CHAIBASA: आय से अधिक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के करीबियों की संपत्ति की जांच शुरू कर दी है। कोड़ा के सबसे अधिक करीबी माने जाने वाले विनोद सिन्हा के भाई सुनील सिन्हा की संपति की जांच शुरू की है। विनोद सिन्हा के भाई सुनील सिन्हा के द्वारा बेची व खरीदी जाने वाली 20 से अधिक जमीन प्लॉटों की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रही है। जांच में संदिग्ध जमीन को प्रवर्तन निदेशालय ने सील कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को चाईबासा के हरिगुटु साई, टुंगरी व टाटा कॉलेज इलाके में कई जमीनों की जांच शुरू की। इस दौरान ईडी कई लोगों से पूछ ताछ भी कर रही है। समाचार लिखे जाने तक करीब पांच जमीनों की जांच हुई है जिसमें तीन से चार प्लॉटों को ईडी ने सील कर दिया है। जबकि अभी कई जमीनों की जांच में जुटी है।

अमित कर रहे ईडी का नेतृत्व

ईडी की टीम का नेतृत्व असिस्टेंट डायरेक्टर अमित कुमार कर रहे हैं। टीम में करीब सात अधिकारी व कर्मी शामिल हैं। चाईबासा सदर अंचल के अमीन व कर्मी भी जांच में ईडी अधिकारियों व कर्मियों को सहयोग कर रहे हैं। जांच के संबंध में ईडी के अधिकारियों ने मीडिया से कुछ भी बात करने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक सील प्लाटों में 1.22 एकड़ के दो प्लॉट, 45 व 40 डिसमिल के दो प्लॉट शामिल हैं। सूत्रों ने बताया है कि चाइबासा में और 9 संपत्तियों को सीज किया जाना है। कुल 20 संपत्तियों की सूची ईडी के अधिकारी साथ लाए थे। मालूम हो कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री मंत्री मधु कोड़ा और उनके सहयोगियों पर 14 जून 2018 को आरोप तय कर दिया था। इसके मुताबिक मधु कोड़ा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चार साल में अवैध तरीके से 36 अरब 33 करोड़ 11 लाख 16,240 रुपए की चल-अचल संपत्ति अíजत की। पद का दुरुपयोग कर उन्होंने इस दौरान 24 लाख 29 हजार 990 यूएस डॉलर भी अवैध तरीके से अíजत किए। इस मामले में कोड़ा के साथ उनके सहयोगी विनोद सिन्हा, विजय जोशी, अर¨वद व्यास, विकास सिन्हा, अनिल आदिनाथ बास्तवड़े, मनोज कुमार, बाबूलाल पुनमिया पर आरोप तय हुआ था।

फरार चल रहे सुनील व मनोज

विनोद सिन्हा के भाई सुनील कुमार सिन्हा व मनोज कुमार सिन्हा को सीबीआई की विशेष अदालत ने 1.10 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रैक्टर खरीद घोटाले में फरार घोषित कर रखा है। दोनों को सीबीआई नौ साल बाद भी गिरफ्तार नहीं सकी है। मामले की जांच सीबीआई दिल्ली की आíथक अपराध शाखा कर रही थी। विशेष न्यायाधीश एके मिश्रा की अदालत ने दोनों को फरार घोषित करते हुए संबंधित फाइल अलग करने का निर्देश दे रखा है। 14 फरवरी 2019 को मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती आदेश जारी किया था। मार्च में फरार घोषित किया गया। वर्ष 2007-08 में किसानों के फर्जी कागजात देकर बैंकों से ट्रैक्टर की खरीदारी की थी। मामला उजागर होने के बाद सीबीआई की आíथक अपराध शाखा ने 2010 में प्राथमिकी दर्ज की थी।