जमशेदपुर (ूब्यूरो): साकची स्थित श्री अग्रसेन भवन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथावाचक पंडित मनीष शंकर ने परीक्षित जन्म एवं श्राप, श्री शुकदव जी का आगमन, विदुर मैत्रेय संवाद, कपिल देवहुति संवाद, ध्रुव चरित्र प्रसंग पर विस्तार से व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि शुकदेव इस संसार में भागवत का ज्ञान देने के लिए ही प्रकट हुए हैं। शुकदेव का जन्म विचित्र तरीके से हुआ। कहते हैं कि वर्ष तक मां के गर्भ में शुकदेव जी रहे। वहीं श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ था।

यज्ञ का उद्देश्य पवित्र हो

दक्ष यज्ञ प्रसंग सुनाते हुए पंडित मनीष शंकर ने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य पवित्र होना चाहिए। दक्ष कर्मयोगी था, कर्मठ था, किंतु कर्म का उद्देश्य उसने अपवित्र रखा, शिव के अपमान का लक्ष्य रखा, जिसका परिणाम यह हुआ कि उसका यज्ञ भंग हो गया और स्वयं का शिरो'छेदन हुआ। कर्म का उद्देश्य यदि पवित्र है, तो वह कर्म यज्ञ कहलाता है। कथावाचक ने आगे कहा कि भक्ति में दृढ़ता का भाव होने पर ही भागवत साक्षात्कार संभव है। कहा कि साधक को याद रखना चाहिए कि बिना निश्चय के नारायण नहीं मिलते। घ्रुव ने एक निश्चय किया था कि मुझे भगवान का साक्षात्कार करना है। वह निश्चय ही उन्हें लक्ष्य प्राप्ति में सफल बनाता है। कहा कि जो व्यक्ति अपने लक्ष्य को दुर्लभ मानता है, वह कभी भी लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकता।

इनकी रही मौजूदगी

दूसरे दिन मंगलवार को अग्रवाल (नोपाका) परिवार द्वारा आयोजित कथा में शंकर लाल अग्रवाल, शंभू खन्ना, शिवशंकर अग्रवाल, विनोद खन्ना, आनंद अग्रवाल, विश्वनाथ अग्रवाल, कैलाशनाथ अग्रवाल, अमरचंद अग्रवाल, श्रवण कुमार अग्रवाल, दमोदर प्रसाद अग्रवाल समेत अन्य उपस्थित थे।