जमशेदपुर (ब्यूरो)। डिस्ट्रिक्ट में वर्ष 2018-19 से योजना के तहत अस्पतालों को राशि का भुगतान किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में पूर्वी सिंहभूम जिला को 8,49 करोड़, 2019-2020 में 22.60 करोड़, 2020-2021 में 16.49 करोड़ और वित्त वर्ष 2021-2022 में 6.69 करोड़ रुपए की राशि निर्गत की गई है। इस तरह सबसे ज्यादा 22.60 करोड़ रुपए की राशि 2019-2020 में निर्गत की गई है।

सबसे ज्यादा मेहरबाई टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल को

अस्पताल वार राशि का भुगतान देखें तो पता चलता है कि सरकार की ओर से योजना के तहत मेहरबाई टाटा मेमोरियल अस्पताल को 594.65 लाख रुपए की राशि का भुगतान की गई है। इसके बाद जमशेदपुर मर्सी अस्पताल को 558.73 लाख, प्रणवानंद नेत्र अस्पताल को 401.61 लाख, गंगा मेमोरियल अस्पताल और रिसर्च सेंटर को 322.92 लाख, एएसजी अस्पताल को 364.94 लाख, किडनी केयर सेंटर को 306.05 लाख, पूर्णिमा नेत्रालय को 264.22 लाख, गुरुनानक अस्पताल 113.37 लाख, लक्ष्मी नर्सिंग होम 184.44 लाख, स्मृति सेवा सदन 315.59 लाख, सुबर्णरेखा नर्सिंग होम 205.05 लाख, स्टील सिटी क्लीनिक को 200.03 लाख, संजीव नेत्रालय 193.31 लाख, साई पॉली क्लीनिक 194.40 लाख, सदर अस्पताल 100.31 लाख और साईं सेवा सदन को 92 लाख रुपए की राशि निर्गत की गई है।

एक रुपए का भी नहीं मिला आवंटन

सबसे कम राशि की बात करें तो पैनल में शामिल अस्पताल 193 सीआरपीएफ, 20 बेडेड जीसी अस्पताल, 10 बेडेड यूनिट अस्पताल, साकेत ऑर्थो स्पाइन केयर, रेलवे अस्पताल, हिन्दुस्तान कॉपर वक्र्स अस्पताल, डॉ। अभिषेक चाइल्ड केयर को योजना के तहत एक भी रुपए का भुगतान नहीं मिला है। यानी मरीज यहां इलाज कराने नहीं जाते या यहां इलाज कराना नहीं चाहते या फिर उन्हें यहां योजना के तहत इलाज की सुविधा नहीं मिलती।

मात्र 1.76 लाख का ही आवंटन

आरटीआई के तहत मिली जानकारी से तो ऐसा ही लगता है। छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम को कई करोड़ की राशि योजना के तहत भुगतान किया गया है, लेकिन बड़े अस्पताल में यह काफी कम है। टाटा मोटर्स अस्पताल में योजना के तहत केवल 1.76 लाख का ही आवंटन मिला है। वहीं सीएचसी पटमदा और मुसाबनी को ही क्रमश: 1.01 लाख और 5.84 लाख रुपए का भुगतान मिल चुका है।

जिले में 52 अस्पताल पैनल पर

बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान के मुख्य संरक्षक सदन कुमार ठाकुर को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक पूर्वी सिंहभूम जिले में अब तक 52 अस्पतालों को आयुष्मान भारत के पैनल से जोड़ा गया है।

आयुष्मान के तहत जहां जिस इलाज की सुविधा होती है, मरीजों का वहां इलाज किया जाता है। यही कारण है कि जहां इलाज होता है, वहीं योजना के तहत भुगतान की राशि मिलती है।

डॉ एके लाल, सिविल सर्जन, ईस्ट सिंहभूम

कई अस्पतालों को योजना के तहत भुगतान नहीं मिला है, यानी वहां सही इलाज की सुविधा नहीं है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि मरीजों को सही इलाज मिल सके।

सदन ठाकुर, मुख्य संयोजक, बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान