नई दिल्ली (पीटीआई)। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें इस केस से खराब तबियत का हवाला देकर हटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि खराब तबियत की बात पूरी तरह से बकवास है। धवन ने फेसबुक पर पोस्ट करके बताया कि वह अब इस मामले की समीक्षा में शामिल नहीं हैं। उन्होंने लिखा, 'एजाज मकबूल द्वारा बाबरी केस से मुझे हटा दिया गया है, जो जमीयत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बिना डिमोर के 'बर्खास्त' को स्वीकार करते हुए औपचारिक पत्र भेजा है। अब समीक्षा या मामले में शामिल नहीं हूं।'

बकवास है खराब तबियत की बात

धवन ने आगे लिखा, 'मुझे सूचित किया गया है कि श्री मदनी ने संकेत दिया कि मुझे मामले से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि मैं अस्वस्थ हूं। यह पूरी तरह से बकवास है। उन्हें अपने वकील एजाज मकबूल को मुझे बर्खास्त करने का निर्देश देने का अधिकार है। एजाज ने उनके निर्देश पर ही यह काम किया है। लेकिन हटाने का कारण दुर्भावनापूर्ण और असत्य है।' मौलाना अरशद मदनी की अध्यक्षता वाली जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की है। धवन ने कहा कि वह मुस्लिम पार्टियों को विभाजित नहीं करना चाहते हैं।

Ayodhya Case Verdict 2019: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दायर की समीक्षा याचिका

मुस्लिम पक्षकारों को नहीं देना चाहिए इस तरह का बयान

धवन ने पीटीआई को बताया, 'मैंने सभी मुस्लिम पार्टियों के लिए एकजुट तरीके से मामले का तर्क दिया है और वह उसी तरह चाहेंगे। मुस्लिम पार्टियों को पहले अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'यदि मैं अस्वस्थ हूं, तो मैं अन्य मामलों में अदालतों में कैसे पेश हो रहा हूं। मुस्लिम पक्षकारों को इस तरह का बयान देना पूरी तरह से गलत है।' 9 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से राम लल्ला के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि 2.7 एकड़ में फैली पूरी विवादित भूमि को सरकार द्वारा गठित एक ट्रस्ट को सौंप दिया जाएगा, जो उस जगह पर राम मंदिर के निर्माण की निगरानी करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच परामर्श के बाद एक मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन आवंटित की जानी चाहिए।

Posted By: Mukul Kumar

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