रांची(ब्यूरो)। रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड(एचईसी) कंपनी फिर से अपने पुराने तेवर में लौट सकती है। एचईसी को खराब स्थिति से निकालने की तैयारी चल रही है। खस्ताहाल से निकलने के लिए एचईसी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कोलैटरल लोन देने की तैयारी की जा रही है। इस लोन के बदले में बैंक एचईसी का जमीन बंधक रखेगा, इसकी प्रक्रिया जारी है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा एचईसी के शहीद मैदान के आसपास की जमीन देखी गई है, इस लोन को दिलाने में भारत सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

720 करोड़ मिलेगा लोन

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एचईसी को 720 करोड़ रुपए तक का लोन बैंक द्वारा दिया जाएगा। 720 करोड़ रुपए वर्किंग कैपिटल पूंजी के रूप में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दिया जाएगा। वर्किंग कैपिटल मिलने पर एचईसी फि र से पुराने रूप में खड़ा हो सकता है। सभी कर्मचारियों को बकाया वेतन मिल सकेगा। साथ ही सुचारू रूप से उत्पादन भी शुरू हो सकेगा।

एचईसी के पास हैं कई ऑर्डर

चंद्रयान-3 का लॉन्चिंग पैड एचईसी ने बनाया है। अभी भी एचईसी के पास भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का आकांक्षा प्रोजेक्ट मिला हुआ है, जिस पर काम चल रहा है। इसरो का आर्डर भी एचईसी पूरा कर रहा है। भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का आर्डर एचईसी को मिला है, जिस पर एचईसी काम कर रहा है। लेकिन काम करने वाले लोगों को 20 महीने से सैलरी नहीं मिली है। एचईसी के पास वर्किंग कैपिटल भी नहीं है, जिसके कारण काम पर भी असर पड़ रहा है।

समय से पहले ऑर्डर पूरे

मोबाइल लॉन्चिंग पैड, टावर क्रेन, फ ोल्डिंग कम वर्टिकली रिपोजिशनेबल प्लेटफ ार्म, होरिजोंटल स्लाइडिंग डोर, 6-एक्सिस सीएनसी डबल कॉलम वर्टिकल टर्निंग और बोरिंग मशीन, 3-एक्सिस सीएनसी सिंगल कॉलम वर्टिकल टर्निंग एंड बोरिंग मशीन सहित जटिल उपकरणों की आपूर्ति एचईसी ने तय समय के पहले दिसंबर 2022 में ही कर दी थी।

वर्क ऑर्डर बहुत है

एचईसी के पास वर्क ऑर्डर की कमी नहीं है, लेकिन वर्किंग कैपिटल की कमी के चलते समय पर काम पूरा नहीं हो पा रहा है और इस वजह से कंपनी लगातार घाटे में डूबती जा रही है। एचईसी ने भारी उद्योग मंत्रालय से एक हजार करोड़ रुपए वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराने के लिए कई बार गुहार लगाई है, लेकिन मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया था कि केंद्र सरकार कारखाने को किसी तरह की मदद नहीं कर सकती है। कंपनी प्रबंधन को खुद अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।

3500 से ज्यादा कर्मी

चंद्रयान-3 के लिए लॉन्चिंग पैड सहित कई महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण करने वाली कंपनी के इंजीनियरों, अफ सरों, कर्मियों को 20 महीनों से सैलरी नहीं मिली है। पिछले दो-तीन वर्षों से वर्किंग कैपिटल के गंभीर संकट से जूझ रहे एचईसी में आज की तारीख में 3500 से ज्यादा इंजीनियर और कर्मी कार्यरत हैं। कंपनी पर इनका 20 महीने का वेतन बकाया है। वेतन की मांग को लेकर इंजीनियर, कर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन चंद्रयान-3 के लिए इसरो से मिले वर्क ऑर्डर को पूरा करने में उन्होंने कोई कसर बाकी नहीं रखी।

कभी 22 हजार कर्मी थे

कभी देश की शान कहलाने वाली कंपनी एचईसी आज जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है। जिस कंपनी में कभी 22 हजार स्थायी कर्मचारी थे, आज केवल 1200 ही स्थायी हैं। बावजूद उन्हें नियमित रूप से वेतन नहीं मिल रहा है। 1900 ठेका मजदूरों से काम करवाया जा रहा है। वहीं, 646 एकड़ जमीन कंपनी झारखंड सरकार को दे चुकी है।

कर्मचारियों को कुछ पता नही

यहां के कर्मचारियों का भविष्य कितना सुरक्षित है, कहा नहीं जा सकता। परिजन भी परेशान रहते हैं। अभी भी सैकड़ों कर्मचारियों का 1997 से 2007 तक का एरियर बकाया है। अब लोगों की नजर आगामी सरकार पर है, जो इस कंपनी के भविष्य के बारे में निर्णय लेगी। देखना है कि जिस कंपनी ने कभी स्पेस सेंटर, रेलवे, सीसीएल, ऊर्जा मंत्रालय सहित कई संस्थानों के लिए उपकरणों का निर्माण किया, उसकी स्थिति कैसे सुधरती है।

लीज पर दे दिया आवास

झारखंड गठन के बाद तो एचईसी ने अपने अधिकतर कार्यालय सरकार को लीज पर देने का काम किया। अपने अधिकतर आवासों को भी कर्मचारियों को लीज पर दे दिया। जब स्थिति ज्यादा खराब हो गई तब वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से झारखंड के कई सांसदों के साथ भारतीय मजदूर संघ से जुड़े लोग जाकर मिले। इसके बाद इसे बंद नहीं करने का निर्णय लिया गया।

अस्पताल प्राइवेट को दे दिया

एचईसी की जब स्थापना हुई थी तो यहां भव्य अस्पताल बना था। आज स्थिति ऐसी हो गई कि उसे निजी हाथों में देने को कंपनी मजबूर हो गई। कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए कंपनी की ओर से 21 स्कूल चलाए जाते थे। आज सभी स्कूल बंद हो चुके हैं। कॉलोनी की अधिकतर जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। सीवरेज एवं नालियों की स्थिति तो और खराब है।

1958 में बना एचईसी

1958 में कंपनी की स्थापना देश में भारी उद्योग स्थापित करने के लिए हुई। बोकारो स्टील सिटी सहित कई कंपनियों की स्थापना एचईसी में निर्मित सामानों से की गई। देश में एचईसी भारी अभियंत्रण निगम की पहली ऐसी कंपनी थी, जहां एक साथ एचएमटीपी, एचएमबीपी एवं एफ एफ पी फैक्ट्री की स्थापना एक स्थान पर हुई।

लगातार जा रहा है घाटे में

साल 2018-19 93.67 करोड़

साल 2019-20 405.37 करोड़

साल 2020-21 175.78 करोड़

साल 2021-22 256.07 करोड़

साल 2022-23 283.58 करोड़