैतिहासिक एवं ऐतिहासिक पुरास्थल के अवशेष रखे गए हैं. यह म्यूजियम प्रदेश का इकलौता ऐसा म्यूजियम है. जिसे हर तरीके से सुविधा सम्पन्न बनाया गया है. कॉलेज 02 अक्टूबर 2019 तक महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष मना रहा है.

स्वतंत्रता में योगदान होगा संग्रहित

म्यूजियम के कोऑर्डिनेटर डॉ. जमील अहमद ने बताया कि नए म्यूजियम की स्थापना प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा कराई गई है. इसमें गुमनाम फ्रीडम फाइटर से जुड़ी सभी सूचनाओं के संकलन और देश की स्वतंत्रता में दिए गए उनके योगदान को संग्रहित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि ऐसे फ्रीडम फाइटर्स जो आज भी जीवित हैं और गुमनामी के अंधेरे में हैं, उनसे समाज को परिचित कराया जाएगा. इसके अलावा कॉलेज में प्रबंधतंत्र के चेयरमैन आरके श्रीवास्तव के पास राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा लिखे दर्जनों पत्रों को म्यूजियम के माध्यम से लोगों की जानकारी में लाया जाएगा. महात्मा गांधी ने ये सभी पत्र कॉलेज के संस्थापक मुंशी ईश्वर शरण को लिखा था.

पांडुलिपी हो तो दान में दें

डॉ. जमील अहमद ने बताया कि म्यूजियम में जल्द ही डिजिटल डिस्प्ले यूनिट की स्थापना भी की जाएगी. इससे म्यूजियम में आने वाले लोगों को डिस्प्ले यूनिट से इसके बारे में पूरी जानकारी एक ही जगह पर मिल जाएगी. उन्होंने बताया कि लोगों से अपील की जाएगी कि यदि उनके पास कोई पांडुलिपी हो तो वे दान में दें. बता दें 75 साल से पुरानी लिखी और चित्रात्मक पांडुलिपियां धरोहर की श्रेणी में आती हैं. मालूम हो कि कॉलेज को पीजी कक्षाओं की मान्यता पहले ही मिल चुकी है. जल्द ही यहां शोध की पढ़ाई भी शुरू होने वाली है. इसका सीधा लाभ आम छात्र-छात्राओं के अलावा शोधार्थियों को भी मिलेगा.

कॉलेज को पांच छोटे-बड़े प्रोजेक्ट मिले हैं. अभी हमें सर्वेक्षण का लाईसेंस मिला है. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण से पुरातात्विक उत्खनन की अनुमति भी मांगी गई है.

-डॉ. आनंद शंकर सिंह, प्रिंसिपल, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज

ये हैं म्यूजियम में

-वर्तमान में इस म्यूजियम में 50 से ज्यादा मूर्तियां हैं.

-इसमें मध्यकालीन युग से लेकर ब्रिटिस काल तक के सैकड़ों सिक्के हैं.

-पाषाण काल के उपकरण, टेराकोटा की मूर्तियां, कई प्रतिकृतियां भी रखी गई हैं.

-राजपूत, मधुबनी, मुगल, आधुनिक शैली के लघु चित्र तथा कौशाम्बी, श्रंगवेरपुर, गढ़वा, बुंदेलखंड के पुरास्थलों में हुए उत्खनन के फोटोग्राफ भी रखे गए हैं.

-म्यूजियम के पास अपना रिजर्व कलेक्शन स्टोर भी है.

-यहां दूसरे कॉलेजेस और इंस्टीट्यूशंस के छात्र-छात्राएं, शिक्षाविद् एवं इतिहासकार आते रहते हैं.

-म्यूजियम को देखने के बाद अपना कमेंट भी लिखकर जाते हैं.

-यहां प्रोजेक्टर भी लगाया गया है. जिसमें लघु फिल्में दिखाई जाती हैं.