जमशेदपुर : शहर में कोरोना का भय इस कदर लोगों में समा गया है कि साधारण बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए भी कोई गुहार लगाए तो सामने कोई नहीं आ रहा है। जी हां, सिस्टम पर चोट करती एक ऐसी ही घटना उलीडीह थाना अंतर्गत शंकोसाई रोड नंबर पांच में घटी। जहां एक पत्नी अपने बीमारी पति को अस्पताल ले जाने के लिए कभी ऑटो वाले को तो कभी एंबुलेंस वाले को फोन करती रही, लेकिन कोई आगे नहीं आया। इतना ही नहीं, महिला ने थाने में भी फोन किया और अपने पति की जान बचाने के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वहां भी कोई मदद नहीं मिली। इधर, पति की हालत बिगड़ती चली गई और उसने इलाज के अभाव में घर में ही दम तोड़ दिया। वहीं, जब समाज के नेता के सहयोग से मेडिकल टीम पहुंची और मृतक का कोरोना टेस्ट किया तो रिपोर्ट निगेटिव निकली। इसके बाद आसपास के लोग सामने आए, लेकिन तब तक तो जिंदगी खत्म हो गई थी।

क्या है मामला

जहां बीरेन साहू नामक 40 वर्षीय व्यक्ति की तबीयत शुक्रवार की सुबह 8 बजे खराब हुई। पत्नी राजेश्वरी साहू ने 9 बजे पहले एक टेंपो वाले को अस्पताल ले जाने को कहा, तो वह बहाना बनाकर नहीं आया। इसके बाद उसने एंबुलेंस को फोन किया, एंबुलेंस चालक ने भी व्यस्त होने की बात कह दी। इसके बाद महिला अपने दो मासूमच्बच्चों को संभालते हुए थाने में फोन लगाई। अपने पति को अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई सामने नहीं आया। अंत में पति का हाथ-पैर ठंडा हो गया और वह इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। इसी बीच महिला ने अपने समाज के नेता टेल्को निवासी मनोज गुप्ता को सूचना दी। मनोज गुप्ता मानगो पहुंचे और एसडीओ चंदन कुमार को फोन किया और मृतक की कोरोना जांच की गुहार लगायी। इसके बाद साढ़े चार बजे चिकित्सक की टीम पहुंची और कोराना जांच की तो रिपोर्ट निगेटिव आई। जब स्थानीय लोगों को जानकारी हुई कि मृतक को कोरोना नहीं है, इसके बाद लोग सामने आए।

पान दुकान बंद होने पर घूमकर बेचता था चाय

मृतक बीरेन साहू की पत्नी राजेश्वरी साहू ने बताया कि मेरे पति का साकची करीम सिटी के पास पान दुकान थी। कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण दुकान बंद हो गयी। घर परिवार चलाने के लिए वह घूम-घूमकर चाय बिक्री कर किसी तरह गुजर बसर कर रहे थे। राजेश्वरी ने बताया कि दो दिनों से बोल रहे थे कि बदन हाथ में दर्द कर रहा है। गुरुवार को वह साकची बाराद्वारी में डा। जेना के यहां दिखाकर आए थे। रात में दवा खाकर सो गए। सुबह आठ बजे उन्हें उठाया। दरवाजे के सामने ब्रस किए। इसके बाद नींबू, तुलसी पत्ता, अदरक डालकर लाल चाय बनाकर सेव के साथ उन्हें दी। चाय व सेव खाकर वह दवा खाए। करीब 9 बजे उन्होंने कहा कि सांस फूल रहा है। पत्नी के अनुसार इस बात का जिक्र मैंने पड़ोसी महिला से की। उसने कहा कि जल्दी अस्पताल ले जाओ। राजेश्वरी ने बताया कि इसके बाद तो मैं लगातार टेंपो, एंबुलेंस, पुलिस, स्थानीय लोगों वे नेता से गुहार लगाती रही, लेकिन संभवत: कोरोना के भय से कोई नहीं आया। महिला के अनुसार सुबह से फोन करने के बाद दोपहर में पुलिस आए और नाम पता पूछकर चले गए। अंत में अस्पताल तक पहुंचने का साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण मेरे पति की मौत हो गयी।

कभी दो मच्सूम बच्चों को संभालती तो कभी तड़पते पति को निहारती

मृतक बीरेन साहू की पत्नी राजेश्वरी साहू की स्थिति इतनी खराब हो गयी कि आसपास के लोगों के आंखों से बरबस आंसू निकल गए। दो छोटे-छचेटे बच्चे एक तीन साल का तथा दूसरा डेढ़ साल का। मां को रोतच् देख बच्चे भी रोते। बेबस राजेश्वरीच्कभी बच्चे को ढाढस बंधाती तो कभी पति को निहारती। यह सिलसिला सुबह 9 बजे से 4.30 बजे तक तब तक चला जब तक चिकित्सक की टीम ने जांच कर कोरोना नहीं होने की जानकारी दी। जब लोगों को जानकारी हुई कि मृतक को कोरोना नहीं था।